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सनातन धर्म के अनुसार समस्त देवी-देवता के गायत्री मंत्रों सिद्धी करके मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं

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सनातन धर्म के अनुसार समस्त देवी-देवता के गायत्री मंत्रों सिद्धी करके मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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वैदिक सनातन धर्म में देवी। देवताओं के गायत्री मंत्र प्रस्तुत हैं। जाप और माला संबंधी कुछ विशेष नियम होते हैं। अतः मंत्र जाप करते समय कुछ विशेष बातों का ज्ञान होना बेहद जरूरी है।

गायत्री मंत्र वेदों का एक महत्त्वपूर्ण मंत्र है जिसकी महत्वता ॐ के बराबर मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र के उच्चारण और इसे समझने से ईश्वर की प्राप्ति होती है। मान्यता के अनुसार गायत्री एक ओर विराट् विश्व और दूसरी ओर मानव जीवन, एक ओर देवतत्व और दूसरी ओर भूततत्त्व, एक ओर मन और दूसरी ओर प्राण, एक ओर ज्ञान और दूसरी ओर कर्म के पारस्परिक संबंधों की पूरी व्याख्या कर देती है।

मंत्र जाप की विधि

 

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मंत्र जाप और माला संबंधी कुछ विशेष नियम होते हैं। अतः मंत्र जाप करते समय कुछ विशेष बातों का ज्ञान होना बेहद जरूरी है। आप जिस स्थान पर मंत्र कर रहे हो, वह स्थान साफ-सुथरा होना चाहिए, जहां आप शुद्ध आसन बिछाकर जाप करें। मंत्र जाप करते समय मंत्र जाप करने वाले के मुद्रा पद्मासन या सुखासन में होनी चाहिए। सर्वप्रथम जिस माला से जप करना चाहते हैं उसे गंगाजल से शुद्ध कर लेना चाहिए। कोशिश करें जाप शुद्ध उच्चारित और सही संख्या में किया जाए, क्योंकि जाप हमेशा एक निश्चित संख्या में ही किया जाता है। जाप करते समय पूर्व दिशा की तरफ अपना मुख रखें। माला से जाप हमेशा दायें हाथ से करें। यह भी ध्यान रखें कि माला पर आपके हाथ के नाखून स्पर्श न करें। मंत्र जाप आप रुद्राक्ष, स्फटिक, हल्दी, चंदन या तुलसी किसी भी माला से कर सकते हैं।

 

1.देवी गायत्री मन्त्र –

 

ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्

 

2. गणेश गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ।।

 

3. ब्रह्मा गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ वेदात्मने विद्महे, हिरण्यगर्भाय धीमहि, तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात् ।।

 

4. ब्रह्मा गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ चतुर्मुखाय विद्महे, कमण्डलु धाराय धीमहि, तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात् ।।

 

5. ब्रह्मा गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ परमेश्वर्याय विद्महे, परतत्वाय धीमहि, तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात् ।।

 

6. विष्णु गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ नारायणाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि, तन्नो विष्णु प्रचोदयात् ।।

 

7. रुद्र गायत्री मन्त्र:- ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्र: प्रचोदयात् ।।

 

8. रुद्र गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ पञ्चवक्त्राय विद्महे, सहस्राक्षाय महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्र प्रचोदयात् ।।

 

9. दक्षिणामूर्ती गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ दक्षिणामूर्तये विद्महे, ध्यानस्थाय धीमहि, तन्नो धीश: प्रचोदयात् ।।

 

10. हयग्रीव गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ वागीश्वराय विद्महे, हयग्रीवाय धीमहि, तन्नो हंस: प्रचोदयात् ।।

 

11. दुर्गा गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ कात्यायन्यै विद्महे, कन्याकुमार्ये च धीमहि, तन्नो दुर्गा प्रचोदयात् ।।

 

12. दुर्गा गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ महाशूलिन्यै विद्महे, महादुर्गायै धीमहि, तन्नो भगवती प्रचोदयात् ।।

 

13. दुर्गा गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ गिरिजाय च विद्महे, शिवप्रियाय च धीमहि, तन्नो दुर्गा प्रचोदयात् ।।

 

14. सरस्वती गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ वाग्देव्यै च विद्महे, कामराजाय धीमहि, तन्नो देवी प्रचोदयात् ।।

 

15. लक्ष्मी गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ महादेव्यै च विद्महे, विष्णुपत्न्यै च धीमहि, तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ।।

 

16. शक्ति गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ सर्वसंमोहिन्यै विद्महे, विश्वजनन्यै धीमहि, तन्नो शक्ति प्रचोदयात् ।।

 

