चुनाव में दौड रहा वाहनों का काफिला : जहरीले धुवे सें प्रदूषण,एलर्जी व सांस को तकलीफ
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट
भोपाल। मध्यप्रदेश मे विधान सभा चुनाव प्रचार के लिए दौड रहा वाहनों का काफिला देहात गांवों व
शहरों में जहरीला वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। वाहनों के साथईलेंसरों से निकलने वाले कार्बन डाई ऑक्साइड जहरी ले काला धुआं फेंकने के मामले में औद्योगिक इकाइयों व यात्री वाहनों को जिम्मेदार माना गया है। मध्यप्रदेश मे सबसे अधिक वायू प्रदूषण भोपाल, विदिशा,रायसेन,भिण्ड,गिर्द, ग्वालियर, उज्जैन,छिन्ना, सिवनी, जबलपुर, छिन्दवाडा,नरसिंहपुर, होशंगाबाद, मंडला,शहडोल,सीधी,रींवा,मे पाया गया है,मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों पर गौर करें तो वातावरण में घुल रही कार्बन मोनो ऑक्साइड की मात्रा मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताई गई है। इसके अलावा कार्बन, सल्फर डाई ऑक्साइड व नाइट्रोजन ऑक्साइड भी अधिक मात्रा में निकलने से लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव छोड़ रही है। बावजूद इसके प्रशासन प्रदूषण नियंत्रण पर गंभीर नहीं है।
मुरैना में बैरियर चौराहे से महादेव नाका तिराहे तक तीन किलोमीटर के एरिया में 400 से अधिक थ्री व्हीलर ऑटो रिक्शा संचालित हैं। इनमें सौ से ज्यादा वाहन पुराने मॉडल के होकर काला धुआं फेंक रहे हैं। इसके अलावा पुराने मॉडल के फोर व्हीलर, लोडिंग वाहन व दोपहिया वाहन भी समस्या को बढ़ा रहे हैं। शहर की हार्ट लाइन एमएस रोड पर वायु प्रदूषण को लेकर जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आंकड़े जुटाए तो तथ्य सामने आए कि तीन किलोमीटर का प्रदूषित एरिया हर साल सौ से अधिक लोगों श्वसन संबंधी तकलीफ दे रहा है।
चार पहिया व दो पहिया वाहनों से निकल रहे काले धुएं की जांच के लिए ट्रैफिक पुलिस से लेकर परिवहन विभाग ने बीते दो साल में कोई कार्रवाई नहीं की है। शहर में पांच-पांच वायु प्रदूषण जांच केन्द्र होने के बाद भी यहां प्रदूषण रोकने के प्रयास नहीं हो रहे। पेट्रोल व डीजल से संचालित वाहनों के काले धुएं से प्रदूषण की खतरनाक स्थिति सामने आई है। मुरैना शहर में काले धुएं से जो कार्बन मोनो ऑक्साइड निकल रही है वह 300पीपीएम तक मेजर की गई है। जबकि 120पीपीएम से अधिक कार्बन मोनो ऑक्साइड मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है।
शहर का क्षेत्रफल छोटा व वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण मुरैना में वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। मिलावटी पेट्रोल व डीजल की खपत से वातावरण कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड व सल्फर डाई ऑक्साइड के साथ-साथ कई प्रकार के अम्ल की हवा में घुलनशीलता बढ़ी है। इससे लोगों को श्वसन संबंधी रोग होने का खतरा बढ़ रहा है। डा.विनायक सिंह तोमर, विभागाध्यक्ष प्राणी शास्त्र पीजी कालेज, मुरैना
लेड की मिलावट से निकल रहे एरोसोल कण
पेट्रोल में लेड की मिलावट के कारण धुएं के माध्यम से एरोसोल के कण निकल रहे हैं। मानकों पर गौर करें तो मानव स्वास्थ्य के लिए 0.002एमएम तक एरोसोल कण नुकसानदायी नहीं होते, लेकिन 15 दिन पहले मुरैना में किए गए मेजरमेंट में एरोसोल के कण 0.0383एमएम तक पाए गए हैं। जो लोगों के नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता
विश्वभारत News Website