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🚩झूठ छल कपट विश्वाशघात धोखाधडी बेईमानी, अन्याय और भ्रष्टाचार से कमाया धन जीवन में अशांति पैदा करता है

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🚩झूठ छल कपट विश्वाशघात धोखाधडी बेईमानी, अन्याय और भ्रष्टाचार से कमाया धन जीवन में अशांति पैदा करता है

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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🚩ऋषि चाणक्य कहते हैं कि जो धन झूठ छल, कपट, विस्वासघात,धोखाधडी, बेईमानी, अन्याय और भ्रष्टाचार से कमाया है वह जीवन में अशांति और बेचैनी पैदा करता है। ऐसे धन को धर्म के काम में लगाने का औचित्य नहीं है। जो धन किसी के आंसू निकालकर या परेशान करके कमाया हो, किसी को दुखी करके कमाया हो, वह ठीक नहीं है। आज सबसे बड़ा पापी वह है जो परिग्रह करता है। वर्तमान में धन से इज्जत मिलती है। यदि व्यक्ति के पास सबकुछ है और धन नहीं है तो उसे इज्जत नहीं मिलती है। न्याय से उपार्जित किया धन श्रावक के जीवन को आगे बढ़ाता है, इससे श्रावक को शांति मिलती है। उक्त विचार आचार्य मनीषप्रभ सागर ने बुधवार को कंचनबाग स्थित श्री नीलवर्णा पार्श्वनाथ जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक ट्रस्ट में धर्मसभा में व्यक्त किए।

आहार का उपवास रखना तो आसान है, लेकिन शब्दों का भी उपवास रखना चाहिए। हालांकि यह सबसे कठिन तपस्या है। शास्त्रों में मन, वचन और कर्म को आधार मानकर हमारे व्यक्तित्व को परिभाषित किया गया है। रोजमर्रा के जीवन में कड़वे शब्दों के प्रयोग से ही विवादों का जन्म होता है। इनसे बचने के लिए अपने सामर्थ्य के अनुसार सप्ताह, माह या छह माह में एक बार मौन जरूर रखें। यह बात साध्वी मयणाश्रीजी ने रेसकोर्स रोड आराधना भवन पर आयोजित धर्मसभा में कही है।

चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में लिखा है कि गलत तरीकों से अर्जित किया धन इंसान के पास ज्यादा दिन नहीं टिकता है. ऐसा धन आपके पास ज्यादा से ज्यादा एक दशक तक ही रहता है. इसके बाद ऐसी संपत्ति का विनाश होना तय है

आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में जीवन की समस्याओं और उनके उन्मूलन का जिक्र किया है. चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में लिखा है कि गलत तरीकों से अर्जित किया धन इंसान के पास ज्यादा दिन नहीं टिकता है. ऐसा धन आपके पास ज्यादा से ज्यादा एक दशक तक ही रहता है. इसके बाद ऐसी संपत्ति का विनाश होना तय है. पापकर्म या किसी को कष्ट देकर कमाया हुआ धन अभिशापित होता है. ये धन जहां भी जाएगा, बर्बादी ही लेकर आएगा।

चाणक्य ने अपनी नीति में एक श्लोक का जिक्र किया है, जो गलत तरीकों से धन कमाने वालों की ओर इशारा करता है. श्लोक है- ”अन्यायोपार्जितं द्रव्यं दश वर्षाणि तिष्ठति। प्राप्ते एकादशे वर्षे समूलं च विनश्यति।।” इस श्लोक का अर्थ है कि अन्याय और गलत ढंग से कमाया धन ज्यादा से ज्यादा 10 साल तक इंसान के पास रहता है. इसके बाद निश्चित ही इस धन का विनाश होना है. आइए जानते हैं कौन से तरीकों से कमाया हुआ धन इंसान के पास ज्यादा दिन नहीं टिकता है.