17. अन्नपूर्णा गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ भगवत्यै च विद्महे, महेश्वर्यै च धीमहि, तन्नोन्नपूर्णा प्रचोदयात् ।।

 

18. काली गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ कालिकायै च विद्महे, स्मशानवासिन्यै धीमहि, तन्नो घोरा प्रचोदयात् ।।

 

19. नन्दिकेश्वरा गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ तत्पुरूषाय विद्महे, नन्दिकेश्वराय धीमहि, तन्नो वृषभ: प्रचोदयात् ।।

 

20. गरुड़ गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ तत्पुरूषाय विद्महे, सुवर्णपक्षाय धीमहि, तन्नो गरुड: प्रचोदयात् ।।

 

21. हनुमान गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ आञ्जनेयाय विद्महे, वायुपुत्राय धीमहि, तन्नो हनुमान् प्रचोदयात् ।।

 

22. हनुमान गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ वायुपुत्राय विद्महे, रामदूताय धीमहि, तन्नो हनुमत् प्रचोदयात् ।।

 

23. शण्मुख गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महासेनाय धीमहि, तन्नो शण्मुख प्रचोदयात् ।।

 

24. ऐयप्पन गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ भूतादिपाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो शास्ता प्रचोदयात् ।।

 

25. धनवन्त्री गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ अमुद हस्ताय विद्महे, आरोग्य अनुग्रहाय धीमहि, तन्नो धनवन्त्री प्रचोदयात्।।

 

26. कृष्ण गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि, तन्नो कृष्ण प्रचोदयात् ।।

 

27. राधा गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ वृषभानुजाय विद्महे, कृष्णप्रियाय धीमहि, तन्नो राधा प्रचोदयात् ।।

 

28. राम गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ दशरताय विद्महे, सीता वल्लभाय धीमहि, तन्नो रामा: प्रचोदयात् ।।

 

29. सीता गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ जनकनन्दिंयै विद्महे, भूमिजयै धीमहि, तन्नो सीता प्रचोदयात् ।।

 

30. तुलसी गायत्री मन्त्र:-

 

ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् !

 

31. सूर्य गायत्री

 

ॐ आदित्याय विद्महे मार्तण्डाय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात् ।।

 

32. अन्नपूर्णा गायत्री

 

ॐ भगवत्यै च विद्महे, महेश्वर्यै च धीमहि, तन्नो पूर्णा प्रचोदयात् ।।

 

33. अग्नि गायत्री

 

ॐ महा ज्वालाया विधमहे, अग्नि देवाय धीमहि, तन्नो अग्नि प्रचोदयात् ।। ओं विश्वनाराय विधमहे, लालीलाय धीमहि, तन्नो अग्नि प्रचोदयात् ।।

 

34. गरुड़ गायत्री

 

ॐ तत्पुरुषाय विधमहे, सुवर्णा पक्षाया धीमहे, तन्नो गरूडा प्रचोदयात् ।।

 

35. कुबेर गायत्री

 

ॐ यक्षा राजाया विद्महे, वैशरावनाया धीमहि, तन्नो कुबेराह प्रचोदयात् ।।

 

36. कामदेव गायत्री

 

ॐ कामदेवाया विद्महे, पुष्पा बनाया धीमहि, तन्नो अनंगहा प्रचोदयात् ।।

 

37. शक्ति गायत्री

 

ॐ सर्वसंमोहिन्यै विद्महे, विश्वजनन्यै धीमहि, तन्नो शक्ति प्रचोदयात् ।।

 

38. नन्दिकेश्वरा गायत्री

 

ॐ तत्पुरूषाय विद्महे, नन्दिकेश्वराय धीमहि, तन्नो वृषभ: प्रचोदयात् ।।

 

39. धनवन्त्री गायत्री

 

ॐ अमुद हस्ताय विद्महे, आरोग्य अनुग्रहाय धीमहि, तन्नो धनवन्त्री प्रचोदयात्।।

 

 

 

रोगों से मुक्ति के लिए विभिन्न गायत्री मंत्रों का जप कर सकते है।

 

पंचतत्व नवग्रह गायत्री मंत्र:

 

!!राहु गायत्री !!

 

“ऊँ शिरोरूपाय विद्महे अमृतेशाय धीमहि; तन्नः राहुः प्रचोदयात् !!

 

बीमारियाँ: पिशाच बाधा; कुष्ठरोग; एलर्जी; गैस; नासूर; कृमि ; सन्निपात; कालरा,बृण, इस गायत्री के पढ़ने से सारे रोग दूर होते हैं !

 

!! केतु गायत्री!!

 

ऊँ गदाहस्ताय विद्ममहे अमृतेशाय धीमहि, तन्नः केतुः प्रचोदयात् !!

