मांसाहारी चरित्रहीन और झूठ छल कपट विश्वासघाती के घर अन्न ग्रहण वर्जित
टेकचंद्र शास्त्री:
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भारतीय वैदिक सनातन धर्म ग्रन्थ नारद स्मृति और अन्य हिंदू धर्मग्रंथों (जैसे मनुस्मृति, गरुड़ पुराण) के अनुसार भोजन की शुद्धता और पवित्रता का बहुत महत्व बताया गया है। आपका कथन है, कि मांसाहारी, परस्त्री व्यभिचारी (चरित्रहीन), और झूठ छल कपट तथा विश्वासघात करने वाले व्यक्तियों के यहां भोजन नहीं करना चाहिए, सनातन धर्म की नैतिकता से मेल खाता है।
नारद स्मृति और शास्त्रों के अनुसार भोजन-वर्जित जो लोग पापी पाखण्डी और अपराधी है जो व्यक्ति विश्वासघाती हो, या भ्रष्टाचार चोरी-डकैती जैसे आपराधिक कार्यों से जीविका चलाता हो, उसके यहां भोजन वर्जित है।
अनैतिक और चरित्रहीन: परस्त्री संग व्यभिचार और पराये पुरुष के साथ व्यभिचार करने वाले या अनैतिक आचरण (व्यभिचारी) वाले व्यक्ति के घर का अन्न जल पीने- खाने से व्यक्ति उनके पापों का भागीदार बनता है।
मांसाहारी और तामसिक भोजन के संबंध मे बतादें कि मानव धर्म शास्त्रों में स्पष्ट रूप से उन लोगों के यहां भोजन न करने की सलाह देते हैं जो मांसाहार, मद्यपान या नशीली चीजों का व्यापार य सेवन करते हैं। मान्यता है कि अन्न से मन बनता है, इसलिए ऐसा भोजन मन को दूषित करता है।
झूठ बोलने वाले, जो लोग कपटी और धूर्त हैं, दूसरों को ठगते चोरी चुगलखोरी करते और हमेशा झूठ छल कपट का सहारा लेकर अपनी जीविका चलाते हैं, उनके घर का भोजन जलपान नहीं करना चाहिए। एसे लोग
क्रूर और निर्दयी होते हैं. जो व्यक्ति निर्दयी हो या दूसरों को अकारण कष्ट देता हो, उसके घर का अन्न लेने से मना किया गया है।
वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से शास्त्रों मे बताते हैं कि आप जैसा खाएं अन्न, वैसा होए मन। गलत व्यक्ति का अन्न व्यक्ति की चेतना को प्रभावित करता है।
वैज्ञान के हिसाब से ऐसे व्यक्ति अक्सर अस्वच्छ या अनैतिक वातावरण में रहते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं (बैक्टीरिया, रोग) हो सकती हैं। हालकि मां काली के भक्त मांसाहारी और कालभैरव के भक्त मदिरापान के शौंकीन होने खबर है.परंतु उनके लिए भी मूक प्राणियों की हत्या,पर स्त्री गमन, पर पुरुष गमन और झूठ छल कपट तथा विश्वासघात की नीति अपनाना वर्जित माना गया है.
संक्षेप में, जो व्यक्ति अनैतिक, अधर्मी, और चरित्रहीन हो, उसके यहां भोजन जलपान करने से व्यक्ति अपने अर्जित पुण्य कर्म खो देता है.
जो महिला-पुरुष वैदिक सनातन धर्म के नियमों का पालन करते हुए जीवन यापन करते है.वे धरती मे साक्षात देवी देवताओं के समान माने जाते है.
सहर्ष सूचनार्थ नोट्स:-
उपरोक्त समाचार सामान्य ज्ञान पर अधारित उक्त नियम सनातन हिन्दु धर्म के उपासकों और अनुयायियों के लिए है.इसमे किसी की भावनाओं को आहत करना हमारा उद्देश्य नहीं है.अपितु धर्म शास्त्रों के कथनानुसार लेख मानव धर्म हितार्थ प्रस्तुत
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