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पेनिस पैरालिसेस निवारण के लिए रामबाण है वनौषधीय अतिबला

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पेनिस पैरालिसेस निवारण के लिए रामबाण है वनौषधीय अतिबला

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री : सह-संपादक रिपोर्ट

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नई दिल्ली। भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के सेक्सुअल स्पेशलिस्ट के मुताबिक अतिबला नामक वनौषधि जडी बूटी बेहद रामबाण मानी गई है.अतिबला वनौषधीय के विधिवत उपयोग से मनुष्य मे घोडे जैसी ताकत पैदा होती है.अतिबला के उपयोग से पेनिस पैरालिसेस यानी लैंगिक लकवा की समस्या से छुटकारा मिलता है. अतिबला वनौषधीय आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसका उपयोग विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी किया जाता है, लेकिन इसका उपयोग लिंगीय लकवा के इलाज के लिए किया जाता है। लिंगीय लकवा एक गंभीर चिकित्सा स्थिति है जिसके लिए चिकित्सा पेशेवर से परामर्श और उचित उपचार की आवश्यकता होती है।

अतिबला एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसका उपयोग पारंपरिक रूप से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी किया जाता है, जैसे कि सूजन, दर्द, और श्वसन संबंधी समस्याएं. कुछ आयुर्वेद अध्ययनों से पता चला है कि अतिबला में सूजन-रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं.

अतिबला नामक वनौषधीय

बेहद करामाती पौधा है, इसके विधिवत उपयोग से शरीर में घोड़े जैसी फूर्ती और ताकत आती है और कई रोगों को भी करता है दूर करता है.

इसके पत्तों और जड़ों में एक खास प्रकार के गुण होते हैं. जो पथरी की समस्या को कम करने में साथ ही बलगम को पतला करने वाले गुण भी पाए जाते हैं. इसका सेवन करने से खांसी के साथ अंदर जमी बलगम की समस्या दूर होती है.

हमारे आसपास विभिन्न प्रकार की औषधियां मौजूद रहती हैं, लेकिन हम जानकारी के अभाव में इन्हें खरपतवार समझकर नष्ट कर देते हैं. लेकिन यह औषधि हमें विभिन्न रोगों से बचाने में काफी कारगर होती हैं. आयुर्वेद में इनका एक अलग ही महत्व है. आज हम आपको एक ऐसी ही औषधि के बारे में बताने जा रहे हैं. दरअसल, हम बात कर रहे हैं अतिबला पौधे की, जिसका नाम सुनकर ही इसके गुणों के बारे में अभीभूत हो जायेंगे, जो हमें कई रोगों से लड़ने में मदद करता है.

रायबरेली की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. स्मिता श्रीवास्तव बताती हैं अतिबला एक पीले फूल वाला बेहद खूबसूरत पौधा होता है. जिसके पत्तों का स्वाद हल्का तीखा व कड़वा होता है. इसे कई अन्य नाम से भी जाना जाता है. इसमें कई प्रकार के औषधीय गुण पाए जाते हैं.जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होता है. प्राचीन काल से ही आयुर्वेद में कई दवाइयों को बनाने में इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है . ग्रामीण अंचल क्षेत्र में इसे कंघी के नाम से जाना जाता है.

हालांकि, लिंगीय लकवा एक जटिल स्थिति है जिसके लिए एक विशिष्ट चिकित्सा दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है.

लिंगीय लकवा, जिसे स्तंभन दोष भी कहा जाता है, एक ऐसी स्थिति है जिसमें पुरुष यौन संबंध बनाने के लिए पर्याप्त रूप से लिंग में इरेक्शन प्राप्त करने या बनाए रखने में असमर्थ होता है.इसके कई संभावित कारण भी हो सकते हैं, जिनमें हृदय रोग, मधुमेह, तंत्रिका संबंधी समस्याएं, हार्मोनल असंतुलन, और मनोवैज्ञानिक कारक शामिल हैं.

लिंगीय लकवा का निदान और उपचार एक चिकित्सा पेशेवर द्वारा किया जाना चाहिए.

लिंगीय लकवा के उपचार में आमतौर पर दवाएं, इंजेक्शन, और सर्जिकल इम्प्लांट शामिल होते हैं.कुछ मामलों में, मनोवैज्ञानिक परामर्श भी आवश्यक हो सकता है. अतिबला का उपयोग लिंगीय लकवा के लिए एक निवारण के रूप में किया जाना चाहिए।

 

सहर्ष सूचनार्थ नोट्स :-

 

यह जानकारी केवल सामान्य ज्ञान उद्देश्यों के लिए है और चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं दी जानी चाहिए। यदि आपको लिंगीय लकवा या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या के बारे में कोई चिंता है, तो कृपया एक योग्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से परामर्श बहुत ही जरुरी है.

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