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(भाग:226) सुग्रीव जामुुबतं और हनुमान जी महाराज का सीता माता की खोज में वानरों को भेजना

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भाग:226) सुग्रीव जामुुबतं और हनुमान जी महाराज का सीता माता की खोज में वानरों को भेजन

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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महाभारत के वनपर्व के रामोपाख्यान पर्व के अंतर्गत अध्याय 282 में सुग्रीव का सीता की खोज में वानरों को भेजने का वर्णन हुआ है। यहाँ वैशम्पायन जी ने जनमेजय से सुग्रीव का सीता की खोज में वानरों को भेजने के वर्णन की कथा कही है।[1]

लक्ष्मण द्वारा राम को वृतान्त सुनाना

पत्नी सहित वानरराज सुग्रीव विनीत भाव से लक्ष्मण जी की पूजा करके उन्हें साथ ले गये। किसी से भी भय न मानने वाले सुमित्रानन्दन लक्ष्मण ने उस पूजा (आदर-सत्कार) से प्रसन्न हो उनसे श्रीरामचन्द्रजी की कही हुई सारी बातें कह सुनायी। राजेन्द्र! वह सब कुछ पूरा-पूरा सुनकर नम्रतापूर्वक हाथ जोडते हुए भार्या तथा सेवकों सहित वानरराज सुग्रीव नरश्रेष्ठ लक्ष्मण से सहर्ष निवेदन किया- ‘लक्ष्मण! मैं न तो दुर्बुद्धि हूँ, न अकृतज्ञ हूँ और न निर्दस हूँ। मैंने सीता की खोज के लिये जो प्रयत्न किया है, उसे सुनिये।[1]

 

सुग्रीव द्वारा वानरों को भेजना

मैंने सब दिशाओं में सभी विनयशील वानरों को भेज दिया है और उन सबके लिये एक महीने के अंदर लौट आने का समय निश्चित कर दिया है। ‘वीर! वे सब लोग वन, पर्वत, पु, ग्राम, नगर तथा आकरों सहित समुद्रवसना इस सारी पृथ्वी पर सीता की खोज करेंगे। ‘वह एक मास, जिसके समाप्त होने तक वानरों को लौट आना है, पाँच रात में पूरा हो जायगा। तत्पश्चात आप श्रीरामचन्द्रजी के साथ सीता का अत्यन्त प्रिय समाचार सुनेंगे’। बुद्धिमान वानरराज सुग्रीव को साथ लेकर माल्यवान पर्वत के पृष्ठभाग में रहने वाले श्रीरामचन्द्र जी के पास गये। वहाँ उन्होंने बताया कि सीता का अनुसंधान कार्य आरम्भ हो गया है।

इसके बाद मास पूर्ण होने पर तीन दिशाओं की खोज करके सहस्रों वानर प्रमुख वहाँ आये। केवल वे ही नहीं आये, जो दक्षिण दिशा में पता लगाने गये थे। आये हुए वानरों ने श्रीरामचन्द्र जी को बताया कि समुद्र से घिरी हुई सारी पृथ्वी हमने देख डाली, परंतु कहीं भी सीता अथवा रावण का दर्शन नहीं हुआ। जो प्रमुख वानर दक्षिण दिशा की ओर गये थे, उन्हीं से सीता का वास्तविक समाचार मिलने की आशा बँधी हुई थी, इसीलिये व्यथित होने पर भी श्रीरामचन्द्र जी अपने प्राणों को धारण किये रहे। दो मास व्यतीत हो जाने पर कुछ वानर बड़ी उतावली के साथ सुग्रीव के पास आये और इस प्रकार कहने लगे- ‘वानरराज! बाली ने तथा आपने भी जिस समृद्धिशाली महान मधुबन की रक्षा की थी, उसे पवननन्दन हनुमान जी (राजाज्ञा के बिना) अपने उपभोग में ला रहे हैं।

 

