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मठ-मंदिरों की जमीन पर भू-माफिया की माफिया की पैनी नजर

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मठ-मंदिरों की जमीन पर भू-माफिया की माफिया की पैनी नजर

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:

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9822550220

 

पूर्णिया। अनुमंडल क्षेत्र में कई ऐसे मठ मंदिर हैं,जिनकी जमीन व परिसंपत्तियों पर माफिया तत्व काबिज हैं तथा निजी हित में जोत आबाद कर रहे हैं।

मठ-मंदिरों की जमीन पर माफिया की नजर

पूर्णिया। अनुमंडल क्षेत्र में कई ऐसे मठ मंदिर हैं,जिनकी जमीन व परिसंपत्तियों पर माफिया तत्व काबिज हैं तथा निजी हित में जोत आबाद कर रहे हैं। इनमें से कई मठ ऐसे भी हैं जहां महंथ या पुजारी केवल नाम के हैं और वे इन माफिया तत्वों के हाथ की कठपुतली बने हुए हैं।रामनगर फरसाही के महाराजजी स्थित श्री राम जानकी ट्रस्ट का मामला अभी भी बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड, पटना में लंबित है। इसी प्रकार चांदपुर भंगहा के धीमा टोला में श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी की अधिकांश जमीनों पर स्थानीय कुछ लोगों ने जबरन कब्जा कर रखा है। यह मामला थाना से लेकर अनुमंडल कार्यालय तक पहुंच चुका है। दिगर बात है कि अभी तक इसमें प्रशासन ने कोई पहल नहीं किया है। इस मंदिर के पुजारी भोपाल दास ने ठाकुरबाड़ी की साढे तीन बीघा जमीन को वर्षों से हड़पकर उनपर खेती बाड़ी करने, पुजारी को जान मारने तथा उसे वहां से भगाने की साजिश रचने सहित कई अन्य आरोप लगाते हुए थाना में आवेदन भी दिया है। इसी प्रकार लादूगढ में श्री राम जानकी ट्रस्ट के अधीन पूर्व में सैकड़ों एकड़ जमीन थी जो अब दो अंकों में सिमटकर रह गई है। यहां के ग्रामीण बताते हैं कि इस ठाकुरबाडी को तेरह सौ तिरानबे बीघा तेरह कट्ठा तेरह धुर जमीन दान में मिली थी। बनमनखी के अनुमंडल पदाधिकारी मनोज कुमार कहते हैं कि इस संबंध में अंचलाधिकारी को अनुमंडल क्षेत्र के सभी मठ मंदिरों की जमीन व परिसम्पत्तियों का आकलन करने तथा उसका ब्यौरा इकट्ठा करने का निर्देश दिया गया है। यदि कोई ट्रस्टी के द्वारा इस मामले की शिकायत की जाती है तो विधि-सम्मत कार्रवाई की जाएगी और ट्रस्ट या फिर मठ व मंदिर की जमीन को जबरन जोत आबाद करनेवाले तत्वों के चंगुल से मुक्त कराया जाएगा।

मठ- मंदिर की भूमि पर भू-माफियाओं द्वारा कब्ज़ा या उस पर नज़र रखना एक गंभीर मामला है। इस तरह के मामलों से निपटने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं.पुलिस में शिकायत दर्ज कराएँ: स्थानीय पुलिस स्टेशन में भू-माफियाओं के खिलाफ एक औपचारिक शिकायत (FIR) दर्ज करना पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है। इसमें जमीन के विवरण और संबंधित व्यक्तियों की जानकारी दें। राजस्व/भूमि अभिलेख विभाग को सूचित करें: स्थानीय राजस्व विभाग, तहसील कार्यालय या जिला मजिस्ट्रेट को लिखित में मामले की जानकारी दें। वे भूमि के स्वामित्व की पुष्टि कर सकते हैं और अवैध कब्ज़े को रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई कर सकते हैं।

कानूनी सहायता लें सकते हैं एक वकील से परामर्श करें जो संपत्ति और भूमि कानूनों में विशेषज्ञ हो। वे आपको कानूनी विकल्पों के बारे में मार्गदर्शन कर सकते हैं और अदालत में मामला दायर करने में मदद कर सकते हैं।

जन प्रतिनिधियों से संपर्क कर सकते हैं. अपने स्थानीय विधायक, सांसद या अन्य जन प्रतिनिधियों को इस मामले से अवगत कराएँ। सार्वजनिक दबाव अक्सर सरकारी एजेंसियों को कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करता है।

मीडिया और सामाजिक जागरूकता: स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया या समाचार पत्रों के माध्यम से इस मुद्दे को सार्वजनिक करें। जन जागरूकता और मीडिया कवरेज अधिकारियों को मामले को गंभीरता से लेने के लिए बाध्य कर सकती है।

यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि मठ के पास भूमि के स्वामित्व के सभी वैध और अद्यतन दस्तावेज़ हों, क्योंकि ये कानूनी लड़ाई में निर्णायक सबूत के तौर पर काम करेंगे।

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