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MSCB घोटाले में क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार :अजित पवार को क्लीन चिट

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MSCB घोटाले में क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार :अजित पवार को क्लीन चिट

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:

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9822550220

 

मुंबई की एक कोर्ट ने महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक में 25,000 करोड़ रुपये के कथित स्कैम से जुड़े एक केस में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट मान ली है। अजित पवार समेत कई लोगों को केस में बरी कर दिया गया है।

महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक से जुड़े कथित 25,000 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में मुंबई की एक विशेष अदालत ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है। इस फैसले के साथ ही मामले में दर्ज FIR से पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार , उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार और अन्य आरोपियों को राहत मिल गई है। इकोनॉमिक ऑफेंस विंग द्वारा दाखिल क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया था कि जांच के दौरान किसी भी प्रकार का आपराधिक अपराध साबित नहीं हुआ। जांच एजेंसी ने विशेष अदालत को बताया कि न तो ऋण वितरण में कोई आपराधिक अनियमितता पाई गई। न ही वसूली प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आई। अदालत ने इस रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मामले को बंद कर दिया।

अन्ना हजारे की याचिका भी खारिज

कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट मानने के बाद एक्टिविस्ट की उस पिटीशन को खारिज कर दिया जिसमें कथित स्कैम की जांच की मांग की गई थी। क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी महाराष्ट्र के बारामती में एक प्लेन क्रैश में अजित पवार की मौत के एक महीने बाद मिली है। स्पेशल जज महेश जाधव ने एक्टिविस्ट अन्ना हजारे और दूसरों की क्लोजर रिपोर्ट को चैलेंज करने वाली प्रोटेस्ट पिटीशन खारिज कर दीं। कोर्ट के डिटेल्ड ऑर्डर का अभी इंतजार है।

2019 में इस मामले की जांच शुरू हुई

बॉम्बे हाई कोर्ट के कहने पर 2019 में इस मामले की जांच शुरू हुई थी। उस समय एक डिस्ट्रिक्ट बैंक के डायरेक्टर पवार के अलावा FIR में सरकारी अधिकारियों, MSCB के उस समय के डायरेक्टर, अधिकारियों और दूसरों के नाम थे। EOW ने शुरू में आरोप लगाया था कि लोन बांटने में गड़बड़ियों की वजह से जनवरी 2007 और दिसंबर 2017 के बीच राज्य को 25,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। 2020 से इस केस में कई मोड़ आए।

फिर क्लोजर रिपोर्ट फाइल की

महा विकास अघाड़ी सरकार के दौरान EOW ने एक क्लोजर रिपोर्ट फाइल की थी जिसमें कहा गया था कि कोई क्रिमिनल ऑफेंस नहीं बनता है। 2022 में सरकार बदलने के बाद, यह खबर आई कि जांच एजेंसी ने केस को फिर से खोलने की कोशिश की लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आखिरकार, EOW ने एक बार फिर क्लोजर रिपोर्ट फाइल की।

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