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जानिए महात्मा सिद्धार्थ गौतम बुद्ध की 5 अनमोल सीख

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जानिए महात्मा सिद्धार्थ गौतम बुद्ध की 5 अनमोल सीख

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टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री : सह-संपादक रिपोर्ट

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महात्मा सिद्धार्थ गौतमबुद्ध ने मनुष्य को सुख और आनन्द पूर्वक जीवन जीने के लिए 5 सूत्र बतलाए है.अब मानना है तो मानिए कोई जोर जबरदस्ती नहीं है.

 

1-बुद्ध कहते हैं कि- अतीत पर ध्यान मत दो, भविष्य के बारे में मत सोचो, अपने मन को वर्तमान क्षण पर केंद्रित करो।

2-हृदय में अंकित कर ले कि मैं हंसी-मजाक में भी कभी असत्य नहीं बोलूंगा।

3-सत्यवाणी ही अमृतवाणी है, सत्यवाणी ही सनातन धर्म है। सत्य, सदर्थ और सधर्म पर संतजन सदैव दृढ़ रहते हैं।

4-जीवन में हजारों लड़ाइयां जीतने से अच्छा है कि तुम स्वयं पर विजय प्राप्त कर लो। फिर जीत हमेशा तुम्हारी होगी, इसे तुमसे कोई नहीं छीन सकता।

5-संतोष सबसे बड़ा धन है, वफादारी सबसे बड़ा संबंध है और स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है।

बुद्ध ने चार आर्य सत्य बताये। 1. दुःख है। 2. दुःख का कारण है। 3. दुःख को मिटाने के उपाय हैं। 4. दुःख मिटने के बाद की एक अवस्था है। इन्हीं चार आर्य सत्य पर बुद्ध की पूरी देशना टिकी है। पुरा धर्म, पुरा संप्रदाय खड़ा है। बुद्ध की सारी सीखें अनमोल हैं, उनका कोई जोड़ नहीं। उन्होंने गार्हस्थों के लिये अलग और अपने सन्यासियों के लिये अलग सिद्धांत बतलाए। लेकिन उनकी कुछ सीखें ऐसी हैं जो सभी के लिये ग्राह्य हैं। 1. वर्तमान में जीना। 2. होश पूर्वक रहना। 3. उन्होंने प्रेम की जगह मैत्री को स्थापित किया। 4. दिन भर में कम से कम दो बार ध्यान के लिये बैठना। 5. सृष्टि के सभी जीवों पर दयालु और करुणा पूर्ण होना।

 

महात्मा बुद्ध एशिया के पुंज क्यों कहे जाते हैं?

क्योंकि जो दिखता है वही बिकता है। भगवान बुद्ध को एशिया के जिन देशों में पुंज कहा जाता है वहाँ बुद्ध स्वयं तो कभी गये नहीं और न ही वहाँ के किसी मूलनिवासी ने बुद्ध को कभी देखा।

 

सम्राट अशोक व उनके बाद के लोगों ने बौद्ध धर्म की जो मार्केटिंग की उसके लिए मूल बौद्ध सिद्धांतों में बहुत बदलाव किये ताकि दुनिया उसे आसानी से स्वीकार करे। इसीलिए बुद्ध भगवान के अहिंसा के उपदेश की हत्या कर के उन्होंने अपने ग्रंथों में कस्यप बुद्ध को चिड़िया का मांस तक खिलवाया है। इतना ही नहीं बौद्ध ग्रंथों में बहुत से उपदेशों व प्रकरणों को सनातनी ग्रंथों से कॉपी किया गया है जिसका प्रमाण कई पुराने चीनी साहित्यों में मिलता है।

अभी हाल ही में एक महायानी बौद्ध भिक्षु ने जैन मुनि से ये सवाल किया कि आपका जैन धर्म भारत के बाहर क्यों नहीं फैला तो इस पर जैन मुनि ने भी यही जवाब दिया कि आपने अपने धम्म के प्रचार के लिए उसमें बहुत बदलाव किये जो कि हम जैनियों ने नहीं किये। बस इसीलिए बुद्ध को एशिया का पुंज कहते हैं महावीर को नहीं।

और बाद में इतिहासकारों के समुदाय में भी अधिकांश लोग बौद्ध धर्म से प्रभावित ही रहे हैं। क्योंकि भारतीय पुरातत्व विभाग के जनक कर्निंगम एलेक्ज़ेंडर ने जब सबसे पहले अयोध्या की खुदाई की तो उसका उद्देश्य राम को खोजना नहीं था बल्कि बौद्ध नगरी साकेत को खोजना था क्योंकि वो बुद्ध से प्रभावित था। इसके बाद उनकी गद्दी पर जब हेनरी फ्यूहरर बैठा तो वो भी बौद्ध था। उसने तो इतने फर्जीवाडे किये कि भगवान बुद्ध को वास्तविक सिद्ध करने के लिए सुअर के दाँत को बुद्ध का दांत बता कर पेश किया। कई शिलालेखों का भी स्वयं से निर्माण करा कर उसे प्राचीन बौद्ध शिलालेख बताया।

हद्द तो कब हुई जब इन फ़र्ज़ीवाडों की वजह से उसे इस्तीफ़ा देना पड़ा तो वो बौद्ध भिक्षु बन गया।

अब आप स्वयं समझिए कि बुद्ध को एशिया का पुंज घोषित करने वाले इतिहासकार कितने निष्पक्ष रहे हैं

 

सहर्ष सूचनार्थ नोट्स:-

 

वर्तमान परिवेश मे अज्ञानी मनुष्य सुख प्राप्त करने के लिए: मनुष्य खूबसूरत स्त्रियों के *”मल-मूत्र छिद्र मे सुख और आनन्द”* की तलाश मे पागल हो रहा है.

 

*निष्कर्ष:-*

*नारी नारी मत कर बालक नारी मृत्यू का द्धार।।*

 

*प्रशन्न हूई तो क्या देगी,सिर्फ मल मूत्र का द्वार।।*

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