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आषाढ़ी गुरू पूर्णिमां ब्रह्म और इंद्र योग में पूजन करने से मिलता है सुख-समृद्धि लाभ

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आषाढ़ी गुरु पूर्णिमा को गुरुदेव से दीक्षा एवं आशीर्वाद प्राप्त करने से व्यक्ति को विशेष लाभ प्राप्त होता है और शिष्यों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। बता दें कि ब्रह्म योग 03 जून को शाम 3:35 तक रहेगा और इसके बाद इंद्र योग शुरू हो जाएगा। वहीं बुधादित्य राजयोग पूरे दिन रहेगा।

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वैदिक सनातन हिन्दू धर्म के पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया जाता है। इस विशेष दिन पर गुरु पूजन और दान-धर्म करने से गुरु दोष से मुक्ति प्राप्त हो जाती है और जीवन में सुख एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन तीन अत्यंत शुभ योग का निर्माण हो रहा है जिसका लाभ साधकों को आवश्यक मिल सकता है।

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पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया जाता है। इस विशेष दिन पर गुरु पूजन की परंपरा का विशेष महत्व है। बता दें कि इस दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु की प्रार्थना करने से और उनका आशीर्वाद लेने से व्यक्ति को ज्ञान व बुद्धि की प्राप्ति होती है। बता दें कि इस वर्ष 03 जुलाई 2023, सोमवार को गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया जाएगा। इस दिन कुंडली में गुरु की स्थिति को मजबूत करने के लिए और सुख समृद्धि की प्राप्ति के लिए गुरुओं की पूजा अवश्य करनी चाहिए।

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का शुभारंभ 02 जुलाई को रात्रि 10:21 पर होगा और इस तिथि का समापन 03 जुलाई को शाम 05:08 पर हो जाएगा। ऐसे में गुरु पूर्णिमा पर्व 03 जुलाई 2023, सोमवार के दिन मनाया जाएगा। इस विशेष दिन पर दुर्लभ संयोग का निर्माण हो रहा है, जिसमें पूजा-पाठ करने से साधक को विशेष लाभ प्राप्त हो सकता है।
पंचांग में बताया गया है कि गुरु पूर्णिमा के दिन ब्रह्म योग, इंद्र योग और बुधादित्य राजयोग का निर्माण हो रहा है। इस दौरान गुरु से दीक्षा एवं आशीर्वाद प्राप्त करने से व्यक्ति को विशेष लाभ प्राप्त होती है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। बता दें कि ब्रह्म योग 03 जून को शाम 3:35 तक रहेगा और इसके बाद इंद्र योग शुरू हो जाएगा। वहीं बुधादित्य राजयोग पूरे दिन रहेगा।

गुरु पूर्णिमा 2023 के दिन करें यह उपाय
गुरु पूर्णिमा के दिन व्यक्ति को ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ इस मंत्र का जाप नियमित रूप से करना चाहिए। ऐसा करने से कुंडली में गुरु दोष समाप्त हो जाता है और जीवन में सुख एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है। वहीं गुरु पूर्णिमा के दिन दान-धर्म का भी विशेष महत्व है। इसलिए किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को पीला वस्त्र, हल्दी, चने की दाल, केसर या पीतल के बर्तन इत्यादि चीजों का दान अवश्य करें। इससे भी गुरु ग्रह बृहस्पति प्रसन्न होते हैं और जीवन में आ रही समस्याओं को दूर कर देते

सहर्ष सूचनार्थ नोट्स:-

उपरोक्त लेख में निहित जानकारी सामान्य की दृष्टिकोण से गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।

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