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कोराडी श्री महालक्ष्मी जगदंबा तीर्थ मे आज से चैत्र नवरात्र प्रारंभ

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कोराडी श्री महालक्ष्मी जगदंबा तीर्थ मे आज से चैत्र नवरात्र प्रारंभ

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:

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9822550220

 

महाराष्ट्र प्रदेश के नागपुर जिले के कोराडी में स्थित श्री महालक्ष्मी जगदंबा मंदिर एक प्राचीन और चमत्कारिक शक्तिपीठ है.इस संस्थान के अध्यक्ष राजस्व मंत्री और नागपुर अमरावती के संपर्क मंत्री श्री चंद्रशेखर बावनकुळे हैं. जिन्होंने इस देवस्थान तीर्थ स्थल को गुजरात के सुविख्यात अक्षरधाम मंदिर के नक्शे के मुताबिक हेमाण्डपंथी शैली मे निर्माण किया गया है.

यहां आज से चैत्र नवरात्र महोत्सव प्रारंभ हो चुका है. यहां अखंड ज्यौत भवन मे मनोकामना अखंड ज्यो स्थापित किए जाते हैं. श्री महाल्क्ष्मी जगदंबा संस्थान मे विराजित श्री राजराजेश्वरी जगदम्बा जो स्वयंभू मूर्ति और माता के तीन रूपों (बालिका, युवती, वृद्धा) में दर्शन के लिए प्रसिद्ध है। लगभग ईशा पूर्व 5000 वर्ष महाभारत कालीन पुराना यह मंदिर, जो कभी ‘जाखापुर’ के नाम से जाना जाता था, नवरात्र में लाखों भक्तों की आस्था का मुख्य केंद्र है।

कोराडी देवी मंदिर का इतिहास (History of Koradi Devi Temple)

प्राचीनता और स्वयंभू मूर्ति के दर्शनार्थ श्रद्धालूगण आते ही हैं. यह मंदिर बेहद प्राचीन है, जिसे लगभग ईशा पूर्व 5000 साल यानी महाभारत कालीन का माना जाता है। यहाँ माता की मूर्ति स्वयंभू (अपने आप प्रकट हुई) मानी जाती है।

पौराणिक कथा (राजा झोलन): प्रचलित कथा के अनुसार, जाखापुर के राजा झोलन को कोई संतान नहीं थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने कन्या के रूप में अवतार लिया, जिन्हें जगदंबा कहा गया। वे आदि-शक्ति का स्वरूप थीं और उन्होंने राजा को युद्ध में मार्गदर्शन देकर विजय दिलाई।

ऐसा माना जाता है कि युद्ध से लौटते समय, देवी ने उस स्थान पर विश्राम किया जहाँ आज मंदिर स्थित है, जो बाद में ‘करोड़ी’ और फिर कोराडी कहलाया।यह तीर्थ स्थल गिरी पुरी गोस्वामी परिवार के अधिनस्थ था.वर्तमान परिवेश मे यह धर्मदाय आयुक्त पंजीयन संस्था अधिनियम के तहत वार्षिक आय व्यय का लेखा जोखा हिंसाब अंकेक्षण किया जाता है.

आधुनिक जीर्णोद्धार के संबंध मे बतादें कि वर्तमान में यह एक भव्य मंदिर संस्थान

कोराडी देवी मंदिर का महत्व

तीन रूपों में दर्शन होते हैं. यहाँ माता जगदंबा दिन में तीन रूप धारण करती हैं – सुबह बालिका, दोपहर में युवा, और शाम को वृद्धावस्था।

शक्तिपीठ: कोराडी मंदिर को विदर्भ क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण शक्तिपीठ माना जाता है।

मनोकामना पूर्ण: भक्तों का अटूट विश्वास है कि यहाँ दर्शन करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

नवरात्रि उत्सव: नवरात्रि के दौरान, यहाँ नौ दिनों तक विशेष पूजा और महोत्सव होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

विशेष मान्यता के अनुसार संतान प्राप्ति के लिए भी यह मंदिर प्रसिद्ध है।दर्शनार्थियों के लिए यह मंदिर नागपुर शहर से लगभग 15 किमी दूर, कोराड़ी झील के पास स्थित है यह मंदिर आमतौर पर सुबह से देर रात तक दर्शन के लिए खुला रहता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी बहुत लोकप्रिय है। कोराडी देवी मंदिर, जिसे श्री महालक्ष्मी जगदंबा संस्थान कोराडी के नाम से भी जाना जाता है, नागपुर शहर के आसपास देहात गांव तथा विदर्भ के कोने कोने से श्रद्धालू यहां अपनी मनोकामना लेकर आते हैं.

कोराडी देवी मंदिर, जिसे श्री महालक्ष्मी जगदंबा संस्थान कोराडी के नाम से भी जाना जाता है, नागपुर शहर के पास कोराडी में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है।

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