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700 वर्षों में पहली बार पांच राजयोग और तीन शुभ योग में मनेगी कालरात्रि अमावस्या दीपावली

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700 वर्षों में पहली बार पांच राजयोग और तीन शुभ योग में मनेगी कालरात्रि अमावस्या दीपावली

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट

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सनातन धर्म हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह की कालरात्रि अमावस्या तिथि पर पूरे देशभर में दीपावली का पर्व बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है. इस साल दीपावली पर एक साथ 3 शुभ योग और 5 राजयोग का निर्माण हुआ है. दीपावली 12 नवंबर को है. इस दिन अमावस्या दोपहर तकरीबन 2:45 बजे से शुरू हो रहा है। आज अमावस्या तिथि पर पूरे देशभर में दीपावली का पर्व बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है. दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है. इस साल दीपावली पर एक साथ 3 शुभ योग और 5 राजयोग का निर्माण हुआ है. दीपावली 12 नवंबर को है. इस दिन अमावस्या दोपहर तकरीबन 2:45 बजे से शुरू होगी.
पूजा के वक्त बनेंगे पांच राजयोग
शाम को लक्ष्मी पूजा के वक्त पांच राजयोग रहेंगे. इनके साथ आयुष्मान, सौभाग्य और महालक्ष्मी योग भी बनेंगे. दीपावली पर शुभ योगों की ऐसी स्थिति पिछले 700 वर्षों में नहीं बनी. इतने शुभ संयोग बनने से ये लक्ष्मी पर्व सुख-समृद्धि देने वाला रहेगा. दीपावली पर बन रही ग्रह स्थिति देश की तरक्की का शुभ संकेत दे रही है. दीपावली के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से नया साल शुरू होता है.
700 वर्ष बाद दुर्लभ मां कालरात्रि अमावस्या हमारे वैदिक सनातन धर्म शास्त्रों में दीपावली की अमावस्या को बहुत ही खास माना गया है. वैसे तो हमारे देश में अमावस्या हर महीने होती है लेकिन दीपावली की रात्रि की अमावस्या को बहुत ही खास माना गया है. ऐसा कहा जाता है 700 वर्ष बाद यह कि दीपावली की रात्रि की अमावस्या यानी कालरात्रि की पूजा अर्चना का दुर्लभ योग प्राप्त हुआ है. यह रात साधकों के लिए बहुत खास होता है, पौराणिक कथाओं के अनुसार दीपावली की आवश्यक की रात्रि में अगर कोई साधक अपनी साधना करता है तो उनकी साधना अवश्य पूरी होती है. इस रात्रि को साधक अपने महत्वपूर्ण कार्य सिद्ध करते हैं, इसलिए इस रात्रि को कालरात्रि भी कहा जाता है. वही, तंत्र शास्त्र में कालरात्रि को एक शक्ति का रूप भी माना जाता है. कालरात्रि शक्ति की पूजा से सौभाग्य धन-धन वैभव की भी प्राप्ति होती है.

दीपावली की रात साधकों के लिए विशेष होता है. ऐसा माना जाता है कि इस रात में साधकों को अपनी साधना के लिए शांत व एकाग्रस्त स्थान का चयन करना चाहिए. यह रात कालिका रात्रि के नाम से भी जाना जाता है. वर्षों की तपस्या इस रात में पूरी होती है. मां कालिका साधकों की साधना को पूरी होती है
मां लक्ष्मी की होती है विशेष कृपा
पंडित भूपाल झा ने बताया कि सनातन धर्म में हर महीने अमावस्या होती है, लेकिन दीपावली की रात्रि वाली अमावस्या साधकों के लिए बहुत खास होती है. ऐसा माना जाता है कि इस अमावस्या की रात्रि में साधकों के सिंह लग्न विशेष होता है. इस रात्रि में साधना करने से हर इच्छाएं माता पूरी करती है. ऐसा माना जाता है कि सिंह लग्न में मिला हुआ फल का नाश नहीं होता है. वो बढ़ता ही रहता है, इसलिए दीपावली के दिन वाली अमावस्या रात्रि में साधक अपनी साधना से अपनी इच्छाएं पूरी करते हैं. इस अमावस्या की संध्या में घर-घर लक्ष्मी घूमती है. दीपावली की रात्रि यानी अमावस्या की संध्या के वक्त मां लक्ष्मी का आगमन सभी घरों में होता है. ऐसा माना जाता है इस रात्रि में जिनके घरों में उजाला और शांति होती है, उनके ऊपर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है. उनका घर हमेशा धनधान्य से पूर्ण होता है.

व्यापारियों में पुष्य नक्षत्र और धनतेरस से नए बही-खाते लेकर कारोबारी नया साल शुरू करने की परंपरा भी रही है. दीपावली से ही जैन समाज का महावीर निर्वाण संवत भी शुरू होता है.

ये हैं 5 राजयोग: ये 5 राजयोग गजकेसरी, हर्ष, उभयचरी, काहल और दुर्धरा नाम के होंगे. इन राजयोगों का निर्माण शुक्र, बुध, चंद्रमा और गुरु ग्रह स्थितियों के कारण बनेंगे. वैदिक ज्योतिष में गजकेसरी योग को सम्मान और लाभ देने वाला माना जाता है. हर्ष योग धन लाभ, संपत्ति और प्रतिष्ठा बढ़ता है. काहल योग स्थिरता और सफलता देता है. वहीं, उभयचरी योग से आर्थिक संपन्नता बढ़ती है. दुर्धरा योग शांति और शुभता बढ़ाता है.
वहीं कई सालों बाद दीपावली पर दुर्लभ संयोग भी देखने को मिलेगा जब शनि अपनी स्वयं की राशि कुंभ में विराजमान होकर शश महापुरुष राजयोग का निर्माण करेंगे.
12 नवंबर को सुबह रूप चौदस रहेगी. दोपहर 2.45 बजे अमावस्या तिथि लग जाएगी. लक्ष्मी पूजन अमावस्या की रात में ही होता है. इस कारण दीपावली की पूजा 12 नवंबर को ही होगी. पूजा के ज्यादातर मुहूर्त दोपहर 3 बजे से ही रहेंगे. अमावस्या सोमवार को दोपहर 02:57 तक रहेगी, इसलिए अगले दिन सोमवार को सोमवती अमावस्या भी मनाई जाएगी. अमावस्या का स्नान दान वगैरह सोमवार को ही होगा.

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