विदर्भ से लगभग 70, हजार श्रद्धालू गंगासागर मे डुबकी लगाने रवाना
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:
9822550220
नागपुर।विदर्भ संभाग से लगभग 70 हजार श्रद्धालु मकर संक्रांति पर्व पर डुबकी लगाने के लिए गंगासागर के लिए रवाना हो रहे हैं। यह विशेष यात्रा 14 से 20 जनवरी तक शुरु रहने वाली है. जिसके लिए गंगासागर मेला 2026 चल रहा है। कोराडी नागपुर से अखिल भारतीय मानव धर्म आत्मानुशासन सेवा मंडल,आल इंडिया सोशल आर्गनाइजेशन, राष्ट्रीय जननेता मंच, नागरिक अधिकार सुरक्षा समिति, अखिल भारतीय समाज सेवी संस्था और भ्रष्टाचार जन आंदोलन समिती के पदाधिकारी और सदस्य कार्यकरता श्रद्धालूगण कोलकाता भागीरथ गंगा तट पर स्थित बाबूघाट पर अनेकानेक शिबीरों नागपुर संभाग से लगभग 70 हजार श्रद्धालूगण गंगासागर स्नान के लिए रवाना
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:
9822550220
नागपुर संभाग से लगभग 70 हजार श्रद्धालु गंगासागर के लिए रवाना हो रहे हैं। यह यात्रा विशेष रूप से मकर संक्रांति के अवसर पर हो रही है, जिसके लिए गंगासागर मेला 2026 चल रहा है। कोराडी नागपुर से अखिल भारतीय मानव धर्म आत्मानुशासन सेवा मंडल,आल इंडिया सोशल आर्गनाइजेशन, राष्ट्रीय जननेता मंच और नागरिक अधिकार सुरक्षा समिति और राष्ट्रीय पर्यावरण समन्वय समिति के पदाधिकारी सदस्य कार्यकरता श्रद्धालूगण कोलकाता भागीरथ गंगा तट पर स्थित बाबूघाट पर अस्थाई शिबीर पर विश्राम और सुरुचिपूर्ण भोजन महा प्रसाद ग्रहण करेंगे.और विश्राम करेंगे. तत्पश्चात सुबह सियालदाह रेलवे स्टेशन से गंगासागर तट पर स्थित कागदीप स्टेशन मे उतरेंगे. और कागदीप से जल मार्ग से जहाजरानी मे सवार होकर गंगासागर कपिल मुनि मंदिर आश्रम समीप गंगासागर मे डुबकी लगाएंगे.वहां पर भी विश्राम और सुरुचिपूर्ण भोजन महाप्रसाद की व्यवस्था की गई है. पश्चात समस्त श्रद्धालूगण वापस कागदीप से रेलवे द्धारा सियालदाह और बाबूघाट स्थित अग्रहरि शिबीर, उत्तरभारतीय शिबीर,और पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से जगह-जगह सुलभ शौचालय संसाधन, स्नानघर और भोजन महाप्रसाद वितरण शिबीर मे सुरुचिपूर्ण भोजन प्रसाद ग्रहण करेंगे.आयोजन का समय के संबंध मे बताते हैं कि गंगासागर मेला 8 जनवरी से 20 जनवरी, 2026 तक आयोजित हो रहा है, जिसमें 14-15 जनवरी, 2026 को मुख्य स्नान का दिन है।
श्रद्धालुओं की संख्या के वारे में बता दे कि इस साल 2026 के मेले में कुल 2. करोड़ के लगभग श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।
गंगासागर मेले की व्यवस्थाएँ के संबंध मे बतादें कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं, जिनमें 1200 से भी अधिक सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से निगरानी शामिल होते रहेगी।
नागपुर विदर्भ के अलावा, देशभर के अन्य हिस्सों से भी लाखों-करोडों श्रद्धालुगण इस पवित्र गंगासागर मे भागीरथ गंगा सहित सैकडों नदियों का महासंगम में डुबकी लगाने के लिए पहुँच रहे हैं, जिसे कुंभ मेले के बाद सनातन धर्म के हिंदुओं का दूसरा सबसे बड़ा मेला माना जाता है
