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आतिशबाजी से वातावरण पर बुरा असर?

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आतिशबाजी से वातावरण पर बुरा असर? झारखंड के प्रमुख शहरों के पर्यावरण में आई गिरावट

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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रांंची। झारखंड दीपावली त्योहार में जोरदार आतिशबाजी का असर पूरे झारखंड के साथ-साथ रांची के वातावरण पर भी पड़ा है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी आंकड़े चौंकाने वाले हैं. जानिए कहां रहा सबसे अधिक ध्वनि और वायु प्रदूषण अपनी सीमा लांघ चुका है।

दीपावली पर पूरे झारखंड सहित राजधानी रांची में लोगों ने जमकर आतिशबाजी की. जिसका दुष्प्रभाव वातावरण पर पड़ा है. आतिशबाजी की वजह से 13 नवंबर की अहले सुबह आसमान काला नजर आया. वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी आंकड़े के अनुसार इस वर्ष ध्वनि प्रदूषण सबसे ज्यादा देखने को मिला. ध्वनि प्रदूषण को मापने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा पूरी रांची को तीन जोन में बांटा गया था. जिसमें साइलेंस एरिया, कमर्शियल एरिया और रेसिडेंशियल एरिया बनाए गए थे.
अयोध्या की तर्ज पर रांची में भी मनी दिवाली, भगवान श्रीराम का नाम लिख लोगों ने जलाए 7121 दीपकसाइलेंस एरिया में सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषणः प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार इस बार सबसे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण साइलेंस एरिया में ही हुआ है. साइलेंस एरिया में रांची के बरियातू स्थित रिम्स के पास मेडिकल चौक को सम्मिलित किया गया था, लेकिन साइलेंस एरिया में दीपावली के दिन ध्वनि का लेवल 52.8 डेसीबल सुबह से दोपहर के समय में रहा तो वहीं देर रात 55.6 डेसीबल ध्वनि का लेवल मापा गया. जबकि मानक के अनुसार साइलेंस एरिया में सुबह के समय ध्वनि 50 डेसीबल होना चाहिए और शाम के समय में 40 डेसीबल होना चाहिए. झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा जारी किए गए आंकड़े में साइलेंस एरिया के क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण का लेवल तय मानक से काफी ज्यादा रहा.
रेसिडेंशियल एरिया में ये रही ध्वनि प्रदूषण की स्थितिः वहीं रिहायशी और रेसिडेंशियल एरिया की बात करें तो जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार दिन के समय में 64.8 डेसीबल ध्वनि का लेवल मापा गया तो वहीं रात के समय में 67.9 डेसिबल ध्वनि का लेवल मापा गया है. जबकि मानक के अनुसार रिहायशी और रेसिडेंशियल क्षेत्र में दिन के समय में 65 डेसीबल ध्वनि लेवल होना चाहिए, जबकि देर शाम के समय में 55 डेसिबल ध्वनि का लेवल होना चाहिए.

व्यवसायिक एरिया में भी ध्वनि प्रदूषण तय मानक से अधिकः वहीं व्यवसायिक क्षेत्र की बात करें तो रांची के व्यवसायिक क्षेत्र में अल्बर्ट एक्का चौक, लालपुर चौक और रातू रोड चौक को शामिल किया गया था. झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार इन सभी क्षेत्रों में मानक से काफी ज्यादा ध्वनि प्रदूषण देखा गया.औद्योगिक क्षेत्र में दिन और रात के समय में 80 से 82 डेसिबल ध्वनि का लेवल देखा गया,जबकि इन क्षेत्रों में 75 से 70 डेसिबल मानक के अनुसार ध्वनि का लेवल होना चाहिए.
चक्रधरपुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स सबसे अधिक खराबःवहीं दीपावली के दिन एयर क्वालिटी इंडेक्स की बात करें तो झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर में एयर क्वालिटी इंडेक्स सबसे ज्यादा खराब था. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार चक्रधरपुर में pm¹⁰ की मात्रा 143mg/cm³ देखा गया जबकि pm²-⁵ की मात्रा 73mg/cm³ देखा गया. जबकि मानक के अनुसार pm¹⁰ की मात्रा 100mg/cm³ होनी चाहिए और pm²-⁵ की मात्रा 60mg/cm³ होना चाहिए.

धनबाद में भी वायु प्रदूषण का असरः वहीं चक्रधरपुर के बाद धनबाद की स्थिति सबसे खराब रही. रिपोर्ट के अनुसार धनबाद का एयर क्वालिटी इंडेक्स मॉडरेट के रूप में देखा गया है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार धनबाद में दीपावली के दिन pm¹⁰ की मात्रा 71mg/cm³ (मिलीग्राम पर क्यूबिक सेंटीमीटर) देखा गया जबकि pm²-⁵ की मात्रा 35mg/cm³ (मिलीग्राम पर क्यूबिक सेंटीमीटर) रिकार्ड किया गया है.
रांची और जमशेदपुर में भी खतरे के निशान पर पहुंचा एयर क्वालिटी इंडेक्सःवहीं धनबाद के बाद रांची और जमशेदपुर में भी एयर क्वालिटी इंडेक्स खतरे के निशान के आसपास पाया गया है. हालांकि रांची और जमशेदपुर में कुछ क्षेत्र में अत्यधिक आतिशबाजी होने के कारण वहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स खराब मापा गया. रांची के कोकर, गांधीनगर, धूमसाटोली और नयाटोली में एयर क्वालिटी इंडेक्स सबसे खराब रिकार्ड किया गया है.
बढ़ते वायु पॉल्यूशन से हार्ट और ब्लड प्रेशर के मरीजों को ज्यादा खतरा, डॉक्टरों ने की सतर्कता बरतने की अपीलदिवाली के दूसरे दिन सुधरने लगे हालातः राहत की बात यह है कि चक्रधरपुर, धनबाद और रांची में दीपावली के दूसरे दिन धीरे-धीरे हालत सुधरते दिखे और एयर क्वालिटी इंडेक्स में काफी सुधार भी आया. इस संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बोर्ड एनालिस्टिक पदाधिकारी आरएन अंजन ने बताया कि दीपावली के दिन ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण में निश्चित रूप से बढ़ोतरी होती है, लेकिन इस वर्ष दीपावली के दूसरे दिन हालात सुधरते दिखाई दे रहे हैं जो कहीं ना कहीं राज्यवासियों लिए राहत की बात है

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