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फैरिंजाइटिस (गले में दर्द) क्या है, इसके लक्षण और उपचार

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फैरिंजाइटिस (गले में दर्द) क्या है, इसके लक्षण और उपचार

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:

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9822550220

 

फैरींजाइटिस गले के पिछले हिस्से फैरिंक्स (ग्रसनी) की सूजन को कहते हैं। यह सूजन वायरस, बैक्टीरिया या एलर्जिक कैप्सूल से होता है। अगर संक्रमण कुछ दिनों में ठीक हो जाए, तो उसे एक्यूट फैरंजाइटिस कहते हैं। जबकि लक्षण कई सप्ताह या बार-बार दांत रहते हैं, तो यह क्रॉनिक फैरंजाइटिस (क्रोनिक ग्रसनीशोथ) होता है। आम तौर पर यह कोल्ड-जुकम, प्रदूषण या प्रोटॉन संक्रमण (जैसे स्ट्रेप्टोकास पायोजेनेस) होता है। बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली (कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली) वाले लोगों में यह जल्दी खत्म हो जाता है।

फैरिंजाइटिस के लक्षण

गले में दर्द और खराश:

दर्द या जलन, असहिष्णु ठोस भोजन या गर्म/ठंडी चीजें खाने में शामिल करें। गला सूखा और खुरदरा महसूस होना। कभी-कभी गले में खराश ( गले में खराश ) इतनी मोटी होती है कि बोलने में भी परेशानी होती है।

आवाज में भारीपन या बैठना: (Awaaz Mein BhariPan Ya Baithna in Hindi)

वोकल कॉर्ड में सूजन या जलन के कारण आवाज में रुकावट, कर्कश या फीकी होती है। लगातार खांसी या गले में संक्रमण की वजह से लंबी अवधि तक आवाज में बदलाव होता है। बच्चों या पेशेवर गायकों की आवाज का जल्दी थकना आम है।

बुखार और थकान: (बुखार और थकन हिंदी में)

प्रभाव से तेज बुखार, शरीर में दर्द, और थकान महसूस होना। संक्रमण के कारण शरीर की सीलन क्षमता सक्रिय हो जाती है, जिससे सामान्य निर्बलता और सुस्ती बनी रहती है। कभी-कभी सिरदर्द और सिरदर्द भी साथ में हो जाता है।

खांसी या गले में कफ जमना: (Khansi ya gale mein kaf jamna hona in hindi)

पोस्ट-नाजल ड्रिप के कारण गले में म्यूकस (कफ) जमा हो जाता है। गले में जलन और बार-बार गले को साफ करना जरूरी महसूस होना। रात में खांसी बढ़ सकती है, जिससे नींद प्रभावित होती है।

गले में सूजन या लालिमा: (Gale mein soojan ya laalima in Hindi)

डॉक्टर की जांच में गले की पोशाकें लाल और सूजी हुई दिख रही हैं। टॉन्सिल (टॉन्सिल) बढ़े हुए या सफेद/पीले दागदार होते हैं। कभी-कभी मठाधीशों में से एक ( गांठ) सुजते हैं।

निगलने में कथिनै: (Nigalne mein kathinai in Hindi)

निगलने में कठिनाई: (Nigalne mein kathinai in Hindi)

भोजन या पानी की आवश्यकता समय पर दर्द या जलन महसूस होना। ठोस खाद्य पदार्थ बनाना कठिन हो सकता है। गंभीर मामलों में चर्चा में भी परेशानी होती है। लंबे समय तक वजन में कमी और खाने की चाहत कम होना आम बात है।

क्रोनिक ग्रसनीशोथ

फैरिन्जाइटिस के कारण (Causes of Pharyngitis)

वायरल संक्रमण:

लगभग 70–80% गले की सूजन के मामले वायरस के कारण होते हैं। आम वायरस में रैनोवायरस , इन्फ्लुएंजा, एडेनोवायरस और कोरोनावायरस शामिल होते हैं। वायरल संक्रमण में अक्सर हल्का बुखार, खांसी, नाक बहना, गले में खराश जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह आमतौर पर स्वयं ही ठीक हो जाता है, लेकिन पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेने की सलाह होती है

जीवाणु संक्रमण (जीवाणु संक्रमण):

प्रमुख कारण स्टेप्टोकॉक ब्रांड है। बिना समय पर इलाज के यह टॉन्सिलिटिस , रुधिर बुखार या किडनी की समस्या भी पैदा हो जाती है। मज़हब में हल्का बुखार, गले में बहुत दर्द, सफ़ेद या पीला चित्तीदार, और मशहुर में पतला की सूजन शामिल है। डॉक्टर द्वारा एंटीबायोटिक्स की आवश्यकता होती है।

एलर्जी या प्रदूषण:

धूल, एलर्जी, परागकण, रासायनिक धुएँ और अन्य एलर्जी गले की एलर्जी को सूजाते और जलन पैदा करते हैं। इससे अक्सर खराश, कफ, बार-बार गले को साफ करने की इच्छा होती है। एलर्जी के कारण होने वाले गले के संक्रमण में सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण हमेशा दिखाई नहीं देते

धूम्रपान और शराब का सेवन:

बिजनेस, सीताफल और गले की लाइनिंग को लगातार दबाव और नुकसान पहुंचाते हैं। इससे गले में क्रॉनिक फैरिजिटिस, खांसी, आवाज में बदलाव और जलन जैसी समस्या होती है। लंबे समय तक इसके सेवन से गले के कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है।

सूखी हवा या मुँह से सांस लेनाः

ओरल या एयरकंडीशंड रूम में हवा बहुत ज़रूरी है। शुष्क हवा गले की स्लाइम मेम्ब्रेन सूख जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। मुंह से लगातार सांस लेने पर गला और स्वर रज्जुओं पर अधिक दबाव और जलन होती है।

कमजोर मानव प्रणाली:

थकान, तनाव, नींद की कमी और पोषण की कमी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटाती है। कमजोर मानव प्रणाली के कारण साधारण वायरल या संक्रमण भी जल्दी फैलता है। जीवनशैली सुधार, पर्याप्त नींद और पौष्टिक आहार से मजबूती की जाती है

फैरिन्जाइटिस की जांच (फैरिन्जाइटिस का निदान)

क्लिनिक जांच:

ई एनईटी डॉक्टर गले, टॉन्सिल, यूवुला और गले की दीवारों का निरीक्षण करते हैं। गले में लालिमा, सूजन, म्यूकस या सफ़ेद/पीले धब्बों की स्थिति दिखाई देती है। ग्रसनीशोथ उपचार अस्पताल नोएडा में उपलब्ध है। डॉक्टर के गले की मिठास और दर्द की तकलीफ़ को भी महसूस करके मूल्यांकन का आकलन किया जाता है। कभी-कभी गले और गर्दन के प्रतिशत की सूजन की जांच भी की जाती है।

थ्रोट स्वैब टेस्ट:

गले से स्वैब लेकर लैब में जांच की जाती है। यह पता चलता है कि संक्रमण वायरल या इंटरैक्टिव है। रोगाणुरोधी एंटीबायोटिक निर्धारित किया जा सकता है। स्टेप्टोकोकस जैसे टेस्ट में ग्राहक की पहचान बताई जाती है।

रक्त परीक्षण (ब्लड टेस्ट):

गंभीर, लगातार या लंबे समय तक रहने वाले संक्रमण में किया जाता है। सीबीसी (पूर्ण रक्त गणना) से शरीर में संक्रमण और सफेद रक्त कोशिका की संख्या (श्वेत रक्त कोशिका गिनती) का पता चलता है। ईएसआर (एरिथ्रोसाइटट्रेंडन दर) या सीएपी से शरीर में सूजन का स्तर बिगड़ जाता है। यह जांच प्रयोगशाला टैब आवश्यक है जब डॉक्टर को सिस्टमिक संक्रमण या लक्षण का खतरा लगे।

एलर्जी टेस्ट (एलर्जी टेस्ट):

बार-बार गले में जलन, खांसी या म्यूकस जमा होने पर किया जाता है। कूड़ा-कचरा, प्रदूषण, धुआँ या रासायनिक पदार्थ के कारण एलर्जी की संभावना की पुष्टि होती है। त्वचा या रक्त परीक्षण द्वारा एलर्जन की पहचान की जाती है। एलर्जी का पता लगाने के लिए उपचार और बचाव के उपाय बताए गए हैं।

फैरंजिटिस का इलाज (ईएनटी दिशानिर्देशों के अनुसार उपचार)

दवाइयां: वायरल फैरिंज

: आमतौर पर आराम, पर्याप्त हाइड्रोजनीकरण और भाप लेने से 5-7 दिनों में ठीक हो है। घर पर गर्म तरल पदार्थ, सूप, शहद और हर्बल चाय मदद करते हैं

एडल्ट फ़ैन्जाइटिस:

डॉक्टर एंटीबायोटिक्स (जैसे एमोक्सिसिलिन, एजिथ्रोमाइसिन) निर्धारित करते हैं। पूर्ण पाठ्यक्रम लेना आवश्यक है ताकि संक्रमण पूरी तरह से समाप्त हो जाए और लक्षण न हों।

दर्द और बुखार:

पैरासिटामोल या आइबुप्रोफेन से गले का दर्द और बुखार कम होता है। दर्द कम होने से भोजन को सुविधाजनक बनाने में आसानी होती है।

गरारे और मसाले:

गर्म नमक वाले पानी से दिन में 2-3 बार गरारे करने से गले की सूजन और जलन कम होती है। ठंड लगने से गले का सूखापन, जलन और म्यूकस जाम होना कम हो जाता है। बच्चों के लिए स्टीम या स्टीम इनहेलेशन सुरक्षित तरीका है।

सेरीन गार्गल/स्पाइर:

सेरीन गार्गल गले को नम करता है और संक्रमण के अंशों को साफ करता है। एंटीसेप्टिक या माइल्ड माउथस्प्रे भी सस्ते राहत देते हैं। दिन में 2-4 बार उपयोग करना लाभदायक होता है।

एलर्जी प्रतिरोधी:

यदि फैरिंजाइटिस एलर्जी का कारण है तो एंटीहिस्टामिन या एंटीएलर्जिक दवाएं उपयोगी हैं। एलर्जी से होने वाली समस्या, खांसी और म्यूकस जमा होने से कम करने में मदद मिलती है। घर में गंदगी और गंदगी दूर करने के उपाय भी जरूरी हैं।

क्रोनिक मामलों में लंबे समय तक संक्रमण या बार-बार होना ईएनटी डॉक्टर एंडोस्कोपिक जांच ( एंडोस्कोपी जांच ) करते हैं। इसके रासायनिक यौगिक जैसे टॉन्सिल हाइपरट्रॉफी, रिफ्लैक्स या पोलिप्स की पहचान होती है। कभी-कभी सर्जिकल उपचार (जैसे टॉन्सिलेक्टॉमी) की सलाह दी जाती है।

फैरंजाइटिस से बचाव के उपाय (रोकथाम और घरेलू देखभाल)

कूड़ा-कचरा, जहर और जहरीले हवा से बचाव:

कूड़ा-कचरा, जहर, प्रदूषण और रासायनिक कूड़ा-करकट गले के मलबे को जलाना और सूजन देते हैं। घर में हवा फिल्टर या एयर प्यूरीफायर का उपयोग होता है। समुद्री या समुद्री हवा में सर्विंग स्कार्फ या मफलर से गले को ढकें।

भीड़-भाड़ वाले स्थानों में मास्क-समुद्र:

भीड़-भाड़ वाले स्थानों में मास्क-समुद्र से प्रचलित और धार्मिक संक्रमण से बचाव होता है। परिवहन, अस्पताल या बाज़ार में उपयोग किए जाने वाले मास्क।

स्मोक और स्मोक से दूरी:

स्मोक और स्मोक स्मोक से लाइनिंग को नुकसान पहुंचता है। जोसेफ हैंड स्मोक (पास-पड़ोसी या ऑफिस में धूम्रपान) भी गले में जलन और खांसी की शिकायत है।

कोल्ड ड्रिंक, बर्फ़ीली चीज़ें और पौष्टिक-भुने खाद्य पदार्थों से भराई करें: कोल्ड ड्रिंक, बर्फ़ली की चीज़ें और पौष्टिक-भुने खाद्य पदार्थों का सेवन करें

। खाद्य-भुने और भारी खाद्य पदार्थ गले में जलन और भारीपन पैदा होते हैं।

नींद पूरी लेना और तनाव कम करना:

पर्याप्त नींद और आराम से शरीर की बीमारी को बनाए रखने की क्षमता मजबूत रहती है। तनाव और थकान इम्मा सिस्टम फेल होते हैं, जिससे इंक्वायरी जल्दी खत्म हो जाती है। नियमित योग, चिकित्सा उद्योग और वित्तीय विशेषज्ञ समुदाय वृद्धि में सहायक हैं।

अन्य सावधानियाँ:

हाथों को नियमित रूप से प्रतिस्थापित, विशेष रूप से भोजन से पहले। निजी सामान जैसे प्लास्टिक, कॉपरेटिव, और पॉज़िटिव शेयरिंग न करें। गले में जलन या खराश शुरू हो जाती है, बहुत अधिक मोटापा या चिल्लाने से हिचकिचाहट होती है।

फैरिंजिटिस साधारण सर्दी-जुकाम से शुरू होकर गंभीर गले के संक्रमण में बदलता है। गले में लगातार दर्द, खराश या निगलने में कठिनाई को अनदेखा न करें। ईनीत विशेषज्ञ से परामर्श लेकर समय पर इलाज करें। सही दवा, आराम और घरेलू देखभाल से यह समस्या पूरी तरह ठीक होती है। इलाज में देरी लापरवाही साबित हो सकती है

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बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: फैरंजाइटिस क्या है आप ठीक है?

उत्तर : वायरल मामलों में 5-7 दिन में आराम मिलता है। लेकिन एंटीबायोटिक संक्रमण में एंटीबायोटिक जरूरी है।

प्रश्न 2: फैरिंजाइटिस और टॉन्सिलाइटिस का क्या मतलब है?

उत्तर : फैरंजाइटिस गले के पिछले हिस्से में सूजन होती है। जबकि टॉन्सिलिटिस टॉन्सिल का संक्रमण होता है।

प्रश्न 3: फैरंजाइटिस बार-बार क्या हो सकता है?

उत्तर : हाँ, एलर्जिक, धूल या फ़्लोरिडा इम्युनिटी इस फ़्रेम पर हो सकती है। इसलिए इलाज जरूरी है।

प्रश्न 4: क्या बच्चों में फैरिंजाइटिस गंभीर होता है?

उत्तर : बच्चों में यह सामान्य है। लेकिन लगातार बुखार या दर्द होने पर तुरंत ई नेशनल डॉक्टर को दिखाना चाहिए। इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।

प्रश्न 5: फैरिंजाइटिस से बचाव क्या आरामदायक है?

उत्तर : हां, गुणगुणे नमक वाले पानी से गरारे करने से गले की सूजन और दर्द में तुरंत राहत मिलती है। इसलिए गर्म पानी का सेवन करना चाहिए।

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