Breaking News

शारदीय अश्विन नवरात्र में मां महागौरी की उपासना करने से दूर होते हैं सभी ताप पाप और ग्रह व्याधियां

Advertisements

शारदीय अश्विन नवरात्र में मां महागौरी की उपासना करने से दूर होते हैं सभी ताप पाप और ग्रह व्याधियां

Advertisements

टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट

Advertisements

आज शारदीय नवरात्र‍ि के आठवें द‍िन महागौरी की पूजा की जाती है, महागौरी की उपासना से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं, मां महागौरी का ध्यान करने से अलौक‍िक शक्त‍ियां प्राप्त होती हैं. इनके पूजन से सभी नौ देव‍ियां प्रसन्न होती है. देवी का रंग गौर होने के कारण इनका नाम महागौरी पड़ा. देवी महागौरी की चार भुजाएं तथा वृषभ इनका वाहन है

महागौरी का बीज मंत्र:- *श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम: प्रार्थना मंत्र – श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचि:। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥

मां महागौरी को नारियल का भोग अति प्रिय है

मां महागौरी देवी पार्वती का एक रूप हैं। पार्वती जी ने कठोर आराधना कर भगवान शिव को पति-रूप में पाया था। एक बार देवी पार्वती शंकर भगवान से रूष्ट हो गयीं। नाराज होकर तपस्या करने लगीं। जब भगवान शिव खोजते हुए उनके पास पहुंचें तो वहां पहुंच कर चकित रह गए। पार्वती जी का रंग और उनके वस्त्र और आभूषण से देखकर उमा को गौर वर्ण का वरदान देते हैं। महागौरी करूणामयी, स्नेहमयी, शांत तथा मृदुल स्वभाव की हैं। देवी की आराधना इस मंत्र से की जाती है “सर्वमंगल मंग्ल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके. शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते..”।
श्वेत वस्त्र धारण की हुई महागौरी को श्वेताम्बरा भी कहा गया है। नवरात्र के आठवें दिन इनकी पूजा होती है। अष्टमी पूरे देश में धूमधाम से मनायी जाती है तो आइए हम आपको देवी महागौरी की महिमा के बारे में बताते हैं
महागौरी के स्वरूप के बारे में जाने
नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी की पूजा होती है। महागौरी गौर वर्ण की हैं और इनके आभूषण और वस्त्र सफेद रंग के हैं। इनकी उम्र आठ साल की मानी गयी है। इनकी चार भुजाएं है और वृषभ पर सवार होने के कारण इन्हें वृषारूढ़ा भी कहते हैं। दाहिनी तरफ ऊपर के हाथ में अभयमुद्रा और नीचे के हाथ में त्रिशूल रहता है। बायीं ओर ऊपर के हाथ में डमरू और निचले हाथ में वर मुद्रा होती है। इनकी मुद्रा शांत होती है।
इसे भी पढ़ें: नवरात्रि में बनाएं यह मजेदार वड़ा, जानिए इसकी विधि

अष्टमी के दिन करें कन्या पूजन
नवरात्रि में दुर्गाष्टमी और नवमी के दिन कुंवारी कन्याओं की पूजा की जाती है जिसे कन्चक भी कहा जाता है। इस कन्या पूजा में 9 साल तक की लड़कियों की पूजा होती है। ऐसा माना जाता है कि ये कन्याएं साक्षात् मां दुर्गा का रूप होती हैं। कन्या की पूजा करने के बाद कुछ दक्षिणा भी दी जाती है।
देवी को प्रसन्न करने के लिए कैसे करें पूजा
भक्त अष्टमी तिथि के दिन मां भगवती को नारियल का भोग लगाएं। साथ ही महागौरी को चमेली व केसर का फूल अर्पित करें। गोरे रंग के कारण इन्हें शंख, चंद्रमा व कंद के सफेद फूलों की तरह माना जाता है। पूजा के बाद नैवेद्य रूप वह नारियल ब्राह्मण को दे देना चाहिए। इस तरह की पूजा से भक्त के पास कोई दुख नहीं आता है। श्री दुर्गा जी के आठवें स्वरूप महागौरी मां का प्रसिद्ध पीठ हरिद्वार के पास कनखल में है।
इसे भी पढ़ें: नवरात्रि में आसानी से बनाएं यह उपमा, एनर्जी के साथ मिलेगा भरपूर टेस्ट

