जानिए नर-नारियों के शरीर मे व्याप्त रोग ताप बाधा व्याधि निवारणार्थ मंत्रोचार
टेकचंद्र शास्त्री:
9822550220
भारतीय वैदिक सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार
समस्त रोग-व्याधियों के निवारण के लिए प्रतिदिन ब्रम्ह मुहूर्त मे नींद से उठ जाइये और शौच कुल्ला दातुन कर जल स्नान से शुद्ध और पवित्र होकर पूर्व यं उत्तर दिशा मुंह करके दीप- धूप जलाएं और महामृत्युंजय का मंत्र का जाप और ध्यान करना चाहिए, गायत्री मंत्र और धन्वंतरि मंत्र जैसे कई शक्तिशाली मंत्र हैं।
. महामृत्युंजय मंत्र
मंत्र:
*ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव* *बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥*
यह भगवान शिव को समर्पित है और इसे शिवजी का रोग नाशक मंत्र भी कहा जाता है। गंभीर रोगों के निवारण के लिए इसका जाप विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
2. गायत्री मंत्र
मंत्र:
*ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥*
अमर उजाला के अनुसार, इस मंत्र का प्रतिदिन 5 से 8 माला जाप करने से गंभीर रोगों से राहत मिल सकती है। इसे निष्ठा और नियम के साथ जपना चाहिए।
. धन्वंतरि मंत्र
मंत्र:
*ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवााय धन्वंतरे नमः*
लाभ: यह औषधि के देवता भगवान धन्वंतरि को समर्पित है और सभी प्रकार के रोगों से मुक्ति पाने के लिए इसका जाप किया जाता है।
4. अन्य मंत्र
*श्री अच्युताय नमः, श्री अनन्ताय नमः, श्री गोविन्दाय नमः*
इन नामों का प्रतिदिन जाप करने से रोगों से मुक्ति मिल सकती है।
*ऊँ ऊँ उमा-देविभ्यां नमः* यह उमा मंत्र अच्छे स्वास्थ्य के लिए है।
नोट: मंत्रों के जाप के साथ-साथ डॉक्टरी उपचार लेना भी महत्वपूर्ण है। यह जानकारी धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर
आधारित है
सहर्ष सूचनार्थ नोट्स:-
उपरोक्त लेख वामपंथियों के लिए नहीं? अपितु वैदिक सनातन धर्म शास्त्र पर अधारित हिन्दू धर्मकेउपासकों के लिए है. अधिकतम जानकारी के लिए सनातन धर्म विशेषज्ञ प्रवचनकारों से उचित परामर्श कर सकते है.
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