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वह नेता कौन? अजित पवार हादसे में खलबली

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महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार की एक विमान हादसे में मौत के बाद 10 फरवरी को एक बार फिर इस मामले को लेकर चर्चाओं का एक नया दौर शुरू हो गया है. युरोप की एजेंसी कें जरीये जांच की जाय, लेकिन इसके लिये बढे नेता का विरोध है, लेकिन वह नेता कौन? यह जाणकारी देणे से रोहित पवार ने मना कर दिया.

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इसकी वजह अजित पवार के भतीजे और विधायक रोहित पवार की ओर से लगाए गए नए आरोप हैं. रोहित पवार ने अजित पवार की आकस्मिक मृत्यु में साज़िश की आशंका जताई है.

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रोहित पवार ने मंगलवार को मुंबई में दावा किया कि कई स्रोतों से विस्तृत जानकारी जुटाने के बाद ही वह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं.

 

रोहित पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, उन्हें एयरलाइन कंपनी वीएसआर, बुकिंग संभालने वाली कंपनी एरो और पायलट सुमित कपूर पर संदेह है.

 

रोहित पवार ने कहा कि उन्हें इस मामले में जानकारी इसलिए जुटानी पड़ी क्योंकि जांच एजेंसियां बहुत धीमी गति से काम कर रही थीं. हालांकि उन्होंने यह भी साफ़ किया कि डीजीसीए और सरकार के ख़िलाफ़ उनका कोई आरोप नहीं है.

 

रोहित पवार ने कहा, “मैंने, मेरी टीम और मेरे दोस्तों ने उन लोगों की मदद से यह जानकारी जुटाई जिनसे हम संपर्क कर सके. यह जानकारी हमें कहां से मिली, इसका जवाब अजितदादा से मिले भरोसे और प्यार में है. अगर हर संभव तरीके से जांच की जाए, तो सच्चाई सामने आ सकती है.”

 

28 जनवरी को अजित पवार का विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, उसी दिन एयरलाइन वीएसआर के मालिक विजय कुमार सिंह ने कहा था कि विमान में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी और पायलट अनुभवी था.

 

आइए विस्तार से समझते हैं कि रोहित पवार ने इस पूरे मामले में क्या आरोप लगाए और उनके लिए क्या आधार बताया.

 

बीबीसी न्यूज़ मराठी ने रोहित पवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में किए गए दावों और आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है.

 

इसके अलावा, बीबीसी न्यूज़ मराठी ने वीएसआर कंपनी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका फोन बंद मिला. इस वजह से कंपनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है. अगर वे जवाब देते हैं, तो इसे यहां अपडेट किया जाएगा.

 

रोहित पवार ने कहा कि इसी कंपनी के एक विमान का 2023 में मुंबई में भी हादसा हुआ था. उस दुर्घटना में छह यात्री गंभीर रूप से घायल हुए थे. उस समय भारी बारिश और कम दृश्यता को विमान के रनवे से फिसलने की वजह बताया गया था.

 

इस दुर्घटना की जांच रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है. रोहित पवार ने आरोप लगाया कि इस रिपोर्ट को दबा दिया गया. उनका कहना था कि अगर यह रिपोर्ट सामने आती और उस पर कार्रवाई होती, तो अजित पवार की दुर्घटना को टाला जा सकता था.

 

रोहित पवार ने कहा कि यूरोपियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी ने इस मामले को गंभीरता से लिया था. उनके मुताबिक, एजेंसी ने लेवल-1 की खामियों का हवाला देते हुए वीएसआर का लाइसेंस रद्द कर दिया था.

 

रोहित पवार ने सवाल किया कि अगर ऐसा है, तो वीएसआर के विमान अब भी कैसे उड़ रहे हैं और उन्हें उड़ान की अनुमति क्यों दी जा रही है.

 

28 जनवरी को, अजित पवार के विमान दुर्घटनाग्रस्त होने के कुछ घंटों बाद, जब दिल्ली में पत्रकारों ने वीएसआर कंपनी के मालिक विजय कुमार सिंह से 2023 की घटना के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा था, “2023 में जो हुआ, वह बारिश और कम दृश्यता की वजह से हुआ था.”

 

रोहित पवार ने दावा किया कि उन्होंने वीएसआर में काम कर चुके पूर्व पायलटों, इंजीनियरों और कुछ पूर्व डीजीसीए अधिकारियों से बातचीत की है.

 

रोहित पवार ने कहा कि नियमों के अनुसार पायलटों को उड़ान के बाद तय समय का आराम मिलना चाहिए, लेकिन कंपनी इसका पालन नहीं कर रही और उड़ान घंटों के दस्तावेज़ों में गड़बड़ी की जा रही है.

 

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विमान में लगा कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर कई बार बंद रखा जाता है और अलग-अलग उड़ानों के बीच अपनाई जाने वाली चेकलिस्ट के लिए कोई ठोस प्रणाली नहीं है.

 

रोहित पवार ने यह भी कहा कि कंपनी विमानों के रखरखाव में लापरवाही बरत रही है.

 

उन्होंने सवाल उठाया, “अगर विमान पहली बार में लैंड नहीं कर पाया, तो उसने दोबारा कोशिश की. लेकिन क्या दूसरी बार भी रनवे साफ़ दिख रहा था, या पायलट को कहीं और जाने से रोका गया क्योंकि कंपनी ईंधन बचाना चाहती थी?”