देवी महागौरी से जुड़ी कथा
मां महागौरी देवी पार्वती का एक रूप हैं। पार्वती जी ने कठोर आराधना कर भगवान शिव को पति-रूप में पाया था। एक बार देवी पार्वती शंकर भगवान से रूष्ट हो गयीं। नाराज होकर तपस्या करने लगीं। जब भगवान शिव खोजते हुए उनके पास पहुंचें तो वहां पहुंच कर चकित रह गए। पार्वती जी का रंग और उनके वस्त्र और आभूषण से देखकर उमा को गौर वर्ण का वरदान देते हैं। महागौरी करूणामयी, स्नेहमयी, शांत तथा मृदुल स्वभाव की हैं। देवी की आराधना इस मंत्र से की जाती है “सर्वमंगल मंग्ल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके. शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते..”।
साथ ही मां महागौरी के विषय में एक और कथा भी प्रचलित है। एक बार एक शेर बहुत भूखा था और वह भोजन की खोज में वहां पहुंच गया जहां देवी तपस्या कर रही थीं। देवी को देखकर शेर की भूख बढ़ गयी लेकिन मां के तेज से वहीं बैठकर तपस्या खत्म होने का इंतजार करने लगा। बहुत देर तक प्रतीक्षा करने से वह कमज़ोर हो गया। महागौरी जब तपस्या से उठी तो शेर की दशा देखकर बहुत दुखी हुईं और उन्होंने उस शेर को अपना वाहन बना लिया।
महागौरी की पूजा का महत्व
देवी दुर्गा के आठवें रूप की पूजा करने से सभी ग्रह दोष दूर हो जाते हैं। विधिवत महागौरी की पूजा करने से दांपत्य जीवन, व्यापार, धन और सुख-समृद्धि बढ़ती है। नृत्य, कला और अभिनय में अपना कैरियर बनाने वाले लोगों को महागौरी की उपासना से लाभ मिलता है। उनकी आराधना से त्वचा से जुड़े रोग भी खत्म हो जाते हैं।
ऐसा माना जाता है कि जो लोग माता महागौरी की आरती गाते हैं और नवरात्रि के आठवें दिन नवरात्रि कथा सुनते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। महागौरी का अर्थ है, वह रूप जो कि सौन्दर्य से भरपूर है, प्रकाशमान है पूर्ण रूप से सौंदर्य में डूबा हुआ
Devi Mahagauri करुणा, पवित्रता और शांति की देवी हैं।
Devi Mahagauri करुणा, पवित्रता और शांति की देवी हैं। नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी माता की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग माता महागौरी की आरती गाते हैं और नवरात्रि के आठवें दिन नवरात्रि कथा सुनते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

Devi Mahagauri की पूजा अष्टमी (नवरात्रि के आठवें दिन) पर की जाती है।
Devi Mahagauri के गोरे रंग की तुलना शंख, चंद्रमा और चमेली के फूलों की सफेदी से की जाती है। (‘महा’ का अर्थ है महान और ‘गौरी’ का अर्थ सफेद है)। सफेद वृषभ (बैल) पर विराजमान देवी महागौरी को तीन आंखों और चार भुजाओं के साथ चित्रित किया गया है। अपने भक्तों को आशीर्वाद देने और उनके जीवन से सभी भय को दूर करने के लिए, उनकी दो भुजाएँ वरदा और अभय मुद्रा में हैं। उनकी दूसरी भुजाओं में त्रिशूल और डमरू हैं। उनके कपड़े और आभूषण सफेद और शुद्ध हैं।

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, सोलह वर्ष की आयु में देवी शैलपुत्री अत्यंत सुंदर थीं और उन्हें गोरा रंग प्राप्त था। उनके अत्यधिक गोरे रंग के कारण उन्हें देवी महागौरी के नाम से जाना जाता था।

Devi Mahagauri का शासी ग्रह

Devi Mahagauri का शासन ग्रह
ऐसा माना जाता है कि राहु ग्रह देवी महागौरी द्वारा शासित है।

Devi Mahagauri का स्वरूप
Devi Mahagauri और देवी शैलपुत्री की सवारी पर्वत बैल है और इसी वजह से उन्हें वृषारुधा (वृषारुढ़) भी कहा जाता है। देवी महागौरी को चार हाथों से दर्शाया गया है। वह एक दाहिने हाथ में त्रिशूल रखती है और दूसरा दाहिना हाथ अभय मुद्रा में रखती है। वह एक बाएं हाथ में डमरू को सुशोभित करती है और दूसरे बाएं हाथ को वरद मुद्रा में रखती है।

