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2008 में सोनिया गांधी ने वापस लिए थे जवाहरलाल नेहरू से जुड़े लेटर

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2008 में सोनिया गांधी ने वापस लिए थे जवाहरलाल नेहरू से जुड़े लेटर

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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नई दिल्ली। इस साल गत 15 जनवरी को पीएमएमएल सोसायटी और कार्यकारी परिषद का पुनर्गठन किया गया और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा को संगठन के अध्यक्ष के रूप में एक और पांच साल का कार्यकाल सौंपा गया है.

पीएम मोदी ने की मीटिंग की अध्यक्षता। (इमेज-एएनआई)

पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सोमवार को प्राइम मिनिस्टर म्यूजियम एंड लाइब्रेरी सोसायटी की आम बैठक में सदस्यों के बीत इस पर सहमति बनी कि कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की तरफ से जवाहरलाल नेहरू के कागजात छीन लेने के मामले को कानूनी तौर पर आगे बढ़ाया जाएगा। पीएम पीएमएमएल सोसायटी के अध्यक्ष हैं। उनके अलावा केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, निर्मला सीतारमण, धर्मेंद्र प्रधान, अश्विनी वैष्णव, अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा और बीजेपी नेता स्मृति ईरानी, पीएमएमएल के नए डायरेक्टर अश्विनी लोहानी सहित सदस्य शामिल हुए।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सोनिया गांधी ने 2008 में जवाहर लाल नेहरू के पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू से जुड़े दस्तावेज वापस मंगा लिए थे। इस पर आखिरी एजीएम में इस पर विस्तार से चर्चा की गई थी। यह मुद्दा एक बार फिर से सोमवार को मीटिंग में लाया गया। सूत्रों ने इंडियन एक्प्रेस को बताया कि इस बात पर सहमति बनी है कि प्रथम प्रधानमंत्री से संबंधित कागजात एक राष्ट्रीय खजाना हैं और उनकी विरासत को संरक्षित करने के लिए उन्हें संग्रहालय को वापस सौंप दिया जाना चाहिए।

पिछली मीटिंग में कानूनी राय लेने का फैसला किया था

पिछले साल जब एजीएम में यह मामला उठा था तो सदस्यों ने दान में दिए गए कागजात वापस लेने के बारे में कानूनी राय लेने का फैसला किया था। नतीजतन, कानूनी राय के मद्देनजर पहली बार इस साल की शुरुआत में पीएमएमएल प्रशासन द्वारा सोनिया गांधी के ऑफिस को एक पत्र भेजा गया था। इसमें विद्वानों और इतिहासकारों के लिए कागजात वापस मांगे गए थे।

सोनिया गांधी के ऑफिस से नहीं मिला कोई जवाब

यह पहली बार था कि म्यूजियम प्रशासन ने गांधी परिवार को आधिकारिक तौर पर सूचित किया कि सोनिया गांधी ने नेहरू संग्रह से कुछ कागजात अपने साथ ले लिए हैं, जिन्हें उन्होंने दशकों पहले म्यूजियम को दान कर दिया था। सूत्रों ने बताया कि गांधी के ऑफिस से कोई जवाब नहीं मिला है। इस संबंध में सूत्रों ने बताया कि इस बात पर चर्चा हुई कि मामले को कानूनी रूप से आगे बढ़ाया जाए, क्योंकि एक बार दान या उपहार में दिए गए कागजात वापस नहीं लिए जा सकते, इसलिए वे संगठन की संपत्ति बने रहेंगे और उन्हें वापस संगठन को सौंप दिया जाना चाहिए।

एक सूत्र ने बताया कि एजीएम में यह भी कहा गया कि मामला 2008 का है और संगठन अब इस मामले में आगे कानूनी राय लेकर 2014 से पहले के प्रशासनिक दोषों को दूर करने की कोशिश कर रहा है और यह भी देखना चाहता है कि इसे आगे कैसे बढ़ाया जा सकता है। 13 फरवरी 2024 को राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मीटिंग हुई और इसमें सीतारमण और धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल हुए।

सभी कागजातों को वापस लाया जाना चाहिए – सदस्य

सदस्यों के बीच एक राय थी कि उन पत्रों को वापस लाया जाना चाहिए। ये कागजात 1971 में इंदिरा गांधी द्वारा और बाद में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी द्वारा संगठन को दान किए गए थे। पिछली वार्षिक आम बैठक में हुई चर्चा के बाद 47वीं वार्षिक आम बैठक में इस मामले पर चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक कानूनी राय से संकेत मिलता है कि कागजात का स्वामित्व संग्रहालय के पास है। हालांकि, कागजात वापस करने के बाद मामले को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

के कद बढ़ने से लोकतंत्र को खतरा’ सवाल का प्रधानमंत्री ने दिया जवाब!

इस साल 15 जनवरी को पीएमएमएल सोसायटी और कार्यकारी परिषद का पुनर्गठन किया गया और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा को संगठन के अध्यक्ष के रूप में एक और पांच साल का कार्यकाल मिला। सोसायटी में कई नए सदस्य शामिल हुए जिनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, ​​नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, फिल्म निर्माता शेखर कपूर और संस्कार भारती के वासुदेव कामथ शामिल हैं। नेहरू की उन चिट्ठियों में ऐसा क्या है जिसे सोनिया गांधी परिवार वापस नहीं कर रहा है.

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