रायपुर। महाराष्ट्र में 2 महीने पहले बड़ी सियासी उठापटक देखने को मिली थी. एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसैनिकों के 38 विधायकों ने बगावत कर दी थी. महाविकास अघाड़ी सरकार अल्पमत में आ गई थी. जिसके बाद उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. बाद में एकनाथ शिंदे गुट ने बीजेपी के साथ गठबंधन किया और सरकार बना ली थी.
छत्तीसगढ़ के शिवसेना के नेताओं ने महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे से मुलाकात की।जिसमे महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को छत्तीसगढ़ में भी बड़ा झटका लगा है. यहां शिवसेना की प्रदेश इकाई ने ठाकरे गुट को छोड़कर एकनाथ शिंदे के खेमे में भरोसा जताया है. विगत महीने मे शिवसेना इकाई ठाकरे गुट को छोड़कर शिंदे में शामिल हो गई।
उद्धव ठाकरे को सुप्रीमों बालासाहब के आदर्शो का त्याग करना मंहगा पडा
पूरे देश मे व्याप्त चर्चाओं के मुताबिक शिवसेना संस्थापक सुप्रीमों बालासाहब ठाकरे के पदचिन्हों तथा उनके आदर्शों को त्याग करना उद्धव ठाकरे को बहुत ही मंहगा पड रहा है। कहावत के मुताबिक झाड का पत्ता झाड के नीचे गिरता है। बालासाहब ने कभी राकापा नेता शरतचंद्र पवार और कांग्रेस आलाकमान सोनिया और राहुल गांधी को कभी कोई भाव दिया नहीं?परंतु उद्धव ठाकरे पुत्र मोह तथा कपटी सलाहकार संजय राउत की बातों मे आकर सुप्रीमों बालासाहब के आदर्शों को त्याग करना और कांग्रेस-राकापा नेताओं का दामन थामने को मजबूर होना पड रहा है। परिणामस्वरूप उद्धव ठाकरे की देश भर मे थू-थू हो रही है।
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