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रामदास कदम की बेटे के लिए फील्डिंग, गजानन कीर्तिकर मैदान छोड़ने को तैयार नहीं, महाराष्ट्र में सियासी खींचतान

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रामदास कदम की बेटे के लिए फील्डिंग, गजानन कीर्तिकर मैदान छोड़ने को तैयार नहीं, महाराष्ट्र में सियासी खींचतान

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट,9822550220

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मुंबई उत्तर पश्चिम लोकसभा सीट की लड़ाई में गजानन कीर्तिकर और रामदास कदम के बीच तनातनी शुरू हो गई है। कीर्तिकर ने कहा है कि उनकी उम्र हो गई है लेकिन वह चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी उन्हें टिकट न दे तो वह इसका विरोध करेंगे।
अभिमन्यु शितोले, मुंबई: आने वाला लोकसभा चुनाव मुख्यमंत्री शिंदे के लिए कितना बड़ा सिर दर्द साबित होने वाला है, इसके संकेत मिलना शुरू हो गए हैं। दिवंगत शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के करीबी रहे दो नेता गजानन कीर्तिकर और रामदास कदम, जो उद्धव ठाकरे को छोड़कर बागी एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हैं, एक ही सीट को लेकर आमने-सामने आ गए हैं। यह सीट है मुंबई उत्तर पश्चिम लोकसभा की। इस सीट से गजानन कीर्तिकर सांसद हैं, जबकि शिंदे गुट के ही दूसरे नेता रामदास कदम अपने बेटे सिद्धेश कदम के लिए इस सीट पर नजर लगाए बैठे हैं। उन्हें लगता है कि गजानन कीर्तिकर की उम्र हो गई है, इसलिए अब वे चुनाव नहीं लड़ेंगे, तो उनकी जगह वह अपने बेटे को फिट कर देंगे। रामदास कदम एक दिन पहले ही यह बात मीडिया के सामने भी कह चुके हैं। उनकी इसी बात से गजानन कीर्तिकर खफा हो गए हैं और रिटायर होने की बात को बकवास बताते हुए ताल ठोक कर चुनावी मैदान में कूदने की तैयारी दिखा रहे हैं। कीर्तिकर ने रविवार को मीडिया से बात करते हुए रामदास कदम की इच्छा पर पलटवार करते हुए कहा, क्या कोई पार्टी एक ही घर में दो भाइयों को टिकट देती है? (कदम का एक बेटा योगेश विधायक है।) अगर समझो पार्टी ने देने का निश्चय किया तो भी मैं इसका विरोध करूंगा। मैं अभी पीछे नहीं हटा हूं। मैं मैदान में हूं। मैं चुनाव लड़ूंगा और गारंटी देता हूं कि चुनाव जीतूंगा भी। इसके आगे गजानन कीर्तिकर ने जो कहा, वह और रामदास कदम के लिए और भी ज्यादा मारक है। कीर्तिकर ने कहा, ‘अगर पार्टी मुझे टिकट न भी देना चाहे, तो उसे किसी अच्छे आदमी को टिकट देना चाहिए।

कीर्तिकर ने कहा कि मुझे न मंत्री बनना है, न राज्यपाल बनना है, परंतु इसका मतलब यह नहीं है कि मैं चुनाव नहीं लडूंगा। चुनाव लड़ने की मेरी तैयारी पूरी हो चुकी है। हालांकि अभी उम्मीदवार कौन होगा यह तय नहीं हुआ है, लेकिन मैं चुनाव लड़ूंगा, यह मैंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को बता दिया है।

‘उम्र होने का मतलब कमजोर नहीं’
कीर्तिकर ने कहा कि पिछली बार मैं पौने तीन लाख वोट से जीता था। इस बार साढ़े तीन लाख वोट से जीतूंगा। मेरी उम्र हो गई, इसका मतलब यह नहीं कि मैं कमजोर हो गया। मेरा दिल, दिमाग, शरीर पूरी तरह स्ट्रॉन्ग है।

बेटे को भी दी चेतावनी
शिवसेना छोड़कर गजानन कीर्तिकर एकनाथ शिंदे के साथ आ गए हैं, लेकिन उनका बेटा अमोल कीर्तिकर उद्धव ठाकरे के साथ ही है। चर्चा है कि उद्धव ठाकरे आगामी चुनाव में अमोल कीर्तिकर को उत्तर पश्चिम लोकसभा सीट से उम्मीदवारी दे सकते हैं। लेकिन गजानन कीर्तिकर का कहना है कि उन्होंने अपने बेटे पर शिंदे गुट में शामिल होने का दबाव नहीं डाला, लेकिन यह साफ-साफ कह दिया है कि मैं जिस सीट से चुनाव लड़ूंगा, उस सीट से चुनाव लड़ना नहीं। मेरे खिलाफ प्रचार भी करना नहीं। वह जहां से भी चुनाव लड़ेगा, मैं उसके खिलाफ प्रचार नहीं करूंगा।

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