सांसारिक भव बंधनों से मुक्ति दिलाती है श्रीमद्भागवत ज्ञान कथा
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:
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सिवनी। ब्रम्हलीन धर्म सम्राट
जगतगुरु शंकराचार्य की जन्मभूमि सिवनी जिला के पांजरा केवलारी में श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ की कथा आयोजित की गई.इस मौके पर श्रीमदभागवत भगवान की शोभायात्रा निकाली गई। कथाव्यास पूज्यपात 1008 दण्डी स्वामी ईंदूभावानंन्द तीर्थ जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सांसारिक भव बंधनों से मुक्ति दिलाती है, साथ ही जीवन का कल्याण करती है। ये बातें पांजरा (केवलारी) में जारी श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को बोरीयाकला शंकराचार्य आश्रम रायपुर से पधारे कथा व्यास परमपुज्य 1008 यतिप्रवर दण्डी स्वामी डॉ. श्री इन्दुभवानन्द तीर्थ जी महाराज ने श्रद्धालुजनों से कहीं।
कथा व्यास ने श्रीमद्भागवत महापुराण के महात्म्य, परीक्षित उपाख्यान और शुकदेव जी के आगमन का वर्णन किया। भक्ति, ज्ञान और वैराग्य पर जोर देते हुए बताया कि कृष्ण कथा जीवन का कल्याण करती है। बताया कि राजा परीक्षित ने कलयुग के प्रभाव में आकर शमीक ऋषि के गले में मृत सांप डाल दिया, जिसके बाद ऋषि के पुत्र ने उन्हें सात दिन में मरने का श्राप दे दिया। इसके बाद राजा परीक्षित ने अपना राज्य छोड़ दिया और गंगा किनारे जाकर प्रायश्चित करने लगे, जहां शुकदेवजी ने भागवत कथा सुनाकर उन्हें मुक्ति दिलाई।इस अवसर पर बडी संख्या मे महिला-पुरुष श्रोतागणों द्धारा जयघोष किया गया.
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