Devi Mahagauri का विवरण
जैसा कि नाम से पता चलता है, देवी महागौरी अत्यंत निष्पक्ष हैं। अपने गोरे रंग के कारण Devi Mahagauri की तुलना शंख, चंद्रमा और कुंड (कुंड) के सफेद फूल से की जाती है। वह केवल सफेद कपड़े पहनती हैं और इसी वजह से उन्हें श्वेतांबरधारा (श्वेतांबरधरा) के नाम से भी जाना जाता है।

Devi Mahagauri के पीछे की पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की, जिसके कारण वह काली और कमजोर हो गईं। उनकी दृढ़ता और शुद्ध भक्ति को देखकर, भगवान शिव उनसे शादी करने के लिए तैयार हो गए और देवी पार्वती को गंगा के पवित्र जल से स्नान करवाया। इस पर उनका रंग सुनहरा और दीप्तिमान हो गया। तभी से उन्हें महागौरी कहा जाता है।

Devi Mahagauri ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी
Devi Mahagauri का प्रसाद
नवरात्रि पूजा के आठवें दिन देवी महागौरी को केला और नारियल अर्पित करने से आपको अपनी मनोकामनाएं और दिव्य सुख की प्राप्ति हो सकती है।
का मंत्र:ॐ देवी महागौर्यै नमः

माँ महागौरी का बीज मंत्र
श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:

Devi Mahagauryai मंत्र के लाभ
नवरात्रि पूजा के आठवें दिन देवी महागौरी की पूजा विशेष अनुष्ठान करके और इस मंत्र का जाप करने से उर्वरता, स्वास्थ्य और धन की प्राप्ति होती है। चूंकि देवी पार्वती ने कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव से विवाह किया था, अविवाहित लड़कियां इस दिन उपयुक्त साथी पाने के लिए महागौरी की पूजा करती हैं।

महागौरी मंत्र, प्रार्थना, ध्यान, स्तुति, स्तोत्र, कवच आरती और चालीसा
प्रार्थना
श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी चाष्टमम्

स्तुति
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

यह भी पढ़ें: Maa Mahagauri: इतिहास, उत्पत्ति और पूजा का महत्व

ध्यान
वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चतुर्भुजा महागौरी यशस्विनीम्॥
पूर्णन्दु निभाम् गौरी सोमचक्रस्थिताम् अष्टमम् महागौरी त्रिनेत्राम्।
वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् त्रैलोक्य मोहनम्।
कमनीयां लावण्यां मृणालां चन्दन गन्धलिप्ताम्॥

स्तोत्र
सर्वसङ्कट हन्त्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।
ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥
सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदायनीम्।
डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यमङ्गल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्।
वददम् चैतन्यमयी महागौरी चाष्टमम्
महागौरी मंत्र, प्रार्थना, ध्यान, स्तुति, स्तोत्र, कवच आरती और चालीसा
कवच
ॐकारः पातु शीर्षो माँ, हीं बीजम् माँ, हृदयो।
क्लीं बीजम् सदापातु नभो गृहो च पादयो॥
ललाटम् कर्णो हुं बीजम् पातु महागौरी माँ नेत्रम्‌ घ्राणो।
कपोत चिबुको फट् पातु स्वाहा माँ सर्ववदनो॥

आरती
जय महागौरी जगत की माया। जय उमा भवानी जय महामाया॥
हरिद्वार कनखल के पासा। महागौरी तेरा वहा निवास॥
चन्द्रकली और ममता अम्बे। जय शक्ति जय जय माँ जगदम्बे॥
भीमा देवी विमला माता। कौशिक देवी जग विख्यता॥
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥
सती (सत) हवन कुंड में था जलाया। उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥
तभी माँ ने महागौरी नाम पाया। शरण आनेवाले का संकट मिटाया॥
शनिवार को तेरी पूजा जो करता। माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो। महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो॥

चालीसा
मन मंदिर मेरे आन बसो,
आरम्भ करूं गुणगान,
गौरी माँ मातेश्वरी,
दो चरणों का ध्यान।

पूजन विधी न जानती,
पर श्रद्धा है आपर,
प्रणाम मेरा स्विकारिये,
हे माँ प्राण आधार।

नमो नमो हे गौरी माता,
आप हो मेरी भाग्य विधाता,
शरनागत न कभी गभराता,
गौरी उमा शंकरी माता।

