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पौरुष क्षमता बढाने के लिए रामबाण औषधीय गिलोय अमृता

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पौरुष क्षमता बढाने के लिए रामबाण औषधीय गिलोय अमृता

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट,9822550220

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बता दें कि कमजोर मनुष्यों में गिलोय स्पर्म की गुणवत्ता में भी सुधार करती है. इसके साथ ही यह शुक्राणुओं की गतिशीलता को भी बढ़ाती है. पुरुषों में इन्फर्टिलिटी की समस्या भी अधिक देखने को मिव रही है. अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं को गिलोय का सेवन करना शुरू कर सकते हैं.
बिना सन्तुष्टी के संभोग करते हुए अगर वीर्य स्खलन हो जाये तो उसे शीघ्रपतन कहा जाता है। अश्लील वातावरण में रहना, मस्तिष्क की कमजोरी और हर समय सहवास की कल्पना मे खोये रहना यह शीघ्रपतन का कारण बनती है।
ज्यादा गर्म मिर्च मसालों व अम्ल रसों से खाद्य-पदार्थो का सेवन करने, शराब पीने, चाय-कांफी का ज्यादा पीना और अश्लील फिल्म देखने वाले, अश्लील पुस्तकें पढ़ने वाले शीघ्रपतन से पीडित रहते हैं
गुडुची,गिलोय, अमृता और गुलबेल के नाम से जानी जाने वाली गिलोय आयुर्वेद की सबसे महत्वपूर्ण औषधियों में से एक है। गिलोय की लता व पत्तियां ना केवल बहुत सी बीमारियों को ठीक करती है, बल्कि स्वस्थ व्यक्ति अगर इसका सेवन करे तो वह लम्बे समय तक स्वस्थ बना रह सकता है। इसी कारण इसे अमृत बेल का दर्ज़ा दिया गया है। आइये देखते है कि गिलोय के 10 प्रमुख एवं प्रमाणित फ़ायदें क्या है और किन-किन परिस्थितियों में इसका उपयोग निषेध है।

गिलोय के गुण और उपयोग:

1. एलर्ज़ी रोधी : विभिन्न शोधों में गिलोय के एलर्जी रोधी गुण प्रमाणित हुए हैं। एलर्जी से होने वाले नजले और नाक बहने की समस्या में गिलोय के नियमित सेवन से सुधार देखा गया है।

2. बुखार में गिलोय : गिलोय पुराने से पुराने बुखार और संक्रमण को ठीक कर सकता है। ऐसे बुखार जिसका कारण पता न चल पा रहा हो (PUO), गिलोय की बेल का रस पीने से ठीक हो जाता है। इसी प्रकार डेंगू के मरीजों के लिए भी यह बहुत फायदेमंद है।

3. पेट के रोगों में : गिलोय की लता (बेल) को कूट कर रोज़ाना सुबह पीने से दस्त, पेचिश और आंव की समस्या में आराम मिलता है। गिलोय का नियमित सेवन लीवर की क्रियाशीलता को बढ़ाता है, जिससे पीलिया होने की संभावना घट जाती है।

4. प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करता है : गिलोय शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता (इम्युनिटी पॉवर) को बढ़ाता है, जिससे संक्रमण और अन्य बहुत सी बीमारियों से बचाव होता है। एक शोध में एड्स के रोगियों में भी इसकी प्रभाविकता देखी गयी है।

5. डायबिटीज रोधी : गिलोय खून में मौजूद शुगर को प्राकृतिक रुप से कम करता है, जिससे डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। चूहों पर किये गये शोधों में गिलोय बिना किसी दवा की सहायता के रक्त शर्करा को आपेक्षित स्तर तक नीचे ला पाने में सक्षम रहा है।

6. त्वचा रोगों में : गिलोय के पाउडर या रस के नियमित सेवन से चेहरे की चमक बरकरार रहती है, साथ ही इससे दाद, खाज़, और सिरोसिस जैसी बीमारियों में भी आराम मिलता है।

7. कैंसर रोधी : गिलोय और गेहूं के ज्वारे का रस मिलाकर पीने से कैंसर कोशिकाओं की सक्रियता कम होती है। इससे रक्त कैंसर और एप्लास्टिक एनीमिया के मरीजों में भी सुधार देखा गया है।

8. सूजन रोधी गुण : गिलोय में सूजन कम करने और दर्द सहन करने की क्षमता बढ़ाने के गुण पाये जातें हैं। इस कारण से घुटनों के दर्द में यह बहुत प्रभावी है।

9. एंटी-ऑक्सीडेंट गुण : इसे पानी के साथ मिलाकर पीने से आपको इसके एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों का लाभ मिल सकता है। यह शरीर को स्वस्थ और हमेशा युवा बनाये रखने में मदद करता है।

10. घाव भरने में सहायक : एक शोध के मुताबिक यह घाव के संकुचन को बढ़ाता है और घाव पर झिल्ली बनने की प्रक्रिया को तेज़ कर देता है, जिससे घाव जल्दी भर जाता है।

गिलोय का सेवन किस प्रकार से किया जा सकता है?

– ताज़ा कटी हुई बेल को कूटकर एवं पानी में मिलाकर इसके रस को पिया जा सकता है।

– पत्तियों को सुखाकर चूर्ण के रूप में सेवन किया जा सकता है।

– ज़ड़ी के रूप में लता और पत्तियों को सीधे भी खाया जा सकता है।

गिलोय का सेवन किन परिस्थितियों में निषेध (मना) है?

– गिलोय पेट के रोगों में रामबाण है, परंतु कुछ लोगों में यह कब्ज़ का कारण भी बनता है। अगर ऐसे लक्षण आ रहे हों तो गिलोय का सेवन ना करें।

– अगर आप गर्भवती हैं या स्तनपान के दौर में है तो गिलोय का इस्तेमाल ना करें। गिलोय में बहुत से औषधीय गुण वाले ऐसे सक्रिय पदार्थ पाये जाते है जो मां के दूध में आ सकते हैं, और बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

– गिलोय प्रतिरक्षा क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ाने वाला माना जाता है, इसलिए अगर आप आटोइम्युन रोगों जैसे रुमेटाइड आर्थराइटिस से ग्रस्त हो तो आपको इसका प्रयोग नहीं करना चाहिये।

– यह डायबिटीज में लाभदायक है, परंतु अगर आपका शुगर लेवल अनियमित रहता है, या बार बार इसका स्तर गिर जाता है तो गिलोय का प्रयोग ना करें क्योंकि यह रक्त शर्करा के स्तर को तेज़ी से नीचे लाने के लिये जाना जाता है।

अत: नियमित रूप से इस अमृत बेल का रस पीजिये और अपना यौवन व स्वास़्थय सुरक्षित रखिये

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