मकर संक्रांति गंगासागर स्नान पर्व समापन श्रद्धालूगण वापस लौटे
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:
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कोलकाता। माघ मकर संक्रांति के पावन अवसर पर पश्चिम बंगाल के सागर द्वीप में आयोजित होने वाला ऐतिहासिक गंगासागर मेला, पवित्र डुबकी और विविध आध्यात्मिक कार्यक्रमों के साथ संपन्न हो गया है। लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा और बंगाल की खाड़ी के संगम पर अंतिम ‘आस्था की डुबकी’ लगाई।
समापन की मुख्य विशेषताएं यह है कि अंतिम स्नान और अनुष्ठान: मकर संक्रांति (14- से 20 जनवरी 2026) के दौरान, सूर्य के उत्तरायण होने के समय श्रद्धालुओं ने पवित्र डुबकी लगाई और पापों से मुक्ति के लिए प्रार्थना की।
कपिल मुनि मंदिर में पूजा: स्नान के बाद, भक्तों ने कपिल मुनि मंदिर में पूजा-अर्चना की, जो इस तीर्थयात्रा का एक अनिवार्य हिस्सा है।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम के संबंध मे बता दें कि माघ संक्रांति मेले के समापन के दौरान सागर आरती, पवित्र मंत्रोच्चार, भजनों और संतों के प्रवचनों जैसे कई आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो माहौल को अलौकिक बना देते हैं।
हजारों दीयों से सजावट सागर मे जगमग दीप विपुल रत्न मणियों की शोभा बढा रही थी.हर दिन शाम को, समुद्र तट पर हजारों दीये (मिट्टी के दीपक) जलाए गए, जिससे पूरा सागर तट दिव्य रोशनी से जगमगा उठा।
सुरक्षित संपन्न: इस वर्ष का मेला बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हुआ। प्रशासन द्वारा की गई कड़े सुरक्षा इंतजामों और उन्नत तकनीकों (जैसे थर्मल-इमेजिंग ड्रोन और सीसीटीवी) के साथ लगभग 2.30 करोड़ से अधिक तीर्थयात्रियों ने भाग लिया।
“सारे तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार”: यह कहावत इस पावन समागम की महत्ता को दर्शाती है, जहाँ तीर्थयात्री अपनी मुक्ति और मोक्ष की कामना के साथ सागर तट को विदा करते हैं।
यह मेला न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का केंद्र बना, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों के मिलन का भी साक्षी रहा है।
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