Breaking News

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के पुत्र महाराजा कुश वंशज है कुर्मी-कुशवाह क्षत्रीय

Advertisements

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के पुत्र महाराजा कुश वंशज है कुर्मी-कुशवाह क्षत्रीय

Advertisements

टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: संयुक्त संपादक रिपोर्ट

Advertisements

 

पौराणिक कथाओं और रघुवंशावली के अनुसार, महाराजा कुश और नागकन्या कुमुद्वंती की मुख्य संतान का नाम अतिथि है। अतिथि ने ही कुश के बाद इक्ष्वाकु वंश (सूर्