डोंगरगढ़-खैरागढ रोड की झाडियों के पास मिली मृत तेंदुए की लाश
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:
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डोंगरगढ़। डोंगरगढ़ और खैरागढ़ के बीच स्थित वन क्षेत्र में शुक्रवार को गुप्त सूचना के अधार पर एक बार फिर तेंदुए की मौत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं. ताजा मामला डोंगरगढ़ वन परिक्षेत्र अंतर्गत रानीगंज क्षेत्र का है, जहां एक तेंदुआ मृत अवस्था में मिला. यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि बीते कुछ समय से इसी वन क्षेत्र में लगातार तेंदुओं की मौत की घटनाएं सामने आ रही हैं, इसके बावजूद वन विभाग का रवैया ढुलमुल और गैर-जिम्मेदाराना नजर आ रहा है.
वन विभाग के अनुसार मृत तेंदुए का डॉक्टरों की टीम से पोस्टमार्टम कराया गया और बाद में दाह संस्कार की प्रक्रिया भी पूरी कर दी गई. विभागीय दावा है कि तेंदुए को इंटरनल इंज्यूरी थी और उसकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है. इस संबंध में जिला वन मंडल अधिकारी (डीएफओ) आयुष जैन ने भी इसे प्राकृतिक मृत्यु बताया है. लेकिन जिस तरह से पोस्टमार्टम और दाह संस्कार की कार्रवाई बिना व्यापक जानकारी सार्वजनिक किए की गई, उसने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है.
तत्संबंध में गोपनीय सूत्रों के मुताबिक आये दिन शिकारियों द्धारा वन्य प्राणी विचरण परिसर मे मांस मे धीमा जहर युक्त बेहोसी की दबा रख दिया जाता है. जिसे खाकर कुछ ही घन्टों मे जंगली जानवर की मौत हो जाती है.बताते हैं कि शिकारी लोग शेर के चमड़ा के नाम पर अमीरजादों को बेच दिया जाता है.उसी प्रकार मृत तेंदुए की नाखून भी बाघ के नाखून के नाम पर बिक जाता है.बताते हैं कि इस प्रकरण में वन परिक्षेत्र अधिकारियों की सांठ-गांठ बताया जा रहा है.परंतु घटनास्थल से कुछ दूरी पर स्थित रोड पर वाहन की आवा-जाही की आबाज की वजह से शिकारी उक्त तेंदुए को ले जाने मे असफल रहे होंगे.गोपनीय सूत्र बतलाते है की तेंदुए का शव बिच्छदन मे कार्यरत कर्मि शराब के नशे मे पोस्टमार्टम करते हैं.इसलिए सत्यता पूर्व जांच-पड़ताल और रिपोर्ट मे वे असफल रह गए होंगे?
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