‘राजन! उनके साथ बालिपुत्र अंगद तथा अन्य सभी श्रेष्ठ वानर इस काम में भाग ले रहे हैं, जिन्हें आपने दक्षिण दिशा में सीता की खोज के लिये भेजा था’। उन वानरों के अनुचित बर्ताव का समाचार सुनकर सुग्रीव को यह विश्वास हो गया कि वे सब काम पूरा करके लौटे हैं; क्योंकि ऐसी धृष्टता पूर्ण चेष्टा उन्हीं सेवकों की होती है, जो अपने कार्य में सफल हो जाते हैं। बुद्धिमान वानर प्रवर सुग्रीव ने श्रीरामचन्द्र जी से अपना निश्चय बताया। श्रीरामचन्द्र जी ने भी अनुमान से यह मान लिया कि उन वानरों ने अवश्य ही मिथिलेश कुमारी सीता का दर्शन किया होगा।

श्रीराम लीला कलाकारों ने मां सीता की खोज व लंका दहन की लीला का मंचन किया। भगवान राम लक्ष्मण व हनुमान जी के साथ वानरों की सेना सीता की खोज में निकली। लंका की अशोक वाटिका में हनुमान जी को मां सीता मिली। इसी दौरान राक्षसों ने हनुमान जी बाजार में कलाकारों ने मां सीता की खोज व लंका दहन की लीला का मंचन किया। भगवान राम, लक्ष्मण व हनुमान जी के साथ वानरों की सेना सीता की खोज में निकली। लंका की अशोक वाटिका में हनुमान जी को मां सीता मिली। इसी दौरान राक्षसों ने हनुमान जी को पकड़ कर रावण के पास ले गए। रावण के आदेश पर राक्षसों ने हनुमान की पूछ में आग लगा दी। तब हनुमान ने लंका का दहन किया।

रविवार की रात मंझनपुर में चल रही रामलीला में गैर जनपद से आए कलाकारों ने सीता खोज व लंका दहन की लीला का मंचन किया। बालि के मरने पर सुग्रीव किष्किन्धा के राजा बने और अंगद को युवराज पद मिला। इसके बाद सुग्रीव ने असंख्य वानरों को लेकर भगवान राम के साथ मां सीता खोज में निकल पड़े। हनुमान जी ने सीता जी का पता लगाया। पहले तो हनुमान जी को देखकर सीता डर गई। उन्होंने सोचा की यह कोई राक्षस है, लेकिन जब हनुमान जी ने प्रभुराम की अंगुठी दिया तो उन्हें विश्वास हुआ कि यह भगवान का भेजा हुआ दूत है। मां सीता ने हनुमान जी को आप बीती बताई और कहा कि प्रभुराम से कहना कि वह जल्द यहां से मुझे ले चले। मां सीता को अंगूठी देकर हनुमान वापस चले तो राक्षसों ने उन्हें पकड़ लिया।

और उनकी पूंछ में आग लगा दी तभी भक्त हनुमान ने सोने की लंका को जला दिया। लंका दहन को देखकर दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। जली सोने की लंका हुई, आतिशबाजी

 

संसू, कड़ा : दारानगर दशहरा महोत्सव व रामलीला के नौवे दिन लंका दहन की लीला का मंचन कलाकरों ने म्योहरा गांव में

 

पेश किया। मां सीता की खोज मे निकले राम-लक्ष्मण के साथ वानर सेना वन वन भटकती रही। जब प्रभु श्रीराम को जटायु से जानकारी मिली की मां सीता का हरण लंका पति रावण ने किया है। उसके बाद सीता की खोज में हनुमान को लंका भेजा गया। हनुमान जी ने मां सीता से मिलकर प्रभुराम का संदेश दिया। जहां हनुमान की पूछ मे राक्षसों ने आग लगा दिया। गुरुवार को रामलीला का मंचन महुआ तालाब किनारे हुआ। राम-लक्ष्मण के साथ उनकी पूरी वानर सेना मौजूद थी। लंका पहुंचे हनुमान जी ने अशोक वाटिका में सीता माता से मिलकर अपने आने का प्रायोजन बताया। हनुमान ने लगाई रावण की लंका में आग