गंगासागर में डुबकी का बहुत गहरा आध्यात्मिक महत्व है, खासकर मकर संक्रांति के दिन, जहाँ यह माना जाता है कि इससे सभी प्रकार की नास्तिक सूतक पातक व्याधिदोष धुल जाते हैं,समस्त पितरों को मुक्ति मिलती है,और गंगासागर मे स्नान से 10 अश्वमेघ यज्ञ जितना पुण्य मिलता है, जिससे सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है;गंगासागर का संबंध राजा सगर के 60,000 पुत्रों को श्राप मुक्ति दिलाने से जुड़ा है और इसे ‘महातीर्थ’ कहा जाता है। गंगासागर मु डुबकी के बारे मे इसका महत्व के मुख्य बिंदु के संबंध मे बता दें कि पाप-ताप मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति की मान्यता है कि गंगासागर में डुबकी लगाने से सभी जन्मों के पाप धुल जाते हैं और आत्मा को मोक्ष (परम शांति) मिलता है। यह स्थान पितरों (पूर्वजों) को श्राप से मुक्ति दिलाने और उनका उद्धार करने के लिए जाना जाता है, विशेषकर मकर संक्रांति पर यहाँ जल अर्पित किया जाता है।
अश्वमेघ यज्ञ का पुण्य: यहाँ स्नान करने से 10 अश्वमेघ यज्ञ और हजार गायों के दान के बराबर पुण्य मिलता है।
मकर संक्रांति का विशेष दिन: सूर्य के धनु से मकर राशि में प्रवेश करने के कारण मकर संक्रांति पर स्नान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
पौराणिक कथा: त्रेता युग में माता गंगा ने राजा सगर के 60,000 पुत्रों को इसी स्थान पर मुक्ति दिलाई थी।
कपिल मुनि का आश्रम: स्नान के बाद श्रद्धालु कपिल मुनि के मंदिर के दर्शन करते हैं, जहाँ गंगा, कपिल मुनि और भागीरथ की मूर्तियां हैं।
अद्वितीय तीर्थ: ‘सारे तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार’ कहावत इस स्थान के अद्वितीय महत्व को दर्शाती है। जानिए श्रद्धालूगण कैसे करते हैं स्नान दान करते हैं और पुण्य प्राप्त करते हैं. देश को कोने कोने से आने वाले
लोग श्रद्धापूर्वक गंगासागर संगम मे डुबकी लगाते हैं और सूर्यदेव को अर्घ्य देते हैं।
नारियल और पूजा सामग्री समुद्र को अर्पित की जाती है।
स्नान के बाद कपिल मुनि के मंदिर में पूजा की जाती है।
2026 में गंगासागर में डुबकी का महत्व वही है जो हर साल होता है: मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर,भागीरथ गंगा नदी और बंगाल की खाड़ी के संगम पर पवित्र स्नान करके पापों का नाश करना और मोक्ष प्राप्त करना, कपिल मुनि मंदिर के दर्शन करना और आध्यात्मिक शांति पाना, जो कि भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। यह डुबकी देवताओं के दिन की शुरुआत, भागीरथ मुनि और मां गंगा के मिलन का प्रतीक है, जिससे श्रद्धालुओं को सौ अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल मिलने की मान्यता है और इस साल मेले को पर्यावरण के अनुकूल (ग्रीन मेला) बनाने पर विशेष जोर है, जिसमें सौर ऊर्जा और प्लास्टिक-मुक्त पहल शामिल हैं।
महत्व और मान्यताएँ के संबंधमे बता दें कि गंगाजल स्नान से पाप-मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति संभव है यह माना जाता है कि मकर संक्रांति (14-15 से 20 जनवरी, 2026) के दौरान इस संगम में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष (निर्वाण) की प्राप्ति होती है।
कपिल मुनि का आशीर्वाद: स्नान के बाद कपिल मुनि मंदिर में पूजा करने से आध्यात्मिक शांति और आशीर्वाद मिलता है, जो इस यात्रा का एक अभिन्न अंग है।
भागीरथ और गंगा का मिलन: यह दिन उस पौराणिक कथा से जुड़ा है जब मां गंगा धरती पर अवतरित होकर सागर से मिली थीं।
“सब तीर्थ बार बार, गंगासागर एक बार”: यह कहावत इस यात्रा के अद्वितीय महत्व को दर्शाती है, जहां भक्त जीवन में कम से कम एक बार इस पवित्र डुबकी के लिए आते हैं।
2026 के विशेष पहलू:
“ग्रीन मेला”: इस बार पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें सौर ऊर्जा से चलने वाली स्ट्रीट लाइट और बायोडिग्रेडेबल बैग का उपयोग शामिल है, ताकि यह एक इको-फ्रेंडली कार्यक्रम बन सके।
तकनीकी व्यवस्था के संबंध मे बता दें कि तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए कई कैमरे और स्वच्छता की व्यवस्था की जा रही है, और “होली ईटर” पहल के माध्यम से घर पर गंगाजल और प्रसाद पहुंचाने की व्यवस्था भी है।
संक्षेप में, 2026 में गंगासागर की डुबकी आस्था, परंपरा और आधुनिक पर्यावरण -चेतना का एक अनूठा संगम होगी, जिससे लाखों भक्तों को आध्यात्मिक लाभ मिलेगा विश्राम और सुरुचिपूर्ण भोजन महा प्रसाद ग्रहण करेंगे.और विश्राम करेंगे. तत्पश्चात सुबह सियालदाह रेलवे स्टेशन से गंगासागर तट पर स्थित कागदीप स्टेशन मे उतरेंगे. और कागदीप से जल मार्ग से जहाज पर सवार होकर गंगासागर कपिल मुनि मंदिर आश्रम समीप गंगासागर मे डुबकी लगाएंगे.वहां पर भी विश्राम और सुरुचिपूर्ण भोजन महाप्रसाद की व्यवस्था की गई है. पश्चात समस्त श्रद्धालूगण वापस कागदीप से रेलवे द्धारा सियालदाह और बाबूघाट स्थित अग्रहरि शिबीर विश्राम और भोजन महाप्रसाद ग्रहण करेंगे.
आयोजन का समय के संबंध मे बताते हैं कि गंगासागर मेला 8 जनवरी से 20 जनवरी, 2026 तक आयोजित हो रहा है, जिसमें 14-15 जनवरी, 2026 को मुख्य स्नान का दिन है।
श्रद्धालुओं की संख्या के वारे में बता दे कि इस साल 2026 के मेले में कुल 2. करोड़ के लगभग श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।
गंगासागर मेले की व्यवस्थाएँ के संबंध मे बतादें कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं, जिनमें 1200 से भी अधिक सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से निगरानी शामिल होते रहेगी।
नागपुर विदर्भ के अलावा, देशभर के अन्य हिस्सों से भी लाखों-करोडों श्रद्धालुगण इस पवित्र गंगासागर मे भागीरथ गंगा सहित सैकडों नदियों का महासंगम में डुबकी लगाने के लिए पहुँच रहे हैं, जिसे कुंभ मेले के बाद सनातन धर्म के हिंदुओं का दूसरा सबसे बड़ा मेला माना जाता है
गंगासागर में डुबकी का बहुत गहरा आध्यात्मिक महत्व है, खासकर मकर संक्रांति के दिन, जहाँ यह माना जाता है कि इससे सभी प्रकार की नास्तिक सूतक पातक व्याधिदोष धुल जाते हैं,समस्त पितरों को मुक्ति मिलती है,और गंगासागर मे स्नान से 10 अश्वमेघ यज्ञ जितना पुण्य मिलता है, जिससे सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है;गंगासागर का संबंध राजा सगर के 60,000 पुत्रों को श्राप मुक्ति दिलाने से जुड़ा है और इसे ‘महातीर्थ’ कहा जाता है। गंगासागर मु डुबकी के बारे मे इसका महत्व के मुख्य बिंदु के संबंध मे बता दें कि पाप-ताप मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति की मान्यता है कि गंगासागर में डुबकी लगाने से सभी जन्मों के पाप धुल जाते हैं और आत्मा को मोक्ष (परम शांति) मिलता है। यह स्थान पितरों (पूर्वजों) को श्राप से मुक्ति दिलाने और उनका उद्धार करने के लिए जाना जाता है, विशेषकर मकर संक्रांति पर यहाँ जल अर्पित किया जाता है।
अश्वमेघ यज्ञ का पुण्य: यहाँ स्नान करने से 10 अश्वमेघ यज्ञ और हजार गायों के दान के बराबर पुण्य मिलता है।
मकर संक्रांति का विशेष दिन: सूर्य के धनु से मकर राशि में प्रवेश करने के कारण मकर संक्रांति पर स्नान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
पौराणिक कथा: त्रेता युग में माता गंगा ने राजा सगर के 60,000 पुत्रों को इसी स्थान पर मुक्ति दिलाई थी।
कपिल मुनि का आश्रम: स्नान के बाद श्रद्धालु कपिल मुनि के मंदिर के दर्शन करते हैं, जहाँ गंगा, कपिल मुनि और भागीरथ की मूर्तियां हैं।
अद्वितीय तीर्थ: ‘सारे तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार’ कहावत इस स्थान के अद्वितीय महत्व को दर्शाती है।
कैसे करते हैं स्नान:
लोग श्रद्धापूर्वक डुबकी लगाते हैं और सूर्यदेव को अर्घ्य देते हैं।
नारियल और पूजा सामग्री समुद्र को अर्पित की जाती है।
स्नान के बाद कपिल मुनि के मंदिर में पूजा की जाती है।
2026 में गंगासागर में डुबकी का महत्व वही है जो हर साल होता है: मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर,भागीरथ गंगा नदी और बंगाल की खाड़ी के संगम पर पवित्र स्नान करके पापों का नाश करना और मोक्ष प्राप्त करना, कपिल मुनि मंदिर के दर्शन करना और आध्यात्मिक शांति पाना, जो कि भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। यह डुबकी देवताओं के दिन की शुरुआत, भागीरथ मुनि और मां गंगा के मिलन का प्रतीक है, जिससे श्रद्धालुओं को सौ अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल मिलने की मान्यता है और इस साल मेले को पर्यावरण के अनुकूल (ग्रीन मेला) बनाने पर विशेष जोर है, जिसमें सौर ऊर्जा और प्लास्टिक-मुक्त पहल शामिल हैं।
महत्व और मान्यताएँ के संबंधमे बता दें कि गंगाजल स्नान से पाप-मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति संभव है यह माना जाता है कि मकर संक्रांति (14-15 से 20 जनवरी, 2026) के दौरान इस संगम में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष (निर्वाण) की प्राप्ति होती है।
कपिल मुनि का आशीर्वाद: स्नान के बाद कपिल मुनि मंदिर में पूजा करने से आध्यात्मिक शांति और आशीर्वाद मिलता है, जो इस यात्रा का एक अभिन्न अंग है।
भागीरथ और गंगा का मिलन: यह दिन उस पौराणिक कथा से जुड़ा है जब मां गंगा धरती पर अवतरित होकर सागर से मिली थीं।
“सब तीर्थ बार बार, गंगासागर एक बार”: यह कहावत इस यात्रा के अद्वितीय महत्व को दर्शाती है, जहां भक्त जीवन में कम से कम एक बार इस पवित्र डुबकी के लिए आते हैं।
2026 के विशेष पहलू:
“ग्रीन मेला”: इस बार पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें सौर ऊर्जा से चलने वाली स्ट्रीट लाइट और बायोडिग्रेडेबल बैग का उपयोग शामिल है, ताकि यह एक इको-फ्रेंडली कार्यक्रम बन सके।
तकनीकी व्यवस्था: तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए कई कैमरे और स्वच्छता की व्यवस्था की जा रही है, और “होली ईटर” पहल के माध्यम से घर पर गंगाजल और प्रसाद पहुंचाने की व्यवस्था भी है।
संक्षेप में, 2026 में गंगासागर की डुबकी आस्था, परंपरा और आधुनिक पर्यावरण-चेतना का एक अनूठा संगम होगी, जिससे लाखों भक्तों को आध्यात्मिक लाभ मिलेगा
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