(भाग:337)भोजन ग्रहण करने के पूर्व एवं पश्चात स्मरण करना चाहिए निम्नमंत्र
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट
भारतीय वैदिक सनातन धर्म परंपरा के अनुसार भोजन करने से पहले और बाद के कुछ नियमों के बारे में बताया गया है. प्राचीन काल में लोग भोजन करने से पहले और बाद इन नियमों का पालन किया करते थे. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास सही समय पर खाना खाने का भी वक्त नहीं होता. लोग हड़बड़ी में भोजन करते हैं या फिर खाते समय उनका ध्यान मोबाइल और टीवी जैसी चीजों पर भटका रहता है. घर के बड़े-बुजुर्ग भी अक्सर इन कार्यों के लिए टोका करते हैं. शास्त्रों में भी इस बात का जिक्र किया गया है कि अन्न में मां अन्नपूर्णा का वास होता है. इसलिए भोजन करने से पहले मां अन्नपूर्णा को प्रणाम करना चाहिए. ऐसा करने से हम उनके प्रति सम्मान प्रकट करते हैं. इसलिए भोजन करने के पहले और बाद मंत्र जरूर बोलना चाहिए. इससे मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं और साथ ही भोजन स्वास्थ्य के लिए हितकर भी होता है. दिल्ली के आचार्य गुरमीत सिंह जी से जानते हैं भोजन के पूर्व बोले जाने वाला मंत्र:-
*अन्नम् ब्रह्म रसो विष्णु भोक्ता देवो महेश्वर:एवं ध्यात्वा तथा ज्ञात्वा अन्न दोषो न लिप्यते।।*
और भोजन पश्चात बोले जाने वाले मंत्र निम्न है:-
*ॐ सह नाववतु, सह नौ भुनक्तु, सह वीर्यं करवावहै ।तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकर प्राण वल्लभे।ज्ञान वैराग्य सिद्धयर्थ भिखां देहि च पार्वति।।ब्रह्मार्पणं ब्रह्महविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् ।ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्म समाधिना ।।*
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भोजन ने के बाद बोलें ये मंत्रअगस्त्यम कुम्भकर्णम च शनिं च बडवानलनम।भोजनं परिपाकारथ स्मरेत भीमं च पंचमं ।।अन्नाद् भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसंभवः।यज्ञाद भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्म समुद् भवः।।
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इन मंत्रों के अलावा आप भोजन करने से पहले गायत्री मंत्र, ओम नमः शिवाय या किसी भी सामान्य मंत्र को बोलकर भोजन कर सकते हैं. यदि आप कोई भी मंत्र बोलने में असमर्थ हैं तो भोजन करने से पहले अपने गुरु या फिर इष्ट देवता का स्मरण करने के बाद ही भोजन शुरू करें. ऐसा करने से देवी-देवता की कृपा बनी रहती है
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