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राहुल गांधी की सदस्यता खत्म और विपक्षी महागठबंधन मे दरार पडना शुरु!

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नई दिल्ली : कांग्रेस पार्टी के बेहूदा बकवास वादी नेता राहुल गांधी की संसदीय सदस्यता निरस्त होने से जहां तमाम कांग्रेसी कार्यकर्ताओं मे नाटकीय असंतोष व्याप्त है! वहीं NCP चीफ शरदचंद्र पवार के चेहरे मे संदेहस्पद खुशियों की झलक साफ दिखाई दे रही है? राजनैतिकों के तर्कसंगत आरोप के मुताबिक राकापा अध्यक्ष शरदचंद्र पवार को जितना खतरा श्रीमती सोनियां गांधी से नहीं है? उससे अधिक खतरा राहुल और प्रियंका गांधी का भय सता रहा है कि पिछले दशक जब सोनियां गांधी को प्रधानमंत्री पद की दावेदारी की घोषणा जारी हूई थी? तो शरदचंद्र पवार ने विदेेशी मुद्दे को लेकर कांग्रेस का त्याग कर दिया। जिस तरह आम जनता हर दिन मल-मूत्र का त्याग करती है?अंतत:गत्वा शरदचंद्र पवार ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन कर लिया? तब राहुल और प्रियंका राजनीति मे परिपक्वता नहीं थी? परंतु कुुमार राहुल और प्रियका होशियार होते ही श्रीीती सोनियाजी ने शरदचंद्र पवार की करतूतों के बारे मे सब कुछ बतला दिया और समझा दिया है। यानी इस कडवी सच्चाई को राहुल और प्रियंका को शरदचंद्र पवार के संबंध मे सब कुछ मालुम हो गया है।
तब से शरदचंद्र पवार के प्रति प्रियंका और राहुल की आंखों की किरकिरी बने हुए है? परिणामस्वरूप कांग्रेस नेता राहुल और प्रियंका गांधी को हर दिन अपने पूज्य पिताश्री राजीव गांधी की बारंबार यादें सताये जा रहीं है? कांग्रेस के युवा नेता राहुल और प्रियंका गांधी अपने पिताश्री की हत्या के मुख्य जिम्मेदार को छोडेंगे नहीं? इसके लिए वे समय की बेसब्री से प्रतिक्षारत हैं?इसी कडी का नतीजा राहुल गांधी ने पिछला लोकसभा चुनाव केरला के वायनाट लड़ा था? तर्कसंगत सूत्रों की माने तो राहुल गांधी ने वायनाड लोकसभा के क्रिश्चियन मिशनरियों के तमिल विशेषज्ञों से प्रगाढ संबंध बना लिया है? सूत्रों की माने तो राहुल गांधी की सांसदीय सदस्यता छिनना PM मोदी भाजपा के लिए अशुभ माना जा रहा है? परंतु कांग्रेस के पूर्व पीएम स्व राजीव गांधी के करीबी एवं चाहने वालों का मानना है कि ऐसे लोकसभा चुनाव तो आते और जाते रहेंगे परंतु राजीव गांधी के हत्या के प्रमुख जिम्मेदार नेता से बदला राजनीतिक तरीके लिया जा सकता है?बताते हैं कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने श्रीलंका मे शांति स्थापित करने की दृष्टिकोण से भारतीय नौसेना को श्रीलंका भेजा था? तब महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य मंत्री शरदचंद्र पवार ने राजीव गांधी को सुझाव दिया था! कि श्रीलंकाई और तामिली की झंझटों पर ध्यान नहीं देना चाहिए? परंंतु राजीव गांधी ने शरदचंद्र पवार के सुझाव को नजरअंदाज कर दिया था? नतीजतन नौसेना की कार्रवाई से हजारों निर्दोष तामिली बेमौत मारे गए। परिणामत: तामिल ईलम टाइगर लिट्टे ने सुनियोजित साजिश रचकर महिला गुलदस्ता बम के जरिए कांग्रेस नेता राजीव गांधी की हत्या करवा दी गई?बताते हैं कि कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राजीव गांधी उस समय लोकसभा चुनाव प्रचार सभा को संबोधित करने तमिलनाडू के पेरुंबुदुर पंहुचे थे। विशेष उल्लेखनीय है कि सभा मंच पर कांग्रेस पार्टी का कोई भी नेता मौजूद नहीं था? महिला गुुलस्ता बम विस्फोट से राजीव गांधी के परखच्चे उड गए थे।
राजीव गांधी के चहेते करीबियों के तर्कसंगत आरोप के मुताबिक ऐसे लोकसभा चुनाव आते और जाते रहते हैं? परंतु महिला गुलदस्ता बम के माध्यम से राजीव गांधी की दिल दहला देने वाली निर्मम हत्या दुश्मनों के भविष्य के लिए बेहतर नहीं होगा?
इधर दिल्ली की पार्लियामेंट ने सर्व सम्मति से राहुल गांधी की संसदीय सदस्यता खत्म होने से बीजेपी को कोई फर्क नहीं पडेगा। वजह यह है कि कही इससे थोडी सी कांग्रेस के पक्ष में सहानुभूति जरुर है।वह भी सिर्फ सिर्फ गांधी परिवार को खुश करने तक ही सीमित है? परंतु भारत की जागरूक मतदाता जनता पीएम नरेंद्र मोदी भाजपा को खोना नहीं चाहती है!
हालकि कांग्रेस भाजपा के खिलाफ भाषणबाजी में कोई कोर कसर नहीं छोड़ने वाली है। इतना जरुर है कि इस मुद्दे ने विपक्ष को मोदी सरकार के खिलाफ एकजुट होने का बड़ा हथियार दे दिया है। परंतु विपक्षी महागठबंधन मे आपसी खींचतान और दरारें पडने शुरु हो गई है?
मोदी सरनेम पर टिप्पणी को लेकर आपराधिक मानहानि के मामले में दोषी ठहराए जाने और 2 साल की सजा के एक दिन बाद राहुल गांधी की संसद सदस्यता भी खत्म हो गई है। लोकसभा सचिवालय ने इसका नोटिफिकेशन जारी करते हुए कहा कि वायनाड संसद की सदस्यता ऐसे वक्त गई है जब लोकसभा चुनाव में बमुश्किल सालभर का ही वक्त बचा है। सुप्रीम कोर्ट के एतिहासिक फैसले के मुताबिक 2 साल या उससे ज्यादा सजा पाए सांसद या विधायक की सदस्यता तत्काल प्रभाव से खत्म हो जाती है। लेकिन विपक्ष राहुल गांधी की सांसदी खत्म किए जाने को लोकतंत्र पर चोट और जनता की आवाज दबाने की केंद्र सरकार की कोशिश बता रहा है। परंतु कांग्रेस पार्टी मे पिछले कई दशकों से केवल गांधी परिवारवाद को लेकर विपक्षी दल एकजुट होने के लिए कतरा रहा है?

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