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कोराडी श्री महालक्ष्मी जगदंबा संस्थान में भक्तिभाव और उत्साह पूर्वक अखंड ज्योत विसर्जन

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कोराडी श्री महालक्ष्मी जगदंबा संस्थान में भक्तिभाव और उत्साह पूर्वक अखंड ज्योत विसर्जन

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट

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नागपुर । शारदीय अश्विन नवरात्र,दशहरा- विजयादशमी मंगलवार को अपरान्ह 4 बजे मनोकामना अंखंड ज्योत का विसर्जन किया गया। जगदंबा संस्थान अध्यक्ष श्री चंद्रशेखर बाानकुले की अध्यक्षता में मुख्य कलश की पूजा अर्चना और अराधना की गई। अखंड ज्योत भवन प्रांगण में स्थापित 3001 कलस धारक यजमानों ने अपनी अपनी अखंड ज्योत का जलाशय मे विर्सजन किया।आकर्षक रथ पर सवार मुख्य कलश और श्रद्धालुओं की भीड का दृश्य देखते ही बनता था। इस मौके पर संस्थान उपाध्यक्ष श्री अजय विजयवर्गीय, अधि मुकेश शर्मा,केशव फूलझेले,बाबूराम भोयर, अधि जी डी चन्ने, प्रेमलाल पटेल, अशोक बाबू खानोरकर, डा नंदिनी पाठक, स्वामी निर्मलानन्द जी महाराज, लक्ष्मीकांत तडसकर, सौ गीतांजली राणे और मंदिर पुजारी फूलझेले परिवार की उपस्थिति सराहनीय रही। शारदीय अश्विन नवरात्र पर्व इस साल मंगलवार 24 अक्टूबर को भक्तिभाव एवं उत्साह वर्धक सम्पन्न हुआ। उसी प्रकार नागपुर के छावनी दुर्गामाता मंदिर मे आयोजित मनोकामना अंखंड ज्योत विसर्जन किया गया।नागपुर शहर में रावण दहन की परंपरा रही है, जोकि अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है. इस साल दशहरा पर दो शुभ योग भी बन रहे हैं.
हर साल नवरात्रि पर्व के समापन के साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में दशहरा या विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है. इस साल विजयादशमी पर्व मंगलवार 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा. हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर साल विजयादशमी पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि मनाई गई.

ज्योतिषाचार्य डा.अनीष व्यास ने बताया कि इस साल दशहरा पर्व पर दो शुभ योग भी बन रहे हैं. इस साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 23 अक्टूबर के दिन शाम को 5:44 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 24 अक्टूबर को दोपहर 3:14 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार दशहरा का त्योहार इस साल 24 अक्टूबर को मनाया गया.

हर साल दशहरा का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. दशहरा के दिन भगवान राम ने रावण का वध कर युद्ध में जीत हासिल की थी. इस पर्व को असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में भी मनाया जाता है. दशहरा पर्व हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है. इस त्योहार को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था, इसलिए भी शारदीय नवरात्र की दशमी तिथि को ये उत्सव मनाया जाता है. कई जगह पर इस दिन मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन भी किया गया है.
जिस तरह से नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान कलश की स्थापना की जाती है ठीक वैसे ही उसे विसर्जित भी किया जाता है। कलश विसर्जन करने की एक विधि होती है जिसका पालन करना जरूरी है। कलश उठाते हुए मंत्र वाचन किया गया।
कलश विसर्जन के दौरान जब कलश को वहां से उठाएं तब उसके नीचे रख अक्षत को अपनी मुट्ठी में लेकर घर के अलग-अलग हिस्सों में छिड़कना चाहिए. कलश में रखे सिक्के को निकाल कर माथे से लगाना चाहिए तथा उसे घर की तिजोरी में रखना चाहिए, इससे धन-धान्य की प्राप्ति होती है
कलश विसर्जन का शुभ मुहूर्त 24 अक्टूबर 2023 दिन मंगलवार को सुबह 06 बजकर 27 मिनट से 08 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में आप दुर्गा विसर्जन के साथ-साथ कलशा यानि घट विसर्जन भी किया गया।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि दशहरा या विजयदशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. हिंदू धर्म में दशहरा के पर्व का विशेष महत्व है. इस साल दशहरा 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा. इस बार दशहरा वृद्धि योग एवं रवि योग में मनाया जायेगा. दशमी को ही मां दुर्गा ने महिषासुर राक्षस का वध किया था. इसलिए इसे विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है. देशभर में अलग-अलग जगह रावण दहन होता है और हर जगह की परंपराएं बिल्कुल अलग हैं. इस दिन शस्त्रों की पूजा भी की जाती है. इस दिन शमी के पेड़ की पूजा भी की जाती है.