 

संसू नारा: विकास खंड सिराथू क्षेत्र के नारा बाजार में आयोजित हुई रहा है लीला मैं सोमवार को लंका दहन कार्यक्रम का मंचन किया गया। लंका पहुंचे हनुमान ने सीता मां अशोक वाटिका में भगवान श्रीराम की मुद्रिका देने के बाद अशोक वाटिका को उजाड़ ने लगे तब राक्षसों ने उन्हें रोका तो उन्हें कईयों को मारकर मूर्छित कर दिया। जिसके बाद रावण का पुत्र अक्षय कुमार हनुमान जी से युद्ध करने पहुंचा। हनुमान जी ने उसका वध कर दिया। जिसके बाद इंद्रजीत अशोक वाटिका पहुंचकर हनुमान जी को नागपाश में बांध कर रावण के दरबार में लाया। जहां रावण ने हनुमान जी के पूंछ में आग लगा दी जिसके बाद हनुमान जी की पूंछ में लगी आग से पूरी लंका जला दिया। मंगलवार को मेले का आयोजन किया जाएगा जो तीन दिनों तक चलेगा। ये जानकारी मेला प्रबंधक अमन त्रिपाठी ने दी। शमशाबाद का दशहरा मेला आज से

 

जासं, कौशांबी : सिराथू विकास खंड क्षेत्र के सांसद आदर्श गांव शमशाबाद तीन दिवसीय मेला व इनामी दंगल का आयोजन होगा मंगलवार से होगा। मेले का शुभारंभ सांसद विनोद सोनकर, सिराथू विधायक शीतला पटेल, जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा करेंगे। तीन दिवसीय मेले के बाद दंगल का आयोजन किया जाएगा। रात को रामलीला का भी मंचन भी होगा। ये जानकारी ग्राम प्रधान राजेश कुमार कसेरा ने दी। सीता हरण का हुआ मंचन

 

संसू, कसेंदा : विकास खंड नेवादा के नूरपुर हाजीपुर गांव में चल रही रामलीला के आठवें दिन कलाकारों ने सीता हरण का मंचन किया गया। माता सीता का हरण होते ही दर्शक भावुक हो कर खड़े हो गए ।

 

सीता माता का हरण करने के लिए रावण ने मामा मारीच को बुलाया और कहा की तुम सोने के मृग का रूप धारण कर के सीता के सामने जाओ। अपना स्वर्ण मृग रूप दिखाओ जिससे मनमुग्ध होकर सीता तुम्हें पकड़े को कहे और जैसे ही तुम्हारे पीछे राम और लक्ष्मण जाएंगे वैसे ही मै सीता का हरण कर लूंगा। मारीच ने यही किया तब रावण साधू भेष में पहुंचा सीता से भिक्षा मांगने लगा सीता भिक्षा लेकर आयीं तब रावण ने कहा देवी हम बंधी भिक्षा नहीं लेते आप रेखा के बाहर आओ तब हम भिक्षा लेंगे जैसे ही सीता रेखा के बाहर आई वैसे ही रावण माता सीता का हरण करके पुष्पक विमान पर बैठाकर अपनी लंका लेकर चले जाते हैं। रामलीला के मंचन 15 अक्टूबर से शुरू

 

संसू, नगर पालिका परिषद भरवारी के पुरानी बाजार की रामलीला के मंचन 15 अक्टूबर से शुरू होगा। जो 25 अक्टूबर को तक चलेगा। रामलीला को अच्छे तरीके से संपन्न कराने के लिए सोमवार को चायल विधायक संजय गुप्ता की मौजूदगी में बैठक हुई।

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