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मराठा आंदोलन एक बहाना है, DCM फडणवीस को हटाना है?अजीतदादा CM पद के लिए आतुर

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मराठा आंदोलन एक बहाना है, DCM फडणवीस को हटाना है?अजीतदादा CM पद के लिए आतुर

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री : सह-संपादक रिपोर्ट,9822550220

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मुंबई। महाराष्ट्र सरकार में सक्रिय CM एकनाथ शिंदे-DCM देवेंद्र फड़नवीस प्रशासन की कर्त्तव्य दक्ष कार्यप्रणालियों से तंग आकर असंतुष्ट नेताओं के पैर तले की जमीन खिसकने लगी है।जिसमे भाजपा के कुछेक नेता और NCP नेता DCM अजीतदादा पवार समर्थकों का समावेश है? हालकि NCP नेता अजीतदादा ने मुख्यमंत्री पद हांसिल करने के लिए वहुतेक प्रयास किये परंतु उनके सभी प्रयास असफल रहे। परिणामत: उन्हे मराठा आरक्षण आंदोलन करवाने का मार्ग अपना पडा है।
जानकार सूत्रों की माने तो NCP चीफ शरदचंद्र पवार ने महाराष्ट्र राज्य में भाजपा को नेस्तनाबूद करने की दृष्टी से अपना भतीजा अजीतदादा को भाजपा मे समर्थन करने के लिए मजबूर किया? ताकि ED के फन्दे से राहत और मन्नत भी पूरी हो जाए? उस समय NCP चीफ शरद पवार का कहना था कि फिलहाल हम अपना भतीजा अजीत पवार को भाजपा समर्थन मे भेज रहे हैं? बाद मे पीछे से हम भाजपा को समर्थन करने आ रहे हैं। परंतु भाजपा के त्यागी पुरुष DCM देवेंद्र फड़नवीस के सामने चाचा भतीजा पवार समूह की एक भी चली नहीं? और बनी बनाई सुनियोजित साजिश पर पूरी तरह से पानी फिरते नजर आने लगा है? नतीजतन NCP चीफ शरदचंद्र पवार + अजीतदादा पवार के कुशल मार्गदर्शन मे तीव्र मराठा आरक्षण आंदोलन का सहारा लेना पड़ा है। NCP नेताओं की कृपादृष्टि से मराठा आरक्षण आंदोलन हिंसा का रुप धारण कर चुका है। जिसे लेकर विपक्ष के निशाने पर आए राज्य के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि हिंसा करना सरासर गलत है। पुलिस अधिकारियों ने 30 अक्टूबर को दिन और रात में हिंसा करने वालों की पहचान की है। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बतकही है। परिणामत: उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने मराठा आरक्षण में हिंसा पर अपनी चुप्पी तोड़ी दी है। फडणवीस ने कहा कि अधिकारियों ने 50 से 55 लोगों की पहचान की है जो मौजूदा मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में हिंसक गतिविधियों में शामिल थे। उन्होंने कहा कि दोषियों को कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।फडणवीस के पास गृह विभाग भी है। उन्होंने आरक्षण की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों द्वारा हिंसा और आगजनी की निंदा की, जिन्होंने 30 अक्टूबर को बीड और छत्रपति संभाजीनगर जिलों में आंदोलन के दौरान तीन विधायकों के अलावा कुछ स्थानीय नेताओं के आवासों या कार्यालयों को निशाना बनाया और एक नगर परिषद भवन में आग लगा दी।
फडणवीस ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जिन प्रदर्शनकारियों ने बीड जिले में एक घर में आगजनी की कोशिश की, जहां परिवार के सदस्य भी मौजूद थे, उन पर हत्या के प्रयास का आरोप लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले कुछ दिनों में हुई हिंसक घटनाओं में शामिल 50 से 55 लोगों की पहचान की है। उन्होंने कुछ खास लोगों और एक खास समुदाय के सदस्यों के घरों पर हमला किया। कुछ विधायकों के घरों में आग लगा दी गई और होटलों के साथ-साथ कुछ संस्थानों को भी निशाना बनाया गया। यह बिल्कुल गलत है। फडणवीस ने कहा कि सरकार ने इन घटनाओं को गंभीरता से लिया है और उपद्रवियों को कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
फडणवीस ने कहा कि एक घर को जलाने का प्रयास किया गया जब परिवार के कुछ सदस्य अंदर थे। मामले में पुलिस और गृह विभाग सख्त कार्रवाई करेगा। दोषियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत आरोप लगाए जाएंगे। पुलिस मूकदर्शक नहीं बनी रहेगी। फडणवीस ने कहा कि शांतिपूर्वक विरोध करने वालों को कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा, लेकिन किसी भी रूप में हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एनसीपी के विधायक प्रकाश सोलंके और संदीप क्षीरसागर को आरक्षण की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के गुस्से का सामना करना पड़ा, जिन्होंने बीड जिले में उनके घरों को आग लगा दी। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि छत्रपति संभाजीनगर जिले में प्रदर्शनकारियों ने बीजेपी के एक विधायक के कार्यालय में तोड़फोड़ हूई है। सार्वजनिक संपत्ती को नुकसान पहुंचाने वालों पर कानूनी कार्रवाई कोर्ट कानून करेगा।

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