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बिहार के CM नितीशकुमार बने कांग्रेस के लिए चुनौती? पूर्व मंंत्री लालू यादव के सियासी संकेत

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बिहार के CM नितीशकुमार बने कांग्रेस के लिए चुनौती? पूर्व मंंत्री लालू यादव के सियासी संकेत

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक की रिपोर्ट

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पटना : क्या नीतीश समाजवादी पार्टी जैसी ‘बगावत’ की राह पकड़ लेंगे या फिर कांग्रेस से कदमताल करते रहेंगे? ये सारे सवाल JDU द्वारा मध्य प्रदेश में उतार दिये जाने के बाद उठने लगे हैं.लालू प्रसाद यादव की राजनीति का उभार भले कांग्रेस विरोध से हुआ है. लेकिन, ये भी सच्चाई है कि बीते ढाई दशक से कांग्रेस और आरजेडी एक सियासी पिच पर कदमताल करती रही है. यह नजदीकी कई बार कांग्रेस विरोध के दूसरे बड़े चेहरे नीतीश कुमार के लिए परेशानी का सबब बन जाती है. एक बार फिर जब लालू और कांग्रेस की काफी करीबी दिखने लगी है तो नीतीश कुमार के लिए यह असहज स्थिति उत्पन्न कर रही है.

 

हालांकि, मध्य प्रदेश में नीतीश कुमार ने जदयू के 10 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारकर अपने तेवर दिखा दिए हैं. लेकिन, इसके साथ ही लालू प्रसाद यादव ने भी बिहार में श्रीकृष्ण सिंह (बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री भूमिहार जाति से थे) जयंती के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित समारोह में चीफ गेस्ट बनकर नीतीश कुमार को अपनी रणनीति भी धीरे से समझा दी है. जाहिर है केंद्र में कांग्रेस है और लालू की ‘हां’ और नीतीश की ‘ना’ के बीच की राजनीति अपनी रफ्तार से बढ़ रही है. देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति क्या मोड़ लेती है.

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए जिस तरह से नीतीश कुमार ने एक के बाद एक ऐसे उम्मीदवारों 10 उम्मीदवारों को के नामों की सूची जारी की है जो एमपी चुनाव में कांग्रेस का गेम बिगाड़ सकते हैं. एमपी में जदयू का जनाधार कोई खास तो नहीं है, लेकिन पार्टी ने ऐसी सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं जहां पिछले चुनाव में कांग्रेस जीती हुई है. राजनीति के जानकार कहते हैं कि नीतीश कुमार को इंडिया अलायंस का संयोजक नहीं बनाए जाने को लेकर वे नाराज हैं. इंडिया अलायंस के सूत्रधार के पद पर भी अब उनकी स्थिति असहज सी हो गई है. ऐसे में सब के मन में यही सवाल है कि कहीं नीतीश कुमार कांग्रेस टीम से ‘कुट्टी’ (अलगाव) की कहानी तो लिखना नहीं शुरू कर चुके हैं।

बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार के राहुल गांधी के अनुरोध को ठुकरा कर नीतीश कुमार पहले ही संकेत दे चुके हैं कि अगर इंडिया गठबंधन में उन्हें अहमियत नहीं मिली तो वो इंडिया गठबंधन में बने रहने के लिए मजबूर नहीं हैं.वो कह चुके हैं कि बीजेपी के साथ उनकी दोस्ती इस जनम में ख़त्म होनेवाली नहीं है. यह तल्खी उस समय से ज्यादा बढ़ी है जबसे इंडिया अलायंस की बेंगलुरु बैठक के दौरान नीतीश कुमार के नाम से ‘अविश्वसनीय’ वाला पोस्टर लगा दिया गया. नीतीश कुमार इतने नाराज हुए कि उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस से ही किनारा कर लिया. इसके बाद मुंबई की इंडिया गठबंधन की बैठक में भी संयोजक पत पर बात नहीं बनी. अब नीतीश कुमार ने मध्य प्रदेश में जदयू के उम्मीदवारों के नाम की घोषणा करके कांग्रेस से एक बार फिर पंगा ले लिया है.

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