राजस्थान सरकार को हाईकोर्ट द्धारा अवैध धर्म परिवर्तन पर रोक का आदेश
टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:
9822550220
श्रीगंगानगर। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के कालियास गांव में स्थित मिरेकल चर्च ऑफ जीसस में चल रही आरोपी पर अवैध धार्मिक अपराध और राजस्थान उच्च न्यायालय के खिलाफ धर्म परिवर्तन की वकालत करने वाले जोधपुर ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। रायल वकील प्रताप सिंह शेखावत द्वारा मिशाल प्लीकेट (पुजारी एल) पर सुनवाई करते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि क्षेत्र में कानून की पुष्टि से पालन की जाए और विशिष्टता पर निरंतर निगरानी रखी जाए। यह महत्वपूर्ण आदेश राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी एवं न्यायमूर्ति संगीत पुरोहितों ने एडवोकेट एडवोकेट सिंह शेखावत की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा।
पैरवी के मामले में अदालत ने कहा कि गंगानगर के कालिया गांव स्थित व्यावसायिक प्रकृति की भूमि पर बिना किसी गैरकानूनी के चमत्कारिक चर्च ऑफ जीसस के नाम से अवैध धार्मिक निर्माण किया गया है। उन्होंने अदालत को बताया कि वहां हिंदू और सिख समुदाय के स्थानीय निवासियों को कथित तौर पर ईसाई धर्म निषेध के रूप में मान्यता दी जा रही है। सूची में मांग की गई थी कि इन अवैध संपत्तियों पर तत्काल रोक लगाई जाए, अनाधिकृत निर्माण को हटाया जाए, परिसर को सीज किया जाए और साथ ही संबंधित इक्विटी फंडिंग और आर्थिक संपत्तियों की गहन जांच की जाए।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के पक्ष में अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि राजपुरोहित कोर्ट ने सरकार की ओर से यह सलाह दी थी कि भविष्य में यदि किसी प्रकार की कोई भी याचिका प्राप्त होती है, तो प्रशासन ने तत्काल और कठोर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। मामला सामने आता है या उनका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है, तो ऐसे मामले को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की जाए। एएजी ने यह भी सलाह दी कि संबंधित चर्च परिसर में किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस पर न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि राज्य प्राधिकारी यह भी सुनिश्चित करें कि बिना संबंधित परिसर में किसी भी प्रकार का स्वीकृत लाइसेंस प्राप्त किया जाए। फोर्ब्स कोर्ट द्वारा प्रतिवादी के विध्वंसक विजय एर्गल को जिला नामांकन के लिए शामिल करने का आदेश दिया गया है, जिसमें वे यह वचन देते हैं कि संबंधित किसी भी क्षेत्र में कोई भी शामिल नहीं है, यहां तक कि धार्मिक आंदोलन भी जो कानून के विपरीत हो, नहीं की जाएगी। ओफ़्फ़लैंड कोर्ट ने धार्मिक स्वतंत्रता और क़ानूनी व्यवस्था को देखते हुए सरकार को निगरानी के निर्देश दिए और ग्रेटर प्रताप सिंह शेखावत को यह छूट भी प्रदान की है कि यदि भविष्य में ऐसी सीलिंग सील पुन: दिखाई देती है या आवश्यकता होती है, तो वे नई विशिष्टताएं प्राप्त कर सकते हैं। दौलतमंद प्रताप सिंह शेखावत ने राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर के इस आदेश में सर्व समाज की धार्मिक भावनाओं और सुरक्षा की दिशा को एक ऐतिहासिक निर्णय बताया है
विश्वभारत News Website