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2025 में इस्लाम होगा दुनिया का सबसे बड़ा धर्म? निष्कर्ष और भविष्यवाणी

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2025 में इस्लाम होगा दुनिया का सबसे बड़ा धर्म? निष्कर्ष और भविष्यवाणी

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट,9822550220

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नई दिल्ली: 2050 तक इस्लाम दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला धर्म होगा। अमेरिकी थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर इस बात का खुलासा किया है। वर्तमान में दुनिया में सर्वाधिक आबादी ईसाइयों की है। इस्लाम अभी दूसरा सबसे बड़ा धर्म है लेकिन उसकी आबादी में सबसे ज्यादा तेजी से वृद्धि हो रही है। प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार 2010 तक दुनिया में मुसलमानों की आबादी करीब 1.6 अरब थी जो दुनिया की कुल आबादी का 23 प्रतिशत है।
प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार अगर इस्लाम इसी रफ्तार से बढ़ता रहा हो तो इक्कीसवीं सदी के अंत तक वो ईसाई धर्म को पीछे छोड़ देगा। रिसर्च सेंटर के अनुसार साल 2050 तक भारत दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी (करीब 30 करोड़) वाला देश बन जाएगा। अभी भारत इस मामले में इंडोनेशिया के बाद दूसरे नंबर पर है।

इस्लाम विश्व में सबसे तेजी से बढ़ता हुआ धर्म है इसके क्या कारण है? कि इस्लाम मे ऊंच-नीच और गरीब अमीर का भेदभाव नहीं है। इस्लाम में यदि मस्जिद में मलेच्छ भंगी, बसोड,चमार पहले आया तो उन्हे पहली पंक्ति मे बिठाया जाएगा?अगर कोई खास अमीर जादा खान, पठान, सैयद,मौला मौलाना वाद में आया तो वे बेहिचक पीछे बैठ जाएंगे? जबकि हिन्दू धर्म में विद्धान ब्राह्मण,क्षत्रिय, राजपूत बाद में आया तो उन्हे प्रथम पंक्ति मे बैठेंगे और मलेच्छ हरिजन पहले आये तो उन्हे पीछे बैठना पडेगा। हिन्दू धर्म में हरिजन और मलेच्छ को अभिव्यक्ति की आजादी नहीं है। इस्लाम मझप में मलेच्छ हरिजन भी मुल्ला,मौला, मौलाना,ईमाम और उलेमा बन सकता है। जबकि हिन्दू धर्म में मलेच्छ-हरिजन वेद वेदांत, उपनिषद का प्रवचनकार और पंडा पुजारी नहीं बन सकता है? इसलिए हिन्दू धर्म का अस्तीत्व धीरे धीरे समाप्त हो रहा है। इसके अलावा हिन्दू धर्म का राजनेता गरीब दलित हरिजन हिन्दू लोगों से अधिक मुसलमान समाज की इज्जत और वफादारी करता है। देश मे अनेक हिन्दू राजनेताओं ने मुस्लिम समाज के होनहार जबान लडकों को अपना जिगर का तुकडे की भांति इज्जत और ससम्मान करते है? और उन्हे पाल-पोस कर रखा जाता है।इस्लाम धर्म बढने का कारण यह भी है कि हिन्दू समाज के राजनेता गरीब, सत्यवादी और कर्तव्यपारायण हिन्दू कार्यकर्ताओं से घ्रणा और नफरत करता है। जरुरत पडने पर उक्त ईमानदार कमज़ोर हिन्दू कार्यकर्ता को झूठे केश में फंसाकर प्रताडित किया जाता है? जबकि इस्लाम धर्म मे इसके विपरीत है।
कारण यही है की इस्लाम धर्म खुद अपने अंदर ये खूबियां संजोए रखता है. कोई भी शरीफ-उन-नफ़्स आदमी अगर बिना किसी प्री डिटर्माइंड रिजल्ट के इस्लाम को समझने की कोशिश करेगा तो बहोत मुमकिन है की वो इससे आकर्षित होगा।
आप खुद देखिये की आजकल मुसलमानों की हालत क्या है और वो कितने बदनाम हैं लेकिन बावजूद इसके भी लोग इस्लाम धर्म अपना रहे क्यूंकि इस्लाम खुद अपने अंदर ये कूवत रखता है.
धर्म में पाई जाने वाली सच्चाई ही इसका कारण है, दूसरे धर्म इस में असफल हैं! महज 1400 साल पहले दुनिया में आने वाला इस्लाम इस समय दुनिया का सबसे तेज़ी से फैलने वाला धर्म है.और इस्लामोफोबिया यानी इस्लाम से डर पिछले करीब डेढ़ दशक में दुनिया के सामने परोसा गया सबसे बड़ा संकट. इस धर्म के बारे में ये दोनों बातें परस्पर विरोधाभासी हैं. अगर इस्लाम इतना ही डरावना है तो इतनी तेज़ी से दुनिया भर में फैल क्यों रहा है?
और अगर इतना आकर्षक है कि दुनिया भर के लोग इसे अपना रहे हैं तो इसे न मानने वालों में इसके प्रति इतना डर और भ्रम कैसे भर गया है? इस सवाल की पड़ताल करने पर इस्लाम, उसके मानने वालों और न मानने वालों की तरह-तरह की राय सामने आती हैं.
दुनिया में इस्लाम इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहा है?जबकि इस्लाम धर्म की उत्पत्ति हिन्दू धर्म से हुई है?