चोरी का धन- चाणक्य ने अपनी नीति में लिखा है कि जो लोग चोरी और भ्रष्टाचार करके धन अर्जित करने का प्रयास करते हैं, उनके पास ये धन ज्यादा दिन के लिए नहीं रहता है. चोरी के बाद बेशक आपका बैंक अकाउंट रुपयों से भर जाए, लेकिन इसके साथ आया अभिशाप एक दिन आपको इन पैसों से दूर कर देगा. ये अभिशाप आपको पाई-पाई के लिए मोहताज बना सकता है.

 

धोखा देकर कमाया धन- किसी इंसान को धोखा देकर या झूठ बोलकर कमाया हुआ धन भी स्थिर नहीं होता है. ऐसे तरीकों से कमाया धन कभी जरूरत के समय काम नहीं आता है. जिस घर में ये पैसा जाता है, वहां कभी बरकत नहीं रहती है. खुद घर के लोग ऐसे इंसान पर भरोसा नहीं करते हैं. ऐसे लोग गलत तरीकों से धन कमाकर भी अपनों का दिल नहीं जीत पाते हैं.

 

मजदूर शोषण करके कमाया धन- आचार्य चाणक्य के अनुसार, दूसरों का शोषण करके कमाए हुए धन से ना तो इंसान का भला होता है और ना ही वो धन हमेशा इंसान के पास टिकता है. फैक्टरी या मील के मालिकों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए. अधिक धन अर्जित करने के लिए कभी किसी इंसान का शोषण ना करें. इन पैसों के साथ आया अभिषाप आपकी पूरी संपत्ति को नष्ट कर सकता

 

लालच और अहंकार जैसे अवगुण इंसान की बुद्धि भ्रष्ट कर देते हैं इसे त्याग देने में ही भलाई है।

खुशहाल जिंदगी के लिए आचार्य चाणक्य ने कई नीतियां बताई हैं। अगर आप भी अपनी जिंदगी में सुख और शांति चाहते हैं तो चाणक्य के इन सुविचारों को अपने जीवन में जरूर उतारिए।

आचार्य चाणक्य की नीतियां और विचार भले ही आपको थोड़े कठोर लगे लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। हम लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में इन विचारों को भले ही नजरअंदाज कर दें लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार का विश्लेषण करेंगे। आज का ये विचार इस बाद पर आधआरित है कि वो कौन से अवगुण हैं जो इंसान की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है जैसे पानी से भरे मिट्टी के घड़े को ढलान की दिशा में रखने से वह लुक जाता है।

‘अहंकार, वासना और लालच इंसान की बुद्धि को पूरी तरह भ्रष्ट कर देते हैं’ आचार्य चाणक्य

आचार्य ने कुछ ऐसे गुणों का जिक्र किया है जो व्यक्ति की बुद्धि को पूरी तरह भ्रष्ट कर देते हैं और उसे कुछ दिखाई नहीं देता। ये अवगुण हैं अहंकार, वासना और लालच। एक अहंकारी व्यक्ति को कभी सही और गलत का फर्क नजर नहीं आता क्योंकि उसे लगता है कि वो जो भी करता है सही ही करता है। जो लोग वासना के अधीन हैं, उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता। इसके अलावा लालच में पड़ा व्यक्ति हर जगह पैसे को पाने की तरकीब लगाता है। उसकी नजर दूसरों के पैसों पर टिकी रहती है। उसे अपने काम में अच्छा या बुरा दिखाई नहीं देता।

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आचार्य का कहना था कि अगर जीवन में आगे बढ़ना है तो हमेशा धर्म के मार्ग पर चलें और बुद्धिमान व्यक्ति की तरह अपनी इंद्रियों को वश में रखें। अपने मन को वश में रखें। सीखने की आदत को कभी न छोड़ें। अगर व्यक्ति चाहे तो इंसान से ही क्या, जानवरों से भी काफी कुछ सीखा जा सकता है। जैसे गधे से तीन बातें सीखी जा सकती हैं –अपना बोझ ढोना न छोड़ें, लक्ष्य प्राप्ति के बीच सर्दी-गर्मी की चिंता न करें और हर परिस्थिति में संतुष्ट रहें।

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