अपने देवतुल्य पिता से झूठ छल कपटपूर्ण कार्य करवाना बडा महापाप
टेकचंद्र शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट,9822550220
गरुड़ पुराण के अनुसार,अपने देवतुल्य पिता द्वारा कराए गए झूठ छल कपटपूर्ण गलत कर्मों का फल उसे स्वयं ही भोगना पड़ता है और उसका असर उसकी आने वाली पीढ़ियों, यानी बच्चों को भी भुगतना पड़ सकता है। इस पुराण में कर्मफल का सिद्धांत बहुत महत्वपूर्ण है, जिसके अनुसार व्यक्ति अपने कर्मों के हिसाब से ही जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म के चक्र से गुजरता है।
गरुड़ पुराण के अनुसार, पिता के बुरे कर्मों का जो फल संतान को मिलता है, उसे ‘पितृ दोष’ के रूप में जाना जाता है। इस दोष के कुछ परिणाम निम्नलिखित हैं. संतान को जीवन भर कई तरह की परेशानियों और कष्टों का सामना करना पड़ सकता है। बुरे कर्मों से उत्पन्न शारीरिक या मानसिक बीमारियाँ संतान में देखी जा सकती हैं। पितृ दोष के कारण विवाह में कई तरह की रुकावटें आ सकती हैं कारोबार .में लगातार घाटा झेलना पड़ सकता है। परिवार में अचानक दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ सकती है। पितृ दोष के कारण संतान प्राप्ति में भी रुकावटें आती हैं।
पितृ दोष से मुक्ति के उपाय
गरुड़ पुराण में पितृ दोष से मुक्ति के लिए कुछ उपाय भी बताए गए हैं. पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। पितृ दोष के निवारण के लिए अन्न, धन और वस्त्र का दान करना भी प्रभावी माना जाता है. प्रतिदिन ‘पितृ स्तोत्र’ का जप करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हर गुरुवार पीपल के पेड़ में जल चढ़ाने और परिक्रमा करने से राहत मिल सकती है।
धर्म शास्त्रों के अनुसार अपने देव तुल्य जन्म दाता पिताश्री के हाथों झूठ छल कपट पूर्व पापकर्म करवाना सबसे बडा महापाप और पाखंड माना गया है.
*पिता सर्व भूतानाम् अर्थात:-*
पिता ही धर्म है पिता ही परम् तप है पिता ही स्वर्ग है. पिता के प्रशन्न होने पर सभी देवता प्रसन्न होते हैं.
जो अपने पिता द्वारा झूठ, छल कपट के कार्य करवाने के लिए विबस करता है उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जो उसके वारिसदार उत्तराधिकारियों के भविष्य में नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं.
वेदों में पिता को एक देवता के तुल्य माना गया है, जो जीवनदाता रक्षक और पालक कहा जाता हैं। पिता को साक्षात् देवता के समान माना जाता है, जिनकी सेवा और आदर करने से संतान यश,कीर्ती सुख और सामर्थ्य प्राप्त होता है। वे न केवल जीवन देते हैं बल्कि संतान भाग्यशाली होती है. चुंकि पिता शिक्षा और संस्कार देते हैं, और हर कष्ट से बचाते हैं। पिता को जन्मदाता और रक्षक माना गया है। जिस तरह प्राकृति परमात्मा जीवन देती हैं, उसी तरह पिता भी अपनी संतान को जन्म कर्म और संस्कार देते हैं और उसने धर्मग्रंथ की रक्षा करते हैं।
पिता संतान के पालन-पोषण हार है. पिता अपनी संतान के लिए अनवरत श्रम करते हैं और उसे शिक्षित और संस्कारवान बनाते हैं। वे संतान को सुखी और सुरक्षित जीवन जीने के लिए तैयार करते हैं। पिता अपने बच्चों को कष्टों से दूर करते और बचाने के लिए स्वयं कष्ट सहते हैं। वे एक पेड़ की तरह छाया प्रदान करते हैं, जो सभी कष्टों को सहता है।
पिता संतान के लिए धर्म, ज्ञान और संस्कृति का संचार करते हैं। उनके मार्गदर्शन में संतान धर्म के मार्ग पर चलती है।
पिता को “भयत्राता” यानी भय से बचाने वाला माना गया है। वे हर मुश्किल से संतान की रक्षा करते हैं और अपने बच्चों की खुशी के लिए सब कुछ कुर्बान कर देते हैं।
बच्चों और परिवार पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभाव
विश्वास की कमी महसूस होती है.जब बच्चे अपने पिता को झूठ बोलते या धोखा देते हुए देखते हैं, तो उनका उन पर से विश्वास उठ जाता है। यह भरोसे की कमी उनके भविष्य के रिश्तों को भी प्रभावित कर सकती है. एक पिता के उत्तराधिकारियों में धोखा में असुरक्षा की भावना पैदा कर सकता है। वे यह सोचने लगते हैं कि जब उनका अपना पिता ही अविश्वसनीय रहै, तो वे दुनिया में किसी और पर कैसे भरोसा कर सकते हैं।
पिता के विश्वासघात का असर बच्चों के आत्म-सम्मान पर भी पड़ता है। वे खुद को दोषी मानने लगते हैं या यह सोचने लगते हैं कि वे इतने अच्छे नहीं थे कि उनके पिता ऐसा न करते।
बच्चों में भावनात्मक कष्ट, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। उन्हें अपने पिता के धोखे के कारण भ्रम, गुस्सा और अकेलापन महसूस हो सकता है। बच्चे अपने माता-पिता को झूठ बोलते हुए देखकर खुद भी झूठ बोलना सीख सकते हैं। बड़े होने पर वे धोखेबाज़ या सअविश्वसनीय बन सकते हैं, या फिर वे खुद धोखे का शिकार भी हो सकते हैं।
एक पिता के झूठ और कपट के कारण परिवार के भीतर रिश्ते टूट सकते हैं। बच्चों और माँ के बीच, या भाई-बहनों के बीच भी तनाव और मतभेद पैदा हो सकते हैं।
पिता को मिलने वाले परिणाम
सामाजिक प्रतिष्ठा की हानि: झूठ और छल से व्यक्ति के सम्मान को गंभीर ठेस पहुँचती है। समाज में लोग उसे अविश्वसनीय मानते हैं, जिससे उसका सम्मान और प्रभाव कम हो जाता है। पिता द्धारा लगातार झूठ बोलने और छछल-कपट करने से व्यक्ति का अपना नैतिक पतन होता है। वह अपने ही जाल में फंसकर बाहरी हँसी के पीछे घुटन और डर में जीता है।
भले ही धोखे से कुछ क्षणिक लाभ मिल जाए, लेकिन झूठ और बेईमानी से अर्जित धन या पद मन को कभी सुख नहीं देते। व्यक्ति को अंदर से हमेशा बेचैनी महसूस होती है।
एक बार विश्वास टूट जाने के बाद उसे वापस पाना बहुत मुश्किल होता है। पिता अपने परिवार से, खासकर बच्चों से भावनात्मक रूप से दूर हो जाते हैं, जिससे उन्हें अकेलापन महसूस होता है।
यदि पिता के झूठ और छल-कपट में कानूनी अपराध शामिल है, जैसे कि अदालत में झूठ बोलना, तो उसे जुर्माना या कारावास भी हो सकता है।
निष्कर्ष:-
कुल मिलाकर, एक पिता का झूठ और छल उसके और उसके परिवार दोनों के लिए भविष्य के लिए एक विनाशकारी कार्य है। यह न केवल उसके बच्चों के भविष्य और रिश्तों को प्रभावित करता है, बल्कि उसकी अपनी प्रतिष्ठा और आंतरिक शांति को भी नष्ट कर देता है। सत्य के मार्ग पर चलना ही परिवार और स्वयं दोनों के लिए सबसे उत्तम और स्थायी मार्ग है।
सहर्ष सूचनार्थ नोट्स:-
उपरोक्त लेेख समाचार सामान्य ज्ञान के लिए गरुण पुराण और धर्मशास्त्रों पर अधारित है.यह केवल मानव के उज्जवल भविष्य के लिए किए गए पाप ताप से मुक्ति दिलाने और अपने देवतुल्य पिता के साथ पापकर्म ना करवाने के लिए सतर्क रहने के लिए है.अधिक जानकारी के लिए आप गरुण पुराण और अन्य धर्मशास्त्र विशेषज्ञों से परामर्श आवश्यक है.
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