इस्लाम दुनिया में तेजी से बढ़ता धर्म है ऐसा कोई तथ्य अब तक अनेक तथ्य सामने आ रहे है, लेकिन इसके बारे में 6-7 तथ्य दिये जा सकते है.इस्लाम में बहु-विवाह मान्य है और दुसरे धर्म के मुकाबले चाईल्ड बर्थ रेट भी ज्यादा है. इससे ये कह सकते है की मुस्लिमों की आबादी तेजी से बढ़ती है. किसी भी एक देश की मुस्लिम जनसंख्या आप पिछले पचास सालों से उसी देश के अन्य धर्मों की जनसंख्या के मुकाबले तुलना करके ये बात आप देख सकते हैं.
आंतरिक अस्थिरता के कारण सिरीया, येमेन तथा अन्य मुस्लिम देशों की बहुसंख्य जनसंख्या युरोप तथा अन्य देशों में स्थानांतरित हो गई है, जिसके कारण वहां मुस्लिम लोग बढ़ गये है ऐसा आभास होता है.
प्यू रिसर्च सेंटर के धर्म और सार्वजनिक जीवन पर नए जनसंख्या अनुमानों के अनुसार, दुनिया की मुस्लिम आबादी अगले 20 वर्षों में लगभग 35% बढ़ने की उम्मीद है, जो 2010 में 1.6 बिलियन से बढ़कर 2030 तक 2.2 बिलियन थी।

विश्व स्तर पर, मुस्लिम आबादी अगले दो दशकों में गैर-मुस्लिम आबादी की दर से लगभग दोगुनी होने का अनुमान है – गैर-मुस्लिमों के लिए 0.7% की तुलना में मुसलमानों के लिए औसत वार्षिक विकास दर 1.5% है। यदि वर्तमान रुझान जारी रहता है, तो मुसलमान विश्व की कुल अनुमानित जनसंख्या का 26.4% 2030 में 20.4% हो जाएगा, जो कि 2010 की विश्व जनसंख्या 6.9 बिलियन की अनुमानित है
इसका जवाब तो बहुत आसान है। इस्लाम धर्म प्राकृतिक, सरल, समझने में आसान और स्वीकार्य है। उसको समझने के लिए किसी गहरी फिलासफी और लंबे चौड़े व्याख्यान की आवश्यकता नहीं पड़ती। जो इंसान भी इस्लाम को साफ़ दिल से एक बार सुनता है उसे लगता है कि यह तो उसके दिल की आवाज़ है और उसके अंदर से आवाज़ आती है कि धर्म तो ऐसा ही होना चाहिए। और बस वह उसकी तरफ़ खिं चा चला आता है।
आप अगर देखें तो बाक़ी सारे धर्मों को समझने के लिए काफी उलझाओ वाली व्याख्या की जरूरत होती है। सुनने वाले के दिमाग़ में बहुत सारे सवाल उठते हैं, कुछ के जवाब मिल पाते हैं और बहुतों के जवाब उस धर्म में नहीं होते।
जिसने इंसानों को पैदा किया उसके अलावा कोई और उपास्य न है न हो सकता है। उसने इंसानों को इस दुनिया में इम्तिहान के लिए पैदा किया है और एक दिन सभी इंसानों को अपने जीवन के सभी कर्मों का हिसाब देना होगा। उस हिसाब में को पास हो गया उसे स्वर्ग में प्रवेश मिलेगा वर्ण नरक की यातना उसके हिस्से में आएगी। इंसानों के कर्म कैसे होने चाहिए यह बताने के लिए ईश्वर ने अपने पैग़म्बर भेजे और हज़रत मुहम्मद आख़िरी पैग़म्बर हैं। और अब प्रलय तक क़ुरआन ही उसकी ओर से अवतरित मार्ग दर्शन है।
बताइए, क्या आपको इसमें कोई फिलोसॉफी नज़र आईं? या कोई उलझाओ वाली बात लगी? नहीं न?
यही कारण है कि इस्लाम लोगों के दिलों में तेज़ी से जगह बना रहा है। और वह भी ऐसे माहौल में जब कि हर तरफ़ इस्लाम के ख़िलाफ़ झूठे प्रचार का एक तूफान खड़ा कर दिया गया है
दूसरे देशों में जाने वाले प्रवासी मुसलमानों की वजह से इस्लाम धर्म बढ रहा है। प्यू रिसर्च सेंटर के अनुमान के अनुसार साल 2050 तक यूरोप की मुस्लिम आबादी में करीब 10 प्रतिशत बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं अमेरिका में 2050 तक मुस्लिम आबादी कुल जनसंख्या का 2.1 प्रतिशत हो सकती है। अभी अमेरिका में मुस्लिम आबादी करीब एक प्रतिशत है। मुस्लिम देशों से दूसरे देशों में जाने वाले प्रवासियों की बढ़ती संख्या की वजह से भी अन्य देशों में मुस्लिम आबादी बढ़ेगी।

आबादी बढऩे के ये दो हैं प्रमुख कारण: प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार मुसलमानों की आबादी बढऩे के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि दर बाकी धर्मों से ज्यादा है। वैश्विक स्तर पर मुस्लिम महिला के औसतन 3.1 बच्चे होते हैं जबकि बाकी धर्मों का ये औसत 2.3 है।

रिपोर्ट के मुताबिक दूसरा कारण मुस्लिम जनसंख्या में वृद्धि, उनके माइग्रेशन और आईएस जैसे आतंकी संगठनों की हिंसक कार्रवाई ने कई देशों में इस धार्मिक समूह को डिबेट के बीच खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट ने इस ओर भी इशारा किया है कि कई जगहों पर मुस्लिमों से जुड़े कई तथ्यों की जानकारी ही नहीं है।
छोटी मुस्लिम आबादी के साथ रहने वाले अमेरिकियों ने भी माना है कि वे या तो इस्लाम के बारे में नहीं जानते या कम जानते हैं युवा आबादी होने का मतलब है मुसलमानों की बड़ी आबादी या तो बच्चे पैदा कर रहे है या भविष्य में करेगी। सबसे ज्यादा प्रजनन दर और सबसे ज्यादा युवा आबादी के कारण मुसलमानों की आबादी तेजी से बढ़ सकती है।

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