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PM मोदी ने खोले CM शिवराज के पत्ते?

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PM मोदी ने खोले CM शिवराज के पत्ते तो 12 दिन मे मध्यप्रदेश में रणनीति बदल गई?

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट,9822550220

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भोपाल। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार अपनी चुनावी सभा में शिवराज सिंह चौहान की योजना का नाम लिया है। जानिए बीजेपी के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान क्यों मजबूरी बन गए हैं।चुनाव नजदीक आते ही एमपी में बीजेपी के अंदर की हवा बदल रही है। पहली बार रतलाम की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पत्ते खोले हैं। इसके बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। अभी तक मध्यप्रदेश की चुनावी रैलियों में पीएम मोदी शिवराज सरकार की प्रमुख योजनाओं का जिक्र नहीं करते थे। पहली बार रतलाम में उन्होंने मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का जिक्र किया है। यह शिवराज सरकार की फ्लैगशिप योजना है। पार्टी ने इसी के जरिए एमपी में वापसी का ख्वाब देख रही है। वहीं, प्रधानमंत्री पहली बार जब योजना का जिक्र किया तो शिवराज सिंह चौहान को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का क्रेडिट बीजेपी सरकार को दिए हैं। इसके लिए शिवराज सिंह चौहान के नाम नहीं लिए हैं। यह सर्वविदित है कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना और लाड़ली लक्ष्मी योजना की शुरुआत शिवराज सिंह चौहान ने की है। इन योजनाओं का जमीनी स्तर पर क्रेज बहुत है। ऐसे में बीजेपी को इग्नोर करना पार्टी के लिए आसान नहीं है। शायद यही वजह है कि वोटिंग से पहले बीजेपी के अंदर की हवा बदलने लगी है।
चेहरे को लेकर स्थिति साफ नहीं: मध्यप्रदेश में 20 सालों में पहली बार ऐसा हो रहा है कि बीजेपी ने अभी तक चेहरे का ऐलान नहीं किया है। पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ रही है। प्रचार-प्रसार में भी पीएम मोदी की योजनाओं का जिक्र ज्यादा है। चेहरे पर पार्टी के बड़े नेताओं का जवाब एक ही होता है कि चुनाव के बाद पार्लियामेंट्री बोर्ड तय करेगी। ऐसे में अभी भी चेहरे पर स्थिति साफ नहीं है।
वहीं, मध्यप्रदेश में पार्टी शिवराज सिंह चौहान को दरकिनार कर रही थी। चुनाव की तारीखों की घोषणा से कुछ दिन पहले उन्होंने दमदार वापसी की है। उन्होंने खुद ही चुनावी सभाओं में यह सवाल करना शुरू कर दिया था कि मामा ने कैसा काम किया। मुझे फिर से मुख्यमंत्री बनना चाहिए की नहीं। ऐसे तमाम सवाल शिवराज सिंह चौहान अपनी सभाओं में पूछते थे। जबलपुर में पीएम मोदी की रैली में भी उन्होंने बहनों से पूछा था कि मैंने अच्छी सरकार चलाई कि नहीं। कमलनाथ और दिग्विजय सिंह में अनबन हैं: पहली बार लाड़ली बहना योजना का जिक्र: एमपी विधानसभा चुनाव में महज 12 दिन बचे हैं। 12 दिन बदले प्रधानमंत्री मोदी ने नए संकेत दिए हैं। उन्होंने शिवराज सिंह चौहान की फ्लैगशिप योजना का जिक्र कर सियासी पंडितों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इसके साथ ही यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या बीजेपी के लिए शिवराज को इग्नोर करना आसान नहीं है।
बड़े चेहरों को उतारकर दिए थे संकेत: दरअसल, बीजेपी ने चुनाव से पहले ही यह साफ कर दिया था कि चेहरा शिवराज सिंह चौहान नहीं होंगे। इन अटकलों को तब और बल मिला था, जब पार्टी ने तीन केंद्रीय मंत्रियों से समेत आठ चेहरों को मैदान में उतार दिए। साथ ही सीएम शिवराज सिंह चौहान के नाम को तमाम केंद्रीय नेता चुनावी सभा में लेने से बचते रहे। चुनावी माहौल है, ओरछा के राजाराम मंदिर में वीआईपी भी बने भक्त
