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दान पुण्य पारलौकिक कार्य या सस्ति लोकप्रियता पाने का मार्ग

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दान पुण्य पारलौकिक कार्य या सस्ति लोकप्रियता पाने का मार्ग

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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बृंदावन। दान पुण्यकर्म करना पारलौकिक है या समाज मे सस्ति लोकप्रियता पाने के उद्देश्य से सिर्फ इसे ढकोसला ही कहा जाएगा.विश्वविख्यात हित संत श्री प्रेमानंन्द जी महाराज ने कहा है कि अगर दान पुण्यकर्म करना ही है तो किसी को भी जाहिर किए बिना गुप्तदान करना चाहिए.

अगर किसी परंपरा का निर्वाह करने हेतु दान दिया जा रहा हो तो ढकोसला है किंतु किसी जरूरतमंद के प्रति सहानुभूतिपूर्वक की गई सहायता को पुण्य की श्रेणी में रखा जा सकता है.

श्री प्रेमानंन्द महाराज के अनुसार दान और पुण्य करने पर क्या लाभ होता है? पुण्य करने पर भगवान हमें क्या देते हैं?

सभी प्रश्न लाभ हानि से जुड़े ही होते है, पूजा से कितना लाभ मिलेगा, कब मिलेगा आदि। वैसे पहले इनसे चर्चा की थी, आज दुबारा करते है।

लाभ जरूर मिलेगा आपको आपके दान- पुण्यों का, लेकिन साथ ही साथ पाप भी तो देखे जाएंगे ही। आप स्वयं की एक बनाओ, एक तरफ में दान पुण्य, दूसरी तरफ में पाप। फिर देखो क्या ज्यादा है, किसका फल मिल रहा है।

अब सब कहेंगे कि हमने कोई पाप तो किया ही नहीं, और किया भी हो अनजाने में तो याद नहीं। हाँ, पुण्य सब याद है हमे, हम पुण्यात्मा जो है। किसी भूखे को कब खाना खिलाया, क्योंकि वह खाना नहीं था साहब, तभी ऊपर वाले से कह दिया था, याद रखना इस दान को बाद में हिसाब लूंगा इसका। किसकी मदद की, और उसका भी हिसाब रखा। तब हम समझदार् थे। लेकिन जब पाप किये तब हम मासूम थे, वो याद नहीं है। यह भी लोग कहते है, की ईश्वर महान है तो हम मासूमों के अनजाने में किये पाप क्षमा क्यों नहीं करता। मतलब भूल क्यों नहीं जाता ईश्वर। ईश्वर भूल गए आपके पाप, लेकिन यदि पुण्य भी भूल गए तो? तो हम कहेंगे पूजा का क्या लाभ, ईश्वर की कृपा दृष्टि ही प्राप्त नहीं हो रही है. इसलिए इस लाभ हानि से ऊपर उठिये। आपकी परेशानी ही आपका स्वभाव है, जो सब चीज़ो का मोल लगाता है, और जब उसी तराजू पर आपका मोल किया जाता है, तो आप परेशान हो उठते है। कभी कुछ निस्वार्थ कीजिये ज़िन्दगी में, लाभ अपने आप मिल जाएगा।

दान करते हैं तो जान लें नियम, प्रेमानंद महाराज ने कहा ऐसे लोगों को कभी पुण्य नहीं मिलता है.

सारे धर्मों में दान का काफी खास महत्व बताया गया है। हिंदू धर्म के अनुसार दान करने से पुण्य मिलता है। लेकिन कुछ लोगों को दान का पुण्य कभी नहीं मिलता है।

हिंदू धर्म में दान करना एक पुण्य कार्य माना गया है। दान करने से मन को शांति मिलती है, आत्मा सम्मान बढ़ता है। लेकिन दान के कुछ नियम हैं। प्रेमानंद महाराज के अनुसार कुछ लोग कितना भी दान कर लें लेकिन उन्हें पुण्य नहीं मिलता है। घर से बाहर जाते समय लड्डू गोपाल की मूर्ति को लेकर ध्यान में रखें ये बातें, प्रेमानंद महाराज ने बताया है.

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