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AI का बढ़ता खौफ, IT Sector में हाहाकार!

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AI का बढ़ता खौफ, IT Sector में हाहाकार!

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:

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9822550220

 

नई दिल्ली। (AI) को लेकर बढ़ी आशंकाओं ने आईटी शेयरों में तेज बिकवाली शुरू कर दी है, जिससे इंफोसिस और विप्रो 3% तक टूट गए। बाजार को डर है कि AI अब सिर्फ सहायक नहीं, बल्कि कंपनियों की जगह ले सकता है, इस माहौल को विदेशी ब्रोकरेज ने “SaaSpocalypse” करार देते हुए निवेशकों को सतर्क किया है।

गुरुवार के कारोबार में इंफोसिस और विप्रो के शेयरों में 2 से 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। बता दें कि इससे पहले अमेरिकी बाजार में इन कंपनियों के ADRs में तेज कमजोरी देखने को मिली थी, जिसने घरेलू निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।

मौजूद जानकारी के अनुसार इंफोसिस का शेयर 3.15 प्रतिशत टूटकर 1,425.60 रुपये पर आ गया, जबकि विप्रो 2.5 प्रतिशत गिरकर 224.14 रुपये पर कारोबार करता दिखा। टीसीएस के शेयरों में भी 3.27 प्रतिशत की गिरावट आई और भाव 2,814.70 रुपये तक फिसल गया।

इस कमजोरी का असर पूरे आईटी सेक्टर पर पड़ता नजर आ रहा है। कोफ़ोर्ज, परसिस्टेंट सिस्टम्स, एलटीआईमाइंडट्री और एचसीएलटेक जैसे शेयरों में भी गतिविधि बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। गौरतलब है कि पिछले कारोबारी सत्र में ही निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 2 प्रतिशत टूट चुका था, जो निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, हालिया दबाव की बड़ी वजह अमेरिका की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप एंथ्रोपिक है, जिसने हाल ही में कॉरपोरेट लीगल टीमों के लिए एक नया एआई टूल पेश किया है। Claude चैटबॉट बनाने वाली इस कंपनी का दावा है कि उसका टूल कॉन्ट्रैक्ट रिव्यू, एनडीए जांच , कंप्लायंस वर्कफ्लो, लीगल ब्रीफ तैयार करने और स्टैंडर्ड जवाबों जैसे कई काम खुद कर सकता है।

इस घटनाक्रम ने पहले से ही दबाव में चल रहे सॉफ्टवेयर और आईटी शेयरों की चिंता और बढ़ा दी है। निवेशकों को डर है कि एआई के व्यापक इस्तेमाल से प्रतिस्पर्धा तेज होगी और कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ेगा। इसी आशंका के चलते विप्रो के ADRs 4 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 2.39 डॉलर पर बंद हुए, जबकि इंफोसिस के ADRs में 5.12 प्रतिशत की गिरावट आई और भाव 15.76 डॉलर पर आ गया।

बाजार जानकारों का कहना है कि एआई को लेकर सबसे बड़ा डर यह है कि इससे आईटी कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त कमजोर हो सकती है। LPL Financial के इक्विटी रिसर्च प्रमुख थॉमस शिप के अनुसार, एआई के चलते कीमतों पर दबाव बढ़ेगा और कंपनियों को बदलना पहले से आसान हो सकता है, जिससे उनके भविष्य के ग्रोथ अनुमान और वैल्यूएशन तय करना कठिन होता जा रहा है।

गौरतलब है कि जिन क्षेत्रों को अब तक एआई से अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता था, जैसे लीगल सर्विसेज, डेटा एनालिटिक्स और कस्टमर सपोर्ट, वे भी अब इसके दायरे में आ रहे हैं। अगर इन कामों का ऑटोमेशन तेज हुआ, तो आईटी सर्विसेज इंडस्ट्री के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म जेफ़रीज़ ने इस बदले माहौल को “SaaSpocalypse” करार दिया था। ब्रोकरेज के अनुसार निवेशकों की सोच तेजी से इस धारणा की ओर बढ़ रही है कि एआई सिर्फ मददगार नहीं, बल्कि कई मामलों में कंपनियों की जगह लेने वाला साबित हो सकता है

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