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चुगलखोरी कानाफूसी और ब्रेनवाश करने में निपुण होते हैं नाई-कसाई पुत्र 

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चुगलखोरी कानाफूसी और ब्रेनवाश करने में निपुण होते हैं नाई-कसाई पुत्र

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टेकचंद्र शास्त्री:सह-संपादक 9822550220

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नई दिल्ली। चाणक्य नीति और मनोविज्ञान के अनुसार कच्चे कान के राजे महाराजाओं और अधिकारियों को असलियत से गुमराह करके मन परिवर्तन मे माहिर होते है नाई और कसाई पुत्र की कहावत चरितार्थ हो रही है.हमारे देश की राजनीति में

मे बहुतायत मे नाई-कसाई के गुणधर्म चरित्र स्वभाव और आचरणवाले राजनेता मंत्री और चापलूसखोर व्यापारी बहुतायत मे मौजूद हैं.

मानव जगत मे जन्मे विख्यात मनोविज्ञान और नीतिशास्त्र विशेषज्ञ ऋषि चाणक्य के मुताबिक जो राजा मंत्री य साधारण विद्धान व्यक्ति अपने स्वार्थ बस सरासर ईर्श्या जलनखोरी चोरी चुगलखोरी झूठ छल कपट विश्वासघात,धाखाधडी बेईमानी और भ्रष्टाचार मे लिप्त हो उसे नाई और कसाई की संतान समझना चाहिए.एक निरंकुश राजकुमार की पत्नी की सालों बीत गए संतान नहीं हूई.राजकुमार के पिता और मां को अपनी बहूरानी की स्तान नहीं होने को लेकर अत्यधिक चिंतित रहते थे. राजकुमार की पत्नि की संतान ना होने को लेकर बहुत चिंतित रहते थे.इस अवस्था को देख एक दिन राजा के दरबार मे आये बड़बोले नाई पहलवान (हंजाम) को राजकुमार की पत्नि यानी बहूरानी ने महल के एकांत कमरे में बुलाया और नाई को गोपनीय रुप मे आपबीती बतलाई.बहुरानी ने इस राज को गोपनीय रखने को कहा,राजा की बहू ने इसके लिए नाई को कुछ इनाम बतौर रुपए भी दिए और पहलवान से कहा कि कुछ भी हो मेरे को संतान पैदा करके दीजिए. चुंकि संतान के बाप का नाम मेरे पति राजकुमार का ही होगा ना? आखिर राजघराने का उत्तराधिकारी होना जरुरी है.नाई पहलवान ने बहूरानी को यह नेक काम करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा.और नाई पहलवान बकरामंडी से गुजरते हुए अपने घर जा रहे थे.रास्ते में नाई पहलवान ने देखा कि उनका मित्र बकरा मंडी के मुखिया नाई पहलवान से मुलाकात हूई. उन्होंने अपने मित्र कसाई पहलवान से एकांत मे गुप्तगू हूई. तो कसाई पहलवान ने तांत्रिक का वेष धारण करके बहूरानी को ताकतवर और सुंदर संतान पैदा करने का बचन दे दिया. दूसरे दिन नाई पहलवान ने बहू रानी को एकांत मे सूचना दी कि उसका एक पहलवान मित्र आपसे एक सुंदर और ताकतवर संतान को जन्म देने के लिए तैयार है?तब बहू रानी बहुत प्रशन्न हूई और उस नाई पहलवान और उसके मित्र कसाई पहलवान के लिए बहुत सारा रुपए पैसा उपहार बतौर दिए.

बताते हैं कि निर्धारित तिथी रात के समय कसाई पहलवान तांत्रिक के वेष में राज महल के बहूरानी के कमरे में प्रवेश किया और बहू रानी के साथ रतिक्रिया किया जिससे बहूरानी को गर्भवती हो गई.आठ दिन बाद राजा रानी की बहुरानी मां बनने वाली है कि खबर सुनकर राजदरबार मे उत्साह और खुशियां उमड पडी.9 महिना पश्चात बहूरानी ने एक सुंदर सुडौल राजकुमार को जन्म दिया.राजा रानी बहुत दान धर्म और जनता-जनार्दन को भोजनयान करवाया.

