Breaking News

झूठ छल कपट-अन्याय पूर्वक कमाया धन जीवन मे अशांति व बेचैनी

Advertisements

झूठ छल कपट-अन्याय पूर्वक कमाया धन जीवन मे अशांति व बेचैनी पैदा करता है

Advertisements

टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:

Advertisements

9822550220

 

श्रीमद भविष्य पुराण और गरुण पुरान के अनुसार जो धन झूठ छल कपट और अन्याय पूर्वक कमाया है. वह जीवन में अशांति और बेचैनी पैदा करता है.

उपरोक्त धर्मशास्त्रों की माने तो सस्ती लोकप्रियता के लिए किसी सज्जनजन के खिलाफ घृणा और नफरत फैलाने के परिणाम अत्यंत भयानक और दूरगामी होता हैं। यह न केवल व्यक्तिगत स्तर पर, बल्कि सामाजिक, कानूनी और मानसिक रूप से विनाशकारी साबित हो सकता है।

यहाँ इसके मुख्य परिणाम दिए गए हैं:

1. सामाजिक सौहार्द का टूटना (Social Disintegration):

समाज में विभाजन और नफरत फैलाने से समुदायों के बीच अविश्वास की खाई गहरी हो जाती है, जिससे समाज में ध्रुवीकरण (polarization) बढ़ता है। हिंसा का माहौल पैदा करता है. इससे साम्प्रदायिक तनाव, दंगे और हिंसक घटनाएं भड़क सकती हैं।

अमानवीयकरण कृत्य करने वाले लोगों को एक-दूसरे से नफरत करना सिखाया जाता है, जिससे इंसान, इंसान की गरिमा को भूल जाता है।

2. कानूनी और प्रशासनिक परिणाम (Legal Consequences):

आपराधिक मामले के संबंध मे बता दें कि भारत सहित कई देशों में हेट स्पीच (Hate Speech) कानूनन अपराध है। इसके तहत FIR, गिरफ्तारी और जेल हो सकती है।

सोशल मीडिया पर प्रतिबंध: ऐसे कंटेंट के कारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट सस्पेंड या परमानेंट ब्लॉक हो सकता है, जिससे वह ‘सस्ती लोकप्रियता’ भी खत्म हो जाती है।

3. व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और मानसिक स्वास्थ्य पर असर (Personal & Mental Impact):

प्रतिष्ठा का नुकसान: घृणा फैलाने वालों को समाज में अंततः तिरस्कार ही मिलता है। जो लोग नफरत पर आधारित होते हैं, वे अपनी साख खो देते हैं।

मानसिक तनाव: नफरत का माहौल फैलाने वाले व्यक्ति के मन में भी लगातार अशांति और शत्रुता का भाव बना रहता है।

एकाकीपन: ऐसे लोग अक्सर समाज से अलग-थलग पड़ जाते हैं।

4. हिंसक घटनाओं में वृद्धि (Rise in Hate Crimes):

शब्दों से हथियार: नफरत भरे भाषण से शुरू हुई बात अक्सर वास्तविक शारीरिक हिंसा, हत्या और उपद्रव तक पहुँच जाती है।

अल्पसंख्यकों पर हमला: इससे समाज के कमजोर और अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ अत्याचार बढ़ते हैं।

5. डिजिटल युग में ‘इको चैंबर’ का खतरा:

नफरत फैलाने वाले लोग अक्सर सोशल मीडिया पर ‘इको चैंबर’ (echo chambers) बनाते हैं, जहाँ वे केवल अपनी ही विचारधारा को सुनते हैं और अतिवादी बन जाते हैं, जो उनके खुद के लिए भी खतरनाक है।

निष्कर्ष:-सस्ती लोकप्रियता पाने का यह तरीका विनाशकारी है। यह उस व्यक्ति के लिए ‘आत्मघाती’ हो सकता है और समाज के लिए ‘कैंसर’ के समान है, जो भाईचारे को नष्ट कर देता है

 

जो धन छल, कपट, झूठ और अन्याय से कमाया है वह जीवन में अशांति और बेचैनी पैदा करता है। ऐसे धन को धर्म के काम में लगाने का औचित्य नहीं है। जो धन किसी के आंसू निकालकर कमाया हो, किसी को दुखी करके कमाया हो, वह ठीक नहीं है

 

जो धन छल, कपट, झूठ और अन्याय से कमाया ऐसे धन को धर्म के काम में लगाने का औचित्य नहीं है। जो धन किसी के आंसू निकालकर य किसी का मन मलिन कर कमाया हो, किसी को दुखी करके कमाया हो, वह ठीक नहीं है। आज सबसे बड़ा पापी वह है जो परिग्रह करता है। वर्तमान में धन से इज्जत मिलती है। यदि व्यक्ति के पास सबकुछ है और धन नहीं है तो उसे इज्जत नहीं मिलती है। न्याय से उपार्जित किया धन श्रावक के जीवन को आगे बढ़ाता है, इससे श्रावक को शांति मिलती है। उक्त विचार आचार्य मनीषप्रभ सागर ने बुधवार को कंचनबाग स्थित श्री नीलवर्णा पार्श्वनाथ जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक ट्रस्ट में धर्मसभा में व्यक्त किए। प्रवचन प्रतिदिन सुबह 9.15 से 10.15 बजे तक होंगे।

कंचनबाग में चल रही धर्मसभा में प्रवचन सुनते श्रद्धालु।

आहार के साथ शब्दों का भी उपवास रखें : मयणाश्रीजी

आहार का उपवास रखना तो आसान है, लेकिन शब्दों का भी उपवास रखना चाहिए। हालांकि यह सबसे कठिन तपस्या है। शास्त्रों में मन, वचन और कर्म को आधार मानकर हमारे व्यक्तित्व को परिभाषित किया गया है। रोजमर्रा के जीवन में कड़वे शब्दों के प्रयोग से ही विवादों का जन्म होता है। इनसे बचने के लिए अपने सामर्थ्य के अनुसार सप्ताह, माह या छह माह में एक बार मौन जरूर रखें। यह बात साध्वी मयणाश्रीजी ने रेसकोर्स रोड आराधना भवन पर आयोजित धर्मसभा में कही। प्रवचन प्रतिदिन सुबह 9.15 बजे होंगे।

Advertisements

About विश्व भारत

Check Also

सत्ता के भूखे चरित्रहीन राजा से नैसर्गिक न्याय की अपेक्षा रखना उचित नहीं?

सत्ता के भूखे चरित्रहीन राजा से नैसर्गिक न्याय की अपेक्षा रखना उचित नहीं? टेकचंद्र सनोडिया …

चारित्र्यहीन राजाकडून नैसर्गिक न्यायाची अपेक्षा योग्य नाही का?

चारित्र्यहीन राजाकडून नैसर्गिक न्यायाची अपेक्षा योग्य नाही का? टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: ९८२२५५०२२०   राज्याच्या कारभारात …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *