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विकास निधि के अभाव में जर्जर अवस्था मे 233 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र : स्वास्थ्य मंत्रालय के समक्ष बदनुमा दाग

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✍️टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री

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मुंबई ।महाराष्ट्र राज्य में ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र रीढ़ माने जाते हैं। महाराष्ट्र के अधिकांश प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की हालत बहुत खराब है और एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि लगभग 233 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र या तो जर्जर अवस्था मे हैं या खतरनाक घोषित कर दिये गये हैं।
हालांकि इन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की मरम्मत या निर्माण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है, लेकिन फंड की कमी है.
राज्य के स्वास्थ्य विभाग के 1839 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में से 233 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के भवन जर्जर या खतरनाक होने की बात सामने आई है. इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों का कहना है कि बरसात के मौसम में अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों में काफी मात्रा में लीकेज होने के कारण मरीजों का इलाज करना मुश्किल होता है. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीण स्वास्थ्य की नींव होते हैं और ये स्वास्थ्य केंद्र गांवों में मरीजों के लिए बड़े अस्पताल होते हैं
ठाणे जिले के छह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जर्जर अवस्था मे हैं या धराशायी अवस्था जानलेवा साबित हो रहे हैं। इन सभी केंद्रों में वर्षांत के पानी का रिसाव होता है। पालघर में सात प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अमरावती में 12, रायगढ़ में 13, पुणे में 10 और नागपुर में 26 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नष्ट हो गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बीड जिले के 13 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति बेहद दयनीय है और अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों की इमारतें खतरनाक हैं. पता चला है कि गोंदिया जिले के 29 स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण ही नहीं किया गया है.

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यह जनता जनार्दन के जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर मामला है भले ही स्वास्थ्य विभाग को नया निर्माण या मरम्मत जैसा कुछ भी करना हो, ये काम लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के माध्यम से ही कराने होते हैं। इसमें हो रही भारी देरी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य विभाग के तहत एक अलग निर्माण प्रकोष्ठ बनाने का प्रस्ताव भी तैयार किया है.अगर सरकार से इसे मंजूरी मिल जाती है तो अस्पताल निर्माण और मरम्मत कार्य में तेजी लाई जा सकती है, नहीं तो हमारे डॉक्टरों को जर्जर या खतरनाक और जर्जर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में बैठकर गरीब मरीजों का इलाज करना स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने बेचैनी से कहा है.इसे स्वास्थ्य मंत्रालय के समक्ष बदनुमा दाग ही कहा जाएगा?

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