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(भाग-69) श्रीमद-भगवदगीता नित्य अध्ययन- चिंतन-मनन के आलौकिक और चमत्कारी फायदे

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(भाग-69) श्रीमद-भगवदगीता नित्य अध्ययन- चिंतन-मनन के आलौकिक और चमत्कारी फायदे

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट

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घर में भगवद गीता जरूर रखनी चाहिए और रोजाना इसका अध्ययन मनन चिंतन पाठ भी करना चाहिए। भगवद गीता का पाठ करने से जीवन की कई समस्याओं का हल मिलता है। भगवद गीता का पाठ करने से व्यक्ति में न सिर्फ सोचने समझने की क्षमता बढ़ती है बल्कि उसे कई प्रकार के गुप्त लाभ भी होते हैं।
हमारे एक्सपर्ट ज्योतिषाचार्य डॉ राधाकांत वत्स का कहना है कि गीता का पाठ करने से व्यक्ति के साथ साथ उसके पूरे परिवार पर सकारात्मक असर देखने को मिलता है। इसके अलावा, गीता का पाठ करने से ऐसे कई फायदे होते हैं जिनके बारे में व्यक्ति को पता ही नहीं। तो चलिए बताते हैं।

गीता का पाठ करने से ज्ञान के साथ साथ मन की शांति की भी प्राप्ति होती है।
गीता का पाठ रोजाना करने से जीवन की परेशानियों के हल मिल जाते हैं।
गीता के पाठ को नियमित रूप से करने से कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। गीता का पाठ आपको सफलता की ओर ले जा सकता है। गीता का पाठ करने से व्यक्ति में किसी भी परिस्थिति से लड़ने की काबिलियत आती है।
देवताओं का वाहन होने के बाद भी ये पशु पक्षी क्यों माने जाते हैं अशुभ? गीता का पाठ करने से गृह शांति के साथ साथ ग्रहों की भी शांति (ग्रहों की शांति के उपाय) होती है।
गीता का पाठ करने से कुंडली में मौजूद किसी भी प्रकार का दोष दूर होता है। गीता का पाठ करते समय हाथ में सूत्र यानी कि धागा बांधने से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं।

गीता का पाठ करने से व्यक्ति ऊपरी बाधाओं की चपेट में आने से बचा रहता है। गीता का पाठ नियमित रूप से करने से मृत्यु के बाद पिशाच योनी से मुक्ति मिल जाती है।

गीता का पाठ करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
गीता का पाठ बीमारियों से भी छुटकारा दिला सकता है।
अगर गीता पाठ के साथ साथ घर में यज्ञ करवाया जाए तो इससे वास्तु दोष का निवारण भी हो जाता है।

गीता का पाठ अपने शत्रुओं को पराजित करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
गीता के पाठ के प्रभाव से आपके शत्रु द्वारा आपके विरुद्ध रचे गए सभी षड्यंत्र विफल हो जाते हैं।
भगवद गीता के पाठ से घर में मां लक्ष्मी (मां लक्ष्मी की पूजा के नियम) का वास हमेशा बना रहता है।

गीता का नित्य अध्ययन-चिंतन और मनन करने से मनुष्य अधपतन काावााना क्रोध लोभ मोह तथा मोह माया के बंधनो धीरे मुक्त हो जाता है।
ऐसे अनिष्ठ बंधन उसे और उसके जीवन में कभी रुकावट नहीं बन पाते। वैदिक सनातन धर्म में भगवतगीता का विशेष स्थान है। महाभारत के युद्ध के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण ने अपने सखा अर्जुन को धर्म की रक्षा, कर्म का पाठ और दिव्य ज्ञान का बोध करने के लिए गीता का उपदेश दिया था।
गीता महज एक किताब ही नहीं है,बल्कि यह साक्षात दिव्य प्रतिमूर्ति है। इसके नियमित अध्ययन और इसके संदेशों के अनुशरण से आदमी के जीवन में आमूल चूल परिवर्तन आता है। गीता हिंदू धर्म का बहुत ही पवित्र धर्मग्रंथ है। गीता का ज्ञान भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्ध के मैदान में अर्जुन को दिया था। गीता का संदेश भगवान श्रीकृष्ण के मुख से निकला हुआ अमृत समान शब्द है। मनुष्य को कर्म का रास्ता और दिव्य ज्ञान का बोध दिलाने के लिए गीता का पाठ भगवान कृष्ण ने महाभारत के युद्ध के दौरान अपने सखा अर्जुन को दिया था। ताकि मनुष्य माया, मोह, लोभ और छल के बंधनों से मुक्त होकर संमार्ग मिलता है।यही वजह है कि आज के वैज्ञानिक युग में भी अदालतों में कसम गीता की ही खिलाई जाती है। आइए जानते हैं भगवतगीता पाठ करने के क्या-क्या होते हैं फायदे

मन-मस्तिष्क को शांति मिलती है

जो व्यक्ति नियमित गीता पढता है, उसका मन शांत बना रहता है। वह विपरीत परिस्थिति में भी अपने मन वह वचनों पर नियंत्रण पा लेता है।

काम क्रोध लोभ मोह दूर होता है
गीता का अध्ययन कने वाला व्यक्ति धीरे धीरे कामवासना,क्रोध,लालच और मोह माया के बंधनों से मुक्त हो जाता है। ऐसे बंधन उसे और उसके जीवन में कभी रुकावट नहीं बन पाते।

मन नियंत्रण में रहता है

गीता पढ़ने वाला व्यक्ति पूर्ण रूप से अपने मन में नियंत्रण पा लेता है। वह जैसे चाहे अपने मन को कार्य में ले सकता है।

सच और असत्य का ज्ञान होता है

गीता पढ़ने वाले व्यक्ति को सच और झूठ, ईश्वर और जीव का ज्ञान हो जाता है। उसे अच्छे और बुरे की समझ आ जाती है।

आत्मबल बढ़ता है

गीता पढ़ने से व्यक्ति का आत्मबल बढ़ता है और व्यक्ति साहसी और निडर बनकर अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ता है।

सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है

रोजाना गीता पढ़ने से शरीर और दिमाग में सकारात्मक ऊर्जा विकसित होती है। ऐसे व्यक्ति को विविध ग्रह व्याधि भूत पिशाच आदि का भय नहीं रहता।

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