भगवान शिव का उग्र रुप और अपने भक्तों के प्राण रक्षक हैं कालभैरव
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:
9822550220
भैरवगढ। उज्जैन के भैरव गढ मे विराजमान कालों के महाकाल है कालभैरव, भगवान शिव का उग्र और रक्षक रूप हैं, जिन्हें शत्रुओं की नकारात्मकता और गुप्त बाधाओं का नाशक माना जाता है। वे “काल” (समय) के स्वामी हैं और दंडपाणि (दंड देने वाले) के रूप में शत्रुओं की चाल को उल्टा पलट देते हैं।
गुप्त शत्रुओं के करतूत को उल्टा पलटने में कालभैरव की भूमिका के मुख्य रही है.
उल्टी चाल का सिद्धांत (Reverse Karma): जब कोई दुष्ट राजे महाराजे बेदाग-निहत्थे, निर्दोष और निरपराध भक्त पर गुप्त रुप से या खुलेआम अन्याय अत्याचार और अभिचार करता है या नुकसान पहुँचाने का प्रयास करता है, तो कालभैरव की पूजा (जैसे कालभैरव अष्टक, कवच, या मदार के दीये का प्रयोग) के प्रभाव से वह नकारात्मक ऊर्जा उसी दुश्मन पर वापस लौट जाती है।उल्टी दुश्मन पर ही पलट जाती है. कालभैरव गुप्त शत्रुओं का पर्दाफाश कर देता है.भगवान कालभैरव अपनी दिव्य दृष्टि से छुपे हुए दुश्मनों को पहचानते हैं और उनकी नकारात्मक करतूतों का अंत करते हैं, चाहे वे सामने न आकर पीठ पीछे ही क्यों न वार कर रहे हों। कालभैरव के सामने शत्रुओं का कोई भी षड्यंत्र उल्टा पलट देता है.कालभैरव अपने निहत्थे और निर्दोष भक्तों की सदैव सुरक्षा करते हैं. भगवान कालभैरव अपने शत्रुओं के हर षड्यंत्र को उल्टा पलटने की शक्ति मिलती है। शत्रुओं की कोई भी चाल काम नहीं करती, और जातक को सुरक्षा प्रदान की जाती है। भगवान कालभैरव न्याय के देवता अर्थात कालभैरव तीर्थों के ‘कोतवाल’ (Varanasi’s guardian) माने जाते हैं, जो धर्म की रक्षा करते हैं और गलत कार्य करने वालों को दंडित करते हैं.और अपने सच्चे सत्यवादी भक्त परिवार की रक्षा करते हैं.
सहर्ष सूचनार्थ नोट्स:-
उपरोक्त समाचार सामान्य ज्ञान पर अधारित है.सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार यह जानकारी कालों के काल कालभैरव के सच्चे सत्यवादी और निष्ठावान भक्तों के लिए है. अधिक जानकारी के लिए कालभैरव देवस्थानम के महंत और कोतवाल से परामर्श कर सकते हैं.
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