क्यों मजबूरी हैं शिवराज सिंह चौहान: दरअसल, एमपी चुनाव में कांग्रेस ने ओबीसी कार्ड खेल दिया है। ओबीसी की आबादी मध्य प्रदेश में 50 फीसदी से अधिक है। मध्यप्रदेश में निर्विरोध रूप से शिवराज सिंह चौहान सबसे बड़ा चेहरा है। साथ ही वह ओबीसी समाज से आते हैं। शायद आखिरी वक्त में बीजेपी को शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता का अंदाजा हो गया है। इस बात का पार्टी को पूरी तरह से एहसास है कि शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश में 20 साल तक मुख्यमंत्री रहे है। उन्होंने इस तरह से साइड करके नहीं चला जा सकता है। ऐसे में पार्टी को अपनी रणनीति बदली पड़ी है।
आक्रामक प्रचार में जुटे हैं शिवराज वहीं, सीएम शिवराज सिंह चौहान पूरे मध्यप्रदेश में तारीखों की घोषणा के बाद आक्रामक प्रचार में जुटे हैं। वह लगातार पूरे प्रदेश में चुनावी सभाएं और रोड शो कर रहे हैं। उनकी सभाओं में भीड़ खूब उमड़ रही है। साथ ही उनका क्रेज भी दिख रहा है। शायद यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अब मध्यप्रदेश में उनकी योजनाओं को दरकिनार नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि कांग्रेस भी लगातार इस बहाने बीजेपी को घेर रही थी कि इनके नेता अपने मुख्यमंत्री का नाम क्यों नहीं लेते हैं।
नवभारत टाइम्स.कॉम से बात करते हुए वरिष्ठ पत्रकार प्रभु पटेरिया ने कहा कि कार्यकर्ताओं और नेताओं का शुरुआती दिनों में एंटी इंकंबेंसी का फीडबैक था। शायद यही वजह थी कि शुरुआती दिनों में पार्टी ने उन्हें इग्नोर करना शुरू कर दिया है। अब जमीनी स्तर के सर्वे आ रहे हैं, उनमें शिवराज सिंह चौहान की योजनाओं का क्रेज दिख रहा है। साथ ही महिलाओं के बीच में उनकी अच्छी खासी लोकप्रियता है। इसके बाद पार्टी को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी है। अब तमाम केंद्रीय मंत्री भी शिवराज सिंह चौहान की योजनाओं का जिक्र करने लगे हैं।
शिवराज सिंह बीजेपी में इकलौते ओबीसी मुख्यमंत्री हैं। कांग्रेस के पास भी तीन हैं। राहुल गांधी अपनी सभाओं में पार्टी के ओबीसी मुख्यमंत्रियों का जिक्र करते हैं। ऐसे बीजेपी के लिए शिवराज सिंह चौहान को दरकिनार करना ओबीसी वर्ग से नाराजगी मोल लेना जैसा है।
प्रभु पटेरिया, वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि उन सर्वेज से यह साफ हो गए हैं कि शिवराज सिंह चौहान के बिना एमपी में बीजेपी चुनाव नहीं जीत सकती है। पार्टी ने जिन बड़े नेताओं को मैदान में उतारे हैं, उसका ज्यादा असर नहीं है। पार्टी के बड़े नेता अब शिवराज सिंह चौहान के कद बढ़ाने में लगे हैं। वरिष्ठ पत्रकार प्रभु पटेरिया ने कहा कि अभी कुछ दिनों पहले केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि अभी शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री हैं, आगे चलकर वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बन सकते हैं।
पार्टी के इकलौते ओबीसी मुख्यमंत्री
वहीं, ओबीसी कार्ड के सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार प्रभु पटेरिया ने कहा कि एमपी चुनाव में राहुल गांधी लगातार यह कह रहे हैं कि हमारे तीन मुख्यमंत्री ओबीसी हैं। बीजेपी के पास शिवराज सिंह चौहान अकेले ओबीसी मुख्यमंत्री हैं। हालांकि पार्टी ने इस बार प्रहलाद सिंह पटेल को भी मौका दिया है। लेकिन शिवराज सिंह चौहान के कद के बराबर एमपी में कोई नहीं है। इन्हें सीधे साइड कर पार्टी ओबीसी वर्ग की नाराजगी नहीं लेना चाहेगी

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