इस दिन वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम, सोना, आभूषण नए वस्त्र इत्यादि खरीदना शुभ होता है. दशहरे के दिन नीलकंठ भगवान के दर्शन करना अति शुभ माना जाता है. इस दिन माना जाता है कि अगर आपको नीलकंठ पक्षी के दर्शन हो जाए तो आपके सारे बिगड़े काम बन जाते हैं. नीलकंठ पक्षी को भगवान का प्रतिनिधि माना गया है. दशहरे पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन होने से पैसों और संपत्ति में बढ़ोतरी होती है. मान्यता है कि यदि दशहरे के दिन किसी भी समय नीलकंठ दिख जाए तो इससे घर में खुशहाली आती है और वहीं, जो काम करने जा रहे हैं, उसमें सफलता मिलती है.
पंचांग के अनुसार, इस साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 23 अक्टूबर के दिन शाम को 5:44 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 24 अक्टूबर को दोपहर 3:14 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार दशहरा का त्योहार इस साल 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा.
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस साल दशहरा पर्व पर दो शुभ योग भी बन रहे हैं. इस दिन रवि योग सुबह 06:27 मिनट से दोपहर 03:38 मिनट तक रहेगा. इसके बाद शाम 6:38 मिनट से 25 अक्टूबर को सुबह 06:28 मिनट तक यह योग रहेगा. वहीं, दशहरा पर वृद्धि योग दोपहर 03:40 मिनट से शुरू होकर पूरी रात रहेगा.
रवि योग: पंचांग के मुताबिक, दशहरे के दिन 24 अक्टूबर को रवि योग सुबह 6:27 मिनट से दोपहर 3:38 मिनट तक और शाम को 6:38 बजे से 25 अक्टूबर को सुबह 6:28 मिनट तक रहेगा. ज्योतिष के मुताबिक, रवि योग को काफी शुभ माना जाता है और इस समय में किसी भी शुभ कार्य करने से शुरुआत करने से सफलता मिलती है.
वृद्धि योग: दशहरे पर रवि योग के साथ-साथ वृद्धि योग भी निर्मित हो रहा है. वृद्धि योग की शुरुआत 24 अक्टूबर को दोपहर 3:40 बजे से होगी और यह योग 24 अक्टूबर की पूरी रात तक बना रहेगा. इस दौरान दशहरे की पूजा करने से इच्छा पूरी होगी.
शस्त्र पूजन मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि दशहरा के दिन कई जगहों पर शस्त्र पूजा करने का भी विधान है. दशहरा के दिन शस्त्र पूजा विजय मुहूर्त में की जाती है. ऐसे में दशहरे के दिन यानी 24 अक्टूबर को शस्त्र पूजा का शुभ समय दोपहर 01:58 मिनट से दोपहर 02:43 मिनट तक रहेगा.
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि दशहरा के दिन लंकापति रावण और उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाथ के पुतलों का दहन किया जाता है. पुतलों का दहन सही समय में किया जाए, तो ही शुभ माना जाता है. विजयदशमी के दिन यानी 24 अक्टूबर को पुतलों के दहन का शुभ मुहूर्त सूर्यास्त के समय शाम 05:43 मिनट से लेकर ढाई घंटे तक होगा.
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि अलग-अलग जगहों पर दशहरे का त्योहार अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है. शस्त्र का प्रयोग करने वाले समुदाय इस दिन शस्त्र पूजन करते हैं. वहीं कई लोग इस दिन अपनी पुस्तकों, वाहन इत्यादि की भी पूजा करते हैं. किसी नए काम को शुरू करने के लिए यह दिन सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है. कई जगहों पर दशहरे के दिन नया सामान खरीदने की भी परंपरा है. अधिकतर जगहों पर इस दिन रावण का पुतला जलाया जाता है. वहीं जब पुरुष रावण दहन के बाद घर लौटते हैं तो कुछ जगहों पर महिलाएं उनकी आरती उतारती हैं और टीका करती हैं.
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि दशहरा या विजयादशमी सर्वसिद्धिदायक तिथि मानी जाती है. इसलिए इस दिन सभी शुभ कार्य फलकारी माने जाते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दशहरा के दिन बच्चों का अक्षर लेखन, घर या दुकान का निर्माण, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, अन्नप्राशन, कर्ण छेदन, यज्ञोपवीत संस्कार और भूमि पूजन आदि कार्य शुभ माने गए हैं. विजयादशमी के दिन विवाह संस्कार को निषेध माना गया है.
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि दशहरे के दिन सुबह जल्दी उठकर, नहा-धोकर साफ कपड़े पहने और गेहूं या चूने से दशहरे की प्रतिमा बनाएं. गाय के गोबर से 9 गोले व 2 कटोरियां बनाकर, एक कटोरी में सिक्के और दूसरी कटोरी में रोली, चावल, जौ व फल रखें. अब प्रतिमा को केले, जौ, गुड़ और मूली अर्पित करें. यदि बहीखातों या शस्त्रों की पूजा कर रहे हैं तो उन पर भी ये सामग्री जरूर अर्पित करें. इसके बाद अपने सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा करें और गरीबों को भोजन कराएं. रावण दहन के बाद शमी वृक्ष की पत्ती अपने परिजनों को दें. अंत में अपने बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।.

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