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नदियों से अवैध रेत उत्खनन से सरकार को करोडों की चपत

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नदियों से अवैध रेत उत्खनन से सरकार को करोडों की चपत

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:

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9822550220

 

भंडारा।भंडारा-गोंदिया जिला सहित विदर्भ में अवैध रेत उत्खनन का कारोबार के ज़रिए राज्य सरकार से करोड़ों रुपये का रेवेन्यू हड़पने के शक में एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने शुक्रवार को रेत माफिया के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन शुरू किया। इस ऑपरेशन के तहत सुबह 8 बजे तुमसर तालुका में एक बड़े बिजनेसमैन के घर और दुकान पर रेड की गई। खबर लिखे जाने तक 10 घंटे से ज़्यादा समय से जांच चल रही थी, और इस ऑपरेशन से जिले के रेवेन्यू और पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन में काफी हलचल मची हुई है।

जांच एजेंसियों की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, रेत माफिया ने नकली रॉयल्टी और बोगस ई-टीपी बनाकर सरकार को बड़े पैमाने पर चूना लगाने की साज़िश रची है। यह साफ हो गया है कि इस प्लान किए गए स्कैम के तार नागपुर जिले समेत पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश तक फैले हुए हैं। तुमसर तालुका में ऑपरेशन के दौरान एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की टीम ने दो पोकलैंड मशीनें सील कीं और संदिग्ध फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन से जुड़े ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स ज़ब्त किए। संबंधित बिजनेसमैन की चल-अचल संपत्ति, उसके बेड़े में महंगी लग्जरी गाड़ियों के डॉक्यूमेंट्स और बैंक अकाउंट्स की पूरी तरह से जांच की जा रही है।

इस बात की बहुत संभावना है कि सिर्फ बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि प्रशासन के कुछ बड़े अधिकारी भी अवैध रेत खनन और काली कमाई के इस चेन में शामिल हैं। 2020 में फर्जी रॉयल्टी केस और बिना रॉयल्टी के रेत बेचने की कई शिकायतें पेंडिंग थीं। इन शिकायतों के आधार पर, फाइनेंशियल गड़बड़ियों की पूरी जांच के लिए यह केस एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट को सौंप दिया गया था। डिजिटल सबूत और बैंक अकाउंट्स में संदिग्ध ट्रांजैक्शन के कारण, आगे की जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आने की संभावना है।

मध्य प्रदेश महाराष्ट्र सीमा से लगे रेत घाटों पर दबदबा रखने वाले इस बिजनेसमैन के खिलाफ हुई इस कार्रवाई से जिले के दूसरे रेत माफियाओं के दिल दहल गए हैं। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की टीम जांच कर रही है कि गैर-कानूनी माइनिंग से कमाए गए पैसे को कहां इन्वेस्ट किया गया और इस ट्रांजैक्शन में किन अधिकारियों ने बीच-बचाव किया। यह कार्रवाई सिर्फ एक बिजनेसमैन तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले दिनों में जिले में रेत नीलामी प्रोसेस में शामिल कई प्रभावशाली लोग और अधिकारी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

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