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बीजेपी सांसद वरुण गांधी से मिलने राहुल में बढ रही है व्याकुलता?

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बीजेेपी सांसद वरुण गांधी से मिलने राहुल गांधी मे बढ रही है व्याकुलता?

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✍️टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट

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नई दिल्ली। बीजेपी सांसद वरुण गांधी चचेरे भाई से मिलने के लिए राहुल गांधी मे व्याकुलता बढ रही है? हालकी वरुण गांधी पिछले कुछ समय से अपनी ही पार्टी की नीतियों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं. हाल ही में उन्होंने कहा था कि वे न ही नेहरू जी के खिलाफ हैं और न ही कांग्रेस के. इसके बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि वरुण गांधी का बीजेपी से मोहभंग तो नहीं हो रहा है? उधर राहुल गांधी ने भी वरुण गांधी को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है.कि मै मै अपने चचेरे भाई सांसद वरूण गांधी से मिलने के लिए व्याकुल हूं और गले मिल भी सकता हूं, हालकि मेरी और वरुण गांधी की विचारधारा अलग अलग है?
राहुल गांधी के नेतृत्व में निकाली गई भारत जोड़ो यात्रा संपन्न हूई। अब वे भाजपा को छोड़कर अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं से मिलकर विपक्षी गठबंधन को मजबूत बनाने की तैयारी में है।उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की. इस दौरान जब राहुल गांधी से वरुण गांधी को कांग्रेस में एंट्री को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा था, ”मैं उनसे मिलने के लिए व्याकुल हूं,उनके गले लग सकता हूं लेकिन मेरी विचारधारा, उनकी विचारधारा से नहीं मिलती.”
राहुल गांधी ने कहा कि वो बीजेपी में हैं, यहां चलेंगे तो उन्हें दिक्कत हो जाएगी. लेकिन मेरी विचारधारा उनकी विचारधारा से नहीं मिलती. मेरी विचारधारा है कि मैं आरएसएस के दफ्तर में कभी नहीं जा सकता. चाहें आप मेरा गला काट दीजिए.
राहुल ने कहा, ”मेरा परिवार है, उसकी एक विचारधारा है. वरुण ने एक समय, शायद आज भी उस विचारधारा को अपनाया है. उस विचारधारा को अपना बनाया, मैं उस बात को स्वीकार नहीं कर सकता. राहुल ने कहा, मैं उनसे प्यार से मिल सकता हूं, गले लग सकता हूं, मगर उस विचारधारा को स्वीकार नहीं कर सकता हूं. ये मेरे लिए अस्वीकार है. मेरा पॉइंट विचारधारा की लड़ाई पर है.”
‘कोई मुझे गले लगाकर चला गया, उत्साह में ऐसा हो जाता है’, इस पर कांग्रेस और भाजपा के विद्वान जनों मानना है कि सांसद वरुण गांधी और उनकी माताश्री मेनका गांधी विशुद्ध शाकाहारी है और राहुल गांधी परिवार मांसाहारी है?
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क्या कांग्रेस का हाथ थामने की तैयारी कर रहे हैं वरुण गांधी? दरअसल, भाजपा सांसद हैं। हालकि सांसद वरुण गांधी इन दिनों अपनी पार्टियों की नीतियों की खुले तौर पर आलोचना कर रहे हैं. ऐसे में उनके बयानों से तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि क्या वह कांग्रेस में एंट्री करने के लिए अपना मार्ग प्रशस्त करने में लगे हुए हैं. भाजपा के साथ उनका मोहभंग गाहे-बगाहे नजर आ रहा है. पिछले 2 साल से अधिक समय से जिस तरह के उनके लेख प्रमुख पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं, या उन्होंने सोशल मीडिया पर जिस तरह से मुद्दों पर अपनी ही सरकार को घेरा है, उससे इन अटकलों को और बल मिला है.
वरुण गांधी ने पिछले दिनों एक जनसभा में चौंकाने वाला संबोधन दिया था. उन्होंने कहा था, ना तो मैं नेहरू जी के खिलाफ हूं, ना ही कांग्रेस के खिलाफ हूं. हमारी राजनीति देश को आगे बढ़ाने के लिए होनी चाहिए ना कि गृह युद्ध पैदा करने के लिए. आज जो लोग केवल धर्म और जाति के नाम पर वोट मांग रहे हैं, हमें उनसे ये पूछना चाहिए कि रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा का क्या हाल है.
वरुण गांधी ने कहा था कि हमें ऐसी राजनीति नहीं करनी है, जो लोगों को दबाए, बल्कि हमें वो राजनीति करनी है जो लोगों को उठाए. धर्म और जाति के नाम पर वोट लेने वालों से हमें ये पूछने की जरूरत है कि वे रोजगार, शिक्षा या स्वास्थ्य जैसे गंभीर मुद्दों पर वह क्या कर रहे हैं. हमें ऐसी राजनीति नहीं करनी चाहिए जो लोगों को भड़काने या उनका दमन करने में विश्वास करती हो. हमें ऐसी राजनीति करनी चाहिए जो लोगों का उत्थान करे.
इससे पहले राहुल गांधी ने बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधा. राहुल ने कहा, आज हिंदुस्तान की संस्थाओं को आरएसएस और बीजेपी कंट्रोल कर रही है. सभी संस्थानों पर उनका दबाव है. प्रेस पर उनका दबाव है, चुनाव आयोग पर उनका दबाव है. पहले जो दो राजनीतिक पार्टियों के बीच लड़ाई होती रहती है?

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