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राम मंदिर मे ध्वजारोहण पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उठाए सवाल

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राम मंदिर मे ध्वजारोहण पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उठाए सवाल

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टेकचंद्र शास्त्री:

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9822550220

 

वाराणसी।जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ने कहा कि यहां सिर्फ और सिर्फ सब मनमाने तरीके से किया जा रहा है, शास्त्रों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अयोध्या मे मंगलवार को एक भव्य ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संघ प्रमुख मोहन भागवत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सहित कई लोग शिरकत करेंगे. यह भव्य आयोजन ट्रस्ट बड़े ही विशाल रूप में कर रहा है, जिसे लेकर तैयारियां और अनुष्ठान जारी है. वहीं, ध्वजारोहण को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि शास्त्रों में कहीं ध्वजारोहण जैसी चीज मंदिरों के लिए है ही नहीं. ध्वज बदलने की परंपरा है. यहां सिर्फ और सिर्फ सब मनमाने तरीके से किया जा रहा है. शास्त्रों का कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा है.

उन्होंने कहा कि 25 तारीख को ध्वजारोहण का कार्यक्रम हो रहा है. मेरे हिसाब से शास्त्र में ऐसा उल्लेख कहीं नहीं है कि मंदिर पर ध्वजारोहण किया जाए. ध्वजारोहण का कार्यक्रम धार्मिक रूप से कहीं नहीं होता है. मैंने कहीं पढ़ा भी नहीं है. ध्वज बदला जाता है, एक बार जब ध्वज स्थापित होता है. शिखर की प्रतिष्ठा होती है उसके बाद यहां तो शिखर की प्रतिष्ठा हुई ही नहीं. कहा भी न ही कहा जा रहा है कि शिखर की प्रतिष्ठा होगी. मैं जहां भी देख रहा हूं वह यही कह रहे हैं

यह भी बोले शंकराचार्य: उन्होंने कहा कि चंपत राय भी ध्वजारोहण की बात कह रहे हैं. धीरे-धीरे ध्वज ऊपर जाएगा. ध्वजारोहण शब्द शास्त्र में कहीं है ही नहीं, आरोहण का क्या मतलब हुआ, धीरे-धीरे राष्ट्रध्वज ऊपर जाता है, ऐसे कहीं ध्वज मंदिर के ऊपर चढ़ने की परंपरा है ही नहीं.

जगन्नाथ मंदिर का उदाहरण दिया: उन्होंने कहा किसी मंदिर में ध्वजारोहण होता ही नहीं है. भगवान जगन्नाथ जी के मंदिर में प्रतिदिन ध्वज बदला जाता है. एक व्यक्ति ध्वज लेकर ऊपर जाता है और उसे बदलता है उसका आरोहण नहीं होता है. द्वारिका जी में एक दिन में तीन से चार ध्वज बदला जाता है. वहां भी ध्वजारोहण नहीं होता है. ध्वज का बदला जाना तब होगा, जब पहले वहां ध्वज और शिखर की प्रतिष्ठा हो. ऐसी कोई बात कही नहीं जा रही की शिकार की प्रतिष्ठा हो शास्त्र के अनुसार या उचित नहीं है.

उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम में हमारे भाग लेने का कोई तात्पर्य ही नहीं है. अयोध्या के ट्रस्ट का मन कुछ भी शास्त्र अनुसार करने का नहीं दिखाई पड़ रहा है. उनका कहना है कि इस पूरे आयोजन में शंकराचार्य को बुलाया ही नहीं गया है. मैंने तो शास्त्रों में ऐसा उल्लेख पढ़ा ही नहीं है, जो वहां होने जा रहा है. वहां पर सब कुछ मनमाना किया जा रहा है

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