 

बीमारियाँ: त्वचा की बीमारी, कोढ़, भगंदर, विषवाधा, चेचक, गुर्दे की बीमारी. ल्यूकोडर्मा, इस गायत्री के पढ़ने से ये बीमारियाँ दूर होती हैं!

 

!! शनि गायत्री!!

 

ऊँ सूर्यपुत्राय विद्महे मृत्युरुपाय धीमहि, तन्नः सौरिः प्रचोदयात् !!

 

बीमारियाँ: घुटने पैरो मे पीड़ा , वेवक्त बुढापा ,हड्डी की टीवी , पायरिया, इस गायत्री के पढ़ने से ये सभी रोग दूर होते हैं !

 

2. जल तत्व:

 

!!चन्द्र गायत्री!!

 

ऊँ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृततत्वाय धीमहि, तन्नश्चन्द्रः प्रचोदयात् !!

 

बीमारियाँ: खाँसी , कफ, ट्यूमर , दमा, शराब की लत, आँखो की बीमारी , लकवा , चक्कर , हाईड्रोशील , मन्दबुद्यि, सर्दी ,जुकाम , भारीपन , शीतज्वर, इस गायत्री के पढ़ने से ये सभी रोग दूर होते हैं !

 

!!शुक्र गायत्री !!

 

ऊँ भृगुसुताय विद्महे दिव्यदेहाय धीमहि, तन्नः शुक्रः प्रचोदयात् !!

 

बीमारियाँ: कमर के रोग , वातरोग , अण्डकोश में सूजन , पीड़ा, मूत्रावरोग , वीर्य सम्बन्धी रोग ,!!

 

इस गायत्री के पढ़ने से ये सभी रोग दूर होते हैं !!

 

3. अग्नि तत्व:

 

!!भौम गायत्री !!

 

ऊँ अंगारकाय विद्ममहे शक्तिहस्ताय धीमहि, तन्नो भौमः प्रचोदयात् !!

 

बीमारियाँ: पेशाब, गुर्दा सम्बन्धी रोग, पोलियो, अल्सर , हार्निया, बवासीर, इस गायत्री के पढ़ने से ये रोग दूर होते हैं!

 

!!सूर्य गायत्री!!

 

ऊँ भास्कराय विद्ममहे महातेजाय धीमहि, तन्नः सूर्यः प्रचोदयात् !!

 

बीमारियाँ: दिल की बीमारीं, रीड़ की हड्डी, गर्मी की बीमारीं, नेत्र रोग, शरीर मे जलन, सिर पीड़ा, पित्त सम्बन्धी बीमारीं, ब्लडप्रेशर, इस गायत्री के पढ़ने से ये रोग दूर होते हैं !!

 

4. पृथ्वी तत्व:

 

!!बुध गायत्री!!

 

ऊँ सौम्यरुपाय विद्ममहे बाणेशाय धीमहि, तन्नो बुधः प्रचोदयात्,!!

 

बीमारियाँ: मानसिक दुर्बलता, नींद न आना, उत्तेजना, चिंता,स्मरण शक्ति की कमी, इस गायत्री के पढ़ने से ये रोग दूर होते हैं!!

 

5. आकाश तत्व:

 

!!गुरू गायत्री!!

 

ऊँ आंडि्गरसाय विद्ममहे दण्डायुधाय धीमहि, तन्नो जीवः प्रचोदयात्!!

 

बीमारियाँ: मांसपेशियो मे अकड़न, हाँथो मे कम्पन, दाहिनी ओर के अंग सुन्न हो जाना, स्नायु पीड़ा, सूजन, पीलिया, लीवर, कैंसर, फेफड़े की सूजन, चिलकन जैसा दर्द, जलोदर, लिखते-२ हॉंथ अकड़ जाना, पथरी,

 

इस गायत्री के पढ़ने से ये रोग दूर होते हैं!!

 

!!संजीवनी महामृत्युंजय!!

 

ऊँ तत्सवितुर्वरेण्यं त्रयंम्बकंयजामहे भर्गोदेवस्य धीमहि सुगन्धिम्पुष्टिवर्धनम् धियो यो नः प्रचोदयात् ऊर्वारूकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् !! !!

 

इन गायत्री के पढ़ने से सभी लोग र्दीर्घ आयु होती हैं!! !!

 

!! विष्णु गायत्री!!

ऊँ नारायणाय विद्ममहे वासुदेवाय धीमहि, तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्

सहर्ष सूचनार्थ नोट्स:-

इस लेख में दी गई जानकारी वैदिक सनातन धर्म ग्रन्थों और सूचना के विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ धार्मिक मान्यताओं/ धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ धार्मिक सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे अपनी आस्था और निष्ठा के अनुसार मनोरथ प्राप्त कर सकते हैं।

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