बहूरानी ने अपनी दासी के द्धारा गुप्त रुप से नाई पहलवान और कसाई पहलवान को बहुत सारा सोना चांदी के जेवरात और रुपये पैसे इनाम मे दिया और इस विषय को गोपनीय रखने के लिए कहा. उधर नाई पहलवान और कसाई पहलवान ने बहूरानी की आज्ञा सिरोधार्य करने का बचन दिया.

बताते हैं कि कुछ काल बाद बहूरानी का राजकुमार बडा और जवान हो गया. और उन्होंने पडोसी नगर के मुखिया की योग्यतम सुंदर कन्या से विवाह करवा दिया. बताते हैं कि राजकुमार बडा ही चंचल चपल,हटी,गुप्तगू चुगलखोरी करके बना हुआ काम बिगाडता, कानाफूसी करने, असलियत से गुमराह करके विश्वासघात पैदा करने, चलते फिरते अच्छे महिला-पुरुषों को पटाने,मूर्ख बनाना,बोलना कुछ और करना कुछ, झूठ छल कपट के जरिए अपना उल्लू सीधा करना राजा का,ब्रेनवाश करने, किसी को भी अपना विश्वासपात्र बना लेना, स्वार्थ सिद्ध करने लिए किसी भी हद तक उतर जाना,स्वार्थ सिद्ध होते ही साथ छोड देना, स्वार्थ के लिए “यूज एण्ड थ्रौ” इत्यादि की नीति अपनाने सदैव झूठे अश्वाशन देने,अपने आपको समाज का रहनुमा दिखाने का नाटक करने इत्यादि

धूर्ततापूर्ण व्यवहार करने लगा.राजकुमार की बहू रानी ने इसके लिए कोई बडे मनोविज्ञान ज्योतिषाचार्य को महल मे बुलाया और अपने परिवार की चिराग राजकुमार का भविष्य बताने को कहा. बताते हैं कि राजकुमार का स्वाभाव चरित्र आचरण और कार्यप्रणालियों का अध्ययन करने के बाद मनोवैज्ञानिक ने अपने को चुप रहना बेहतर समझा.तब राजकुमार की मां ने मनोविज्ञान को अपने एकांत कक्ष मे बुलाया, और मनोविज्ञान ज्योतिषाचार्य को मुंह मांगे रुपए पैसे दिए और हकीकत से अवगत कराने को कहा तब उक्त ज्योतिषाचार्य ने बहू रानी को एकांत मे समझाया कि आपका राजकुमार बिल्कुल अपने असली पिता के आचरण पर गया है.भगवान ने चाहा तो सबकुछ ठीक हो जाएगा. राजकुमार की माता रानी पूरी तरह समझ गई कि. नाई – कसाई का बेटा नाई कसाई स्वाभाव, आचरण और चरित्र वाला ही निकलेगा ना? मनोविज्ञान- ज्योतिषाचार्य के अनुसार “पक्षियों मे कौआ और इंसान मे कसाई नौआ” की कहावत चरितार्थ होना स्वाभाविक है.

महर्षि चाण्डक्य के मुताबिक संसार मे जितने भी ऐसे स्वाभाव और आचरण के वाले राजनेता अधिकारी और व्यक्ति होते हैं. उन्हें नाई-कसाई की संतान समझने मे कोई हरकत नहीं है.

 

सहर्ष सूचनार्थ नोट्स:-

उपरोक्त समाचार सामान्य ज्ञान पर अधारित ऋषि चाणक्य नीति और मनोवैज्ञानिक ज्योतिषाचार्य विशेषज्ञों के परामर्श से संकलन किया गया है.अधिक जानकारी के लिए ऐसे स्वाभाव और आचरण वाले व्यक्तियों का डी एनडीए की जांच पड़ताल करवा सकते है.

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