 

रोहित पवार ने कहा, “अगर विमान किसी दूसरे हवाई अड्डे पर उतरता, तो पहले से बुक किया गया लगभग 10 लाख रुपये का किराया बेकार हो जाता. तो क्या इसी वजह से कम दृश्यता के बावजूद विमान को यहां उतारने की कोशिश की गई?”

 

उन्होंने इस आरोप के संदर्भ में बीमा कंपनी की संभावित कार्रवाई का भी ज़िक्र किया.

 

रोहित पवार ने कहा, “विमान में एक स्टॉल वार्निंग सिस्टम होता है, जो विमान की गति कम होने पर चेतावनी देता है. लेकिन हमारे पास जानकारी है कि अजितदादा जिस विमान में यात्रा कर रहे थे, उसमें यह सिस्टम बंद था. कुछ लोगों ने हमें यह जानकारी दी, लेकिन उन्होंने नाम न बताने को कहा क्योंकि उनकी नौकरी पर असर पड़ सकता है.”

 

रोहित पवार ने यह भी सवाल उठाया कि वीएसआर कंपनी अपने विमानों का रखरखाव खुद कर रही थी. उन्होंने पूछा कि क्या इसके लिए कंपनी के पास ज़रूरी विशेषज्ञ थे और क्या उनके पास इसके लिए अनुमति थी.

 

उन्होंने कहा, “हमें इस तरह से जानकारी जुटानी पड़ रही है क्योंकि जांच आगे नहीं बढ़ रही है.”

 

‘ईंधन बम’ को लेकर आरोप

रोहित पवार ने यहां एक और गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि वीएसआर कंपनी पैसे बचाने के लिए विमानों में अतिरिक्त ईंधन डिब्बों में भरकर ले जाती है.

 

उन्होंने कहा कि इसकी पुष्टि के लिए सीसीटीवी फुटेज की जांच होनी चाहिए.

 

रोहित पवार ने कहा, “स्थानीय लोगों के मुताबिक, बारामती में हुए हादसे के दौरान चार से पांच धमाकों की आवाज़ सुनी गई थी. क्या उस दिन विमान में अतिरिक्त ईंधन था और क्या ये डिब्बे उस हिस्से में रखे गए थे जहां अजितदादा बैठे थे?”

 

उन्होंने कहा कि अगर ऐसा ईंधन मौजूद था, तो वह एक तरह का बम बन सकता है.

 

रोहित पवार ने कहा कि आज भी कई वीआईपी इन कंपनियों के विमानों का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए इन मामलों में कार्रवाई ज़रूरी है.

 

बुकिंग कंपनी एरो पर आरोप

रोहित पवार ने वीवीआईपी फ्लाइट बुकिंग संभालने वाली कंपनी एरो पर भी गंभीर आरोप लगाए.

 

उन्होंने आरोप लगाया कि बुकिंग एक व्हाट्सएप ग्रुप के ज़रिए की जाती थी, जिसमें कंपनी का हैंडलर, कंपनी का मालिक, वीवीआईपी लोगों के पीए और महाराष्ट्र नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के निदेशक शामिल थे.

 

रोहित पवार ने इस ग्रुप की चैट के कथित स्क्रीनशॉट भी दिखाए. उन्होंने सवाल उठाया कि जिस हैंडलर के पास वीआईपी यात्रियों की पूरी जानकारी थी, वह कौन था.

 

रोहित पवार ने कहा कि विमान का निर्धारित प्रस्थान समय सुबह 7 बजे था, लेकिन वह 8.10 बजे क्यों रवाना हुआ. उन्होंने पूछा कि उड़ान का समय क्यों बदला गया और देरी की ज़िम्मेदारी किसकी थी.

 

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिरी समय में पायलट क्यों बदले गए.

 

रोहित पवार ने कहा कि पहले ईमेल में पायलट साहिल मदन और सह-पायलट यश के नाम थे, लेकिन अगले दिन पायलट सुमित कपूर और सह-पायलट शांभवी पाठक के नाम सामने आए.

 

उन्होंने बताया कि नियमों के मुताबिक, मुख्य पायलट को उड़ान से कम से कम 20 मिनट पहले और सह-पायलट को 35 मिनट पहले पहुंचना चाहिए.

 

उन्होंने पूछा कि सुबह 6.30 बजे ट्रैफिक कैसे था, पायलट कहां ठहरे थे और वे किस रास्ते से आ रहे थे.

 

रोहित पवार ने कहा कि विमान की गति को देखते हुए हर सेकंड अहम है. उन्होंने दावा किया कि केंद्र और बारामती एटीसी की रिपोर्टों में समय को लेकर अंतर है.

 

उन्होंने आग की लपटें दिखने के समय और पायलट की आखिरी आवाज़ के समय को लेकर भी सवाल उठाए.

 

पारदर्शी जांच की मांग

रोहित पवार ने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच स्वतंत्र और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से कराई जाए. उन्होंने कहा कि केवल डीजीसीए के अंतर्गत आने वाले संगठनों से जांच होने पर संदेह बना रह सकता है.

 

उन्होंने अमेरिका और फ्रांस की एजेंसियों के नाम सुझाए.

 

इस बीच, बीबीसी न्यूज़ मराठी वीएसआर वेंचर्स लिमिटेड से उसका पक्ष जानने की कोशिश कर रही है. जैसे ही कंपनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया मिलेगी, उसे यहां अपडेट किया जाएगा.

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