✍️टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट
पचमढी : मध्यप्रदेश के होशंगाबाद और छिन्दवाडा जिले की सीमा में स्थित विहंगम सतपुडा यानी 7 गगनचुम्बी शिखर पर रहस्यमयी जागरुक नाग मंदिर देवस्थान हैं। इस मंदिर से कई रहस्य जुड़े हुए हैं। ये मंदिर साल में सिर्फ 10 दिन के लिए सावन मास में खुलता है। इस दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रृद्धालु आते हैं। जानकारों के अनुसार इन पर्वतमालाओं में अनेक प्रकार के नाग और नगीनों के समूह विचरण करते हैं।
इस बार ये पर्व 21 अगस्त, सोमवार को नागपंचमी त्यौहार है। इस दिन प्रमुख नाग मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। हमारे देश में कईं रहस्यमयी नाग मंदिर भी हैं, ऐसा ही एक मंदिर मध्य प्रदेश में यहां 10 दिनों का मेला लगता है, जिसमें लाखों भक्त यहां दर्शन करने आते हैं। आगे जानिए इस मंदिर से जुड़ी खास बातें…
इसे कहते हैं मध्य प्रदेश का अमरनाथ
पचमढ़ी स्थित इस नाग मंदिर को मध्य प्रदेश के अमरनाथ कहा जाता है। इसके पीछे कारण है, इसकी दुर्गम चढ़ाई। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए सात पहाड़ों को पार करना पड़ता है। यात्रा के दौरान जरा-सी भी चूक आपकी जान ले सकती है। एक ओर ऊंचे-ऊंचे पहाड़ और नीचे गहरी खाई किसी को भी डराने के लिए काफी है। यही कारण है कि इस मंदिर को मध्यप्रदेश का अमरनाथ कहते हैं। वो भी नागपंचमी के ठीक 10 दिन पहले। इस बार नागद्वार मंदिर की यात्रा मुख्यत: 12 अगस्त से शुरू हो चुकी है, जो 22 अगस्त तक रहेगी। इस बार नागद्वार मंदिर का यात्रा में लगभग 6 से 7 लाख लोगों के आने की उम्मीद है। पुलिस-प्रशासन ने इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
यहां से शुरू होगी यात्रा
नागद्वारी मंदिर की यात्रा नागफनी नाम के स्थान से शुरू होती है। ये यात्रा लगभग 15 किलोमीटर की होती है। यात्रा के दौरान सात विहंगम पहाड़ों पर चढ़ना होता है। ऊंचे-नीचे रास्ते और पहाड़ों पर बनी सीढ़ियों पर चढ़ना किसी रोमांचक यात्रा से कम नहीं होता। नागद्वारी गुफा सतपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आती है, इसलिए आम दिनों में यहां प्रवेश वर्जित होता है। इस यात्रा को पूरा करने में लगभग 2 दिन का समय लगता है
ये है मंदिर से जुड़ी मान्यताएं
नागद्वारी मंदिर के अंदर नागदेवता की कई मूर्तियां हैं। इससे थोड़ी आगे स्वर्ग द्वार है, यहां भी नागदेव की प्रतिमाओं की पूजा की जाती है। मान्यता है कि जो भी भक्त यहां दर्शन करने आते हैं उनकी हर इच्छा पूरी होती है। एक मान्यता ये भी है कि इन पहाड़ियों पर सर्पाकार पगडंडियों से यात्रा करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। नागद्वारी में गोविंदगिरी पहाड़ी पर मुख्य गुफा में शिवलिंग पर काजल लगाने की परंपरा भी है, कहते हैं इससे शिवजी प्रसन्न होते
पचमढ़ी के नागद्वारी मेले में पहुंचे लाखों श्रद्धाल
पचमढी। नागपंचमी मेला 28 जुलाई से 22 अगस्त तक आयोजित किया जा गया है. पिछले 10 दिन से नागपंचमी तक नागद्वारी दर्शन के लिए 7 लाख लोग यहां पहुंचकर दर्शन कर चुके हैं.
नागद्वार देव स्थान के दर्शन को पहुंचे लोग
मंगलवार को पूरे देश में नागपंचमी बड़े धूमधाम से मनाई गई. मदिरों मे श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. वहीं मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम अर्थात होशंगाबाद जिले में स्थित पचमढ़ी के जंगलों में नागद्वार देव स्थान के दर्शन करने लोग पहुंच रहे हैं. यहां पहुंचना आसान नहीं था. इस स्थान तक पहुंचने के लिए खतरनाक 7 पहाड़ों की चढ़ाई और बारिश में भीगे घने जंगलो में 12 किलोमीटर का दुर्गम रास्ता पार कर पहुंचना होता है.इन दुर्गम और विहंगम पहाडों से उफनते झरनों का दृश्य देखते ही बनता है।बारिश में यह रास्ता और अधिक खतरनाक हो जाता है पर इन सब कठिनाइयों पर आस्था भारी है और लाखों लोग नागद्वार देवस्थान के दर्शन करने पचमढ़ी के नागद्वारी स्थान पर जा रहे हैं. मान्यता है कि जो लोग नागद्वार जाते हैं उनकी मांगी गई मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है.
पिछले 10 दिन से नागपंचमी तक नागद्वारी दर्शन के लिए 7 लाख लोग यहां पहुंचकर दर्शन कर चुके हैं. गौरतलब है कि हिल स्टेशन और पर्यटन स्थल पचमढ़ी के प्रसिद्ध नागद्वारी मेला में नागपंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी. श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन स्तर से व्यापक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं. कलेक्टर नीरज कुमार सिंह स्वयं मेला की मानिटरिंग कर रहे है.
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मेला स्थल पर यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो इस बात का विशेष ध्यान रखा गया था. यह मेला 25 जुलाई से 22 अगस्त तक आयोजित किया जा रहा है जिसमें मुख्य रूप से नागपंचमी पर भारी भीड़ रहती है. तीन दिन से बारिश होने के बाद भी यात्रियों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होने दी गई. नागद्वार यात्रा करने वाले यात्रियों की ठहरने से लेकर दवाईयों के शिविर की व्यवस्था मेला स्थल पर की गई जिसके लिए चौबीस घंटे मेडिकल टीम विभिन्न पॉइंट्स पर तैनात रही थी. मेले में 23 अगस्त से लेकर अभी लगभग 7 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं.
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