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जानिए धनतेरस का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व? 10 नवंबर का शुभ मुहूर्त

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जानिए धनतेरस का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व? 10 नवंबर को शुभ मुहूर्त

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट,9822550220

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नागपुर । धन तेरस का त्योहार 5 दिनों तक चलने वाले दीपावली का पहला दिन होता है। हिंदू धर्म में धनतेरस का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के ही दिन भगवान विष्णु के अंशावतार और देवताओं के वैद्य माने जाने वाले भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। धनतेरस से दिवाली पर्व की शुरुआत हो जाती है। दिवाली पर पांच दिनों तक चलने वाले पर्व में सबसे पहले धनतेरस, दूसरे दिन नरक चतुर्दशी, तीसरे दिन दिवाली, चौथे दिन गोवर्धन पूजा और पांचवें दिन भैया दूज का त्योहार मनाया जाता है। धनतेरस को साल भर में पड़ने वाले सभी श्रेष्ठ मुहूर्तों में से एक माना जाता है। धनतेरस पर शुभ कार्य करने और शुभ खरीदारी करना बहुत ही शुभ माना जाता है। धनतेरस पर सोने -चांदी के आभूषण और बर्तन खरीदने की परंपरा होती है। इसके अलावा धनतेरस पर कार, बाइक, जमीन-जायदाद और कपड़े की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। आइए जानते है
वैदिक पंचांग के मुताबिक हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 10 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से आरंभ हो जाएगी। इस त्रयोदशी तिथि का समापन 11 नवंबर को दोपहर 01 बजकर 57 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर धनतेरस का पर्व 10 नवंबर, शुक्रवार को प्रदोषकाल में मनाया जाता है।
धनतेरस का त्योहार दिवाली से पहले मनाया जाता है। यह 5 दिनों तक चलने वाले दीपोत्सव का पहला दिन होता है। धनतेरस पर भगवान गणेश, मां लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा करने का विधान होता है। धनतेरस पर यम देवता की पूजा और घर के दक्षिण दिशा में दीपक जलाया जाता है। धनतेरस पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त 10 नवंबर, शुक्रवार को शाम 05 बजकर 47 मिनट प्रारंभ हो जाएगा जो शाम 07 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।
धनतेरस प्रदोष काल और वृषभ काल का मुहूर्त
धनतेरस पर प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग की गणना के मुताबिक 10 नवंबर को शाम 05 बजकर 30 मिनट से प्रदोष काल आरंभ हो जाता है। आपको बता दें कि सूर्यास्त होने के बाद समय प्रदोष काल कहलाया जाता है। 10 नवंबर को प्रदोष काल रात 08 बजकर 08 मिनट तक रहेगा। वहीं वृषभ काल की बात करें तो शाम 05 बजकर 47 मिनट से शाम 07 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।
इस बार धनतेरस पर बहुत ही दुर्लभ संयोग बन रहा है जिस कारण से धनतेरस का त्योहार काफी खास हो जाता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र की गणना के मुताबिक धनतेरस पर चंद्रमा कन्या राशि में होंगे जहां पर पहले से सुख, समृद्धि और भौतिक सुख प्रदान करने वाले ग्रह शुक्र देव विराजमान है। इस तरह से धनतेरस पर कलात्मक नाम का योग बन रहा है। इसके अलावा 10 नवंबर को धनतेरस पर शुभकर्तरी, वरिष्ठ, सरल, सुमुख और अमृत योग बन रहा है। ऐसे में धनतेरस पर खरीदारी करना बहु
धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने का शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर बर्तन और सोने-चांदी के आभूषण की खरीदारी करना बहुत ही शुभ माना जाता है। वैदिक पंचांग की गणना के मुताबिक धनतेरस पर बर्तन और सोने-चांदी के अलावा वाहन, जमीन-जायदाद के सौदे, लग्जरी चीजें और घर में काम आने वाले अन्य दूसरी चीजों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में खरीदारी करना अच्छा माना जाता है। 10 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से लेकर अगले दिन यानी 11 नवंबर की सुबह तक खरीदारी करने का शुभ मुहूर्त है।
अपने शरीर की स्वास्थ्य को सुखी करने के लिए आयुर्वेद के जनक भगवान धनवंतरि की पूजा की जाती है. भगवान धनवंतरि इसी दिन प्रकट हुए थे. धनवंतरि जी समुद्र मंथन से अमृत को लेकर प्रकट हुए थे. इसलिए धनतेरस के दिन धनवंतरी जी का प्रकट उत्सव मनाते हैं.
हर साल कार्तिक मास कृष्णपक्ष की त्रयोदशी के दिन को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। धनतेरस के दिन 13 दीपों को प्रज्वलित करने का विधान है। इस दिन को देवताओं के प्रधान चिकित्सक भगवान धन्‍वंतरि के प्राकट्य दिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान धन्‍वंतरि ने कलश में भरे हुए अमृत को देवताओं को पिलाकर अमर बना दिया था। भगवान धन्‍वंतरि जी को आयुर्वेद प्रवर्तक माना गया है। दीपावली का आगमन धनत्रयोदशी यानि धनतेरस पर्व के साथ होता है। धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा होती है। इसके अलावा भगवान धन्‍वंतरि की पूजा का विधान है। साथ ही इस मौके पर मृत्‍यु के देवता यमराज की पूजा भी की जाती है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन से उत्पन्न हुए भगवान धन्‍वंतरि को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। इस खास पर्व पर मां लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की अराधना की जाती है। धनतेरस की पूजा को लेकर ऐसी मान्यता है कि स्थिर लग्न के दौरान ही मां की अराधना करने में घर में लक्ष्मीजी का वास होता है। इतना ही नहीं धनतेरस की पूजा में 13 चीजों का होना आवश्यक माना गया है।
पूजा में भगवान धन्‍वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा, बाती, कुमकुम, अक्षत, मिट्टी के दिए, सुपारी, पुष्प माला, झाड़ू, कुबेर यंत्र, मौली, खड़ा धनिया, कलश और सुपारी समेत कई ज़रूरी चीजों का प्रयोग किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सोने के आभूषण और पीलत के बर्तन खरीदने से घर में बरकत आती है। साथ ही मां लक्ष्मी का वास होता है और सुख-समृद्धि आती है। इसके अलावा ये भी माना जाता है कि इस दिन आप जो भी वस्तु खरीदते हैं, उसमें 13 गुणा वृद्धि होती है।
धनतेरस के दिन धन्‍वंतरि का प्रादुर्भाव होने के चलते इस पर्व का वैज्ञानिक महत्व भी है। इसमें कोई दोराय नहीं कि हर एक पर्व के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक तथ्य भी मौजूद होता है। धनतेरस का संबध धन और स्वास्थ्य दोनों से जुड़ा हुआ है। दरअसल, आयुर्वेद का संबध रसायन शास्त्र से है और धन का संबध मां लक्ष्मी से है। ऐसा कहा जाता है कि आज के दिन सोना और चांदी खरीदना चाहिए। इसके पीछे भी एक कारण है। दरअसल, औषधियों में स्वर्ण भस्म का इस्तेमाल किया जाता है और चांदी को भी एंटी बैक्टिरियल माना जाता है। वहीं यम के लिए घर से बाहर तेल का दिया प्रज्वलित किया जाता है। इस प्रकार से हर तथ्य में एक वैज्ञानिक कारण निहित है

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