वर्धा जिले में घटिया निर्माण से फटने लगी PWD की सडकें
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट
वर्धा। सार्वजनिक लोकनिर्माण विभाग की अदूरदर्शिता के चलते वर्धा जिले के 7 तहसीलों के बडी जनसंख्या वाले करीबन 70 से 80 गावों पंहुच मार्गों के खस्ता हाल हैं. जिला वर्धा के सेलू, देवली, हिंगणघाट, आर्वी, अष्टी, कारंजा, समुद्रपुर इत्यादि 7 तहसील ग्रामीण गांव पंहुच मार्गों के निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं और गोलमाल घोटाला होने की खबर है.
प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो वर्धा से आर्वी से आष्टी मार्ग , देवली से हिंगणघाट मार्ग और करंजा से समुद्रपुर और सेलू के अनेक गांव के आंतरिक सीमेंट कांक्रीट मार्ग मे जगह-जगह सडकें फट रही यानी दरारें पडती नजर आ रही है, वर्धा ज़िले में 1361 गांव और 6 कस्बे हैं. बताते हैं कि सरकारी इमारतों के रखरखाव के नाम पर लाखों रुपए पानी की तरह फूंक दिए और मरम्मत कार्य ढंग का नहीं हो रहा है सरकारी इमारते की दीवार क्रेक हो रही हैं.सार्वजनिक बांधकाम विभाग के कार्यपालक अभियंता कार्यालय की तरफ मंजूर ई- निविदा नियम और शर्तों को ताक पर रखकर सडकों का घटिया निर्माण कार्य किया जा रहा है.बताते हैं कि सडक निर्माण के ये ठेके स्थानीय छुटभैये नेताओं को महिनों की बंधी बंधाई रिश्वत स्वरुप चंदा देने के लिए ठेका वितरण किया है.
बताते हैं कि सीमेंट कांक्रीट रोड निर्माण मे घटिया स्तर की क्रेकनुमा गिट्टी और महीन मिट्टी मिश्रित पाखन रेती का उपयोग किया जा रहा है. नतीजतन रोड बनते ही सडक में दरारें पड रही हैं. बताते हैं कि सडकों के दोनो किनारों मे डांबरीकरण की मोटाई 3 इंची दिखाया गया है और सडक के मध्य भागों मे एक इंच मोटाई देखा जा सकता है. सीमेंट मास कांक्रीट मे सीमेंट कम और रेती की मात्रा कम होने से कुछ समय के बाद सीमेंट कांक्रीट से निर्मित सडकें फटने लगी हैं?कुल मिलाकर सडक निर्माता ठेकेदारों और अधिकारियों की सांठगांठ कमीशन खोरी के चलते घटिया निर्माण कार्य हो रहा है.
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