DCM अजितदादा और NCP चीफ शरद पवार की मुलाकात एक संयोग? अप्रत्यक्ष माहौल गरमाया?
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: सह-संपादक रिपोर्ट
मुंबई। NCP के दोनों गुटों के नेताओं की मुलाकात से एकबार फिर चर्चा शुरू हो गई. यह मुलाकात DCMअजितदादा पवार और शरदचंद्र पवार गुट के एक नेता के बीच हुई है.वयोबृद्ध पूर्व सीएम शरदचंद्र पवार के बिना अजीतदादा नही रह सकता है। NCP चीफ शरदचंद्र पवार को भतीजा अजीत पवार के बिना अपने आपको खोया खोया लगता था? और मन विचलित होने लगा था? तथा ह्रदय में धडकनें बढने लगी थी? पिछले सप्ताह शरदचंद्र पवार की तबियत बिगड़ने की वजह भी अजीतदादा से दूरियां ही वजह थी।
महाराष्ट्र के शिरुर से सांसद अमोल कोल्हे ने गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार के मुख्यालय मंत्रालय में डिप्टी सीएम अजित पवार से मुलाकात की जिसके बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है. दरअसल, अमोल कोल्हे, शरद पवार गुट की NCP के नेता हैं. इस मुलाकात के बाद कोल्हे ने पत्रकारों को बताया कि डिप्टी सीएम से मुलाकात के दौरान उन्होंने निवेश परियोजनाओं को लेकर बात की है.
अमोल कोल्हे ने कहा कि डिप्टी सीएम अजित पवार से मुलाकात के दौरान उन्होंने पुणे जिले में अपने लोकसभा क्षेत्र शिरूर की दो प्रमुख निवेश परियोजनाओं को लेकर चर्चा की है. कोल्हे ने कहा, ”मेरे निर्वाचन क्षेत्र में दो प्रमुख परियोजनाएं हैं. इनमें पुणे-नासिक रेलवे लाइन और दूसरा इंद्रायणी मेडिसिटी, इंद्रयाणी मेडिसिटी में एक ही छत के नीचे 27 तरह के अस्पताल स्थापित किए जाएंगे.” एक्टर से राजनीति में कदम रखने वाले अमोल कोल्हे ने कहा कि जब राज्य में महाविकास अघाड़ी गठबंधन की सरकार थी तब अजित पवार ने इन परियोजनाओं के संबंध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में हालांकि उन्होंने अजित पवार और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी गुटों के बीच चल रही खींचतान को लेकर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. दोनों ही पार्टियां एनसीपी पर नियंत्रण चाहती हैं औऱ यह मामला चुनाव आयोग के पास है. अमोल कोल्हे ने कहा, ”मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता. मैं इस प्रकिया का हिस्सा नहीं हूं.” बता दें कि इसी साल अजित पवार एनसीपी में बगावत कर शिवसेना-बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल हो गए थे. उनके साथ 8 और विधायकों ने सरकार का दामन थाम लिया था. इसके बाद से ही दोनों गुटों के बीच चुनाव चिह्न को लेकर खींचतान चल रही है.अब उन्हे एक मंच पर आना ही पडेगा? अन्यथा कोई बडा अपशकुन हो सकता है? क्योंकि NCP चीफ शरदचंद्र पवार को और कितने साल रहना है?फिर आपसी संबंध को क्यों बिगाड़ें?इसलिए बेहतर है कि सभी एक हो जाने में ही भला है।
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