आपका प्रिय है आदर पाता,
जय हो कार्तिकेय गणेश की माता,
महादेव गणपति संग आओ,
मेरे सकल कलेश मिटाओ।

सार्थक हो जाए जग में जीना,
सत्कर्मो से कभी हटु ना,
सकल मनोरथ पूर्ण कीजो,
सुख सुविधा वरदान में दीज्यो।

हे माँ भाग्य रेखा जगा दो,
मन भावन सुयोग मिला दो,
मन को भाए वो वर चाहु,
ससुराल पक्ष का स्नेहा मै पायु।

परम आराध्या आप हो मेरी,
फ़िर क्यूं वर मे इतनी देरी,
हमरे काज सम्पूर्ण कीजियो,
थोडे में बरकत भर दीजियो।

अपनी दया बनाए रखना,
भक्ति भाव जगाये रखना,
गौरी माता अनसन रहना,
कभी न खोयूं मन का चैना।

देव मुनि सब शीश नवाते,
सुख सुविधा को वर मै पाते,
श्रद्धा भाव जो ले कर आया,
बिन मांगे भी सब कुछ पाया।

हर संकट से उसे उबारा,
आगे बढ़ के दिया सहारा,
जब भी माँ आप स्नेह दिखलावे,
निराश मन मे आस जगावे।

शिव भी आपका काहा ना टाले,
दया द्रष्टि हम पे डाले,
जो जन करता आपका ध्यान,
जग मे पाए मान सम्मान।

सच्चे मन जो सुमिरन करती,
उसके सुहाग की रक्षा करती,
दया द्रष्टि जब माँ डाले,
भव सागर से पार उतारे।

जपे जो ओम नमः शिवाय,
शिव परिवार का स्नेहा वो पाए,
जिसपे आप दया दिखावे,
दुष्ट आत्मा नहीं सतावे।

सता गुन की हो दता आप,
हर इक मन की ग्याता आप,
काटो हमरे सकल कलेश,
निरोग रहे परिवार हमेश।

दुख संताप मिटा देना माँ,
मेघ दया के बरसा देना माँ,
जबही आप मौज में आय,
हठ जय माँ सब विपदाए।

जीसपे दयाल हो माता आप,
उसका बढ़ता पुण्य प्रताप,
फल-फूल मै दुग्ध चढ़ाऊ,
श्रद्धा भाव से आपको ध्यायु।

अवगुन मेरे ढक देना माँ,
ममता आँचल कर देना माँ,
कठिन नहीं कुछ आपको माता,
जग ठुकराया दया को पाता।

बिन पाऊ न गुन माँ तेरे,
नाम धाम स्वरूप बहू तेरे,
जितने आपके पावन धाम,
सब धामो को माँ प्राणम।

आपकी दया का है ना पार,
तभी को पूजे कुल संसार,
निर्मल मन जो शरण मे आता,
मुक्ति की वो युक्ति पाता।

संतोष धन्न से दामन भर दो,
असम्भव को माँ सम्भव कर दो,
आपकी दया के भारे,
सुखी बसे मेरा परिवार।

अपकी महिमा अती निराली,
भक्तो के दुःख हरने वाली,
मनो कामना पुरन करती,
मन की दुविधा पल मे हरती।

चालीसा जो भी पढे-सुनाया,
सुयोग वर् वरदान मे पाए,
आशा पूर्ण कर देना माँ,
सुमंगल साखी वर देना माँ।

गौरी माँ विनती करूँ,
आना आपके द्वार,
ऐसी माँ कृपा किजिये,
हो जाए उद्धहार।

हीं हीं हीं शरण मे,
दो चरणों का ध्यान,
ऐसी माँ कृपा कीजिये,
पाऊँ मान सम्मान।

जय माँ गौरी

Advertisements

About विश्व भारत

Check Also

SDM निलंबित, इस आदेश को लेकर गिरी गाज 

SDM निलंबित, इस आदेश को लेकर गिरी गाज टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: 9822550220   देवास। मध्य …

झगडालू पत्नी के खिलाफ कानूनी शिकायत का अधिकार, प्रक्रिया

झगडालू पत्नी के खिलाफ कानूनी शिकायत का अधिकार, प्रक्रिया टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: 9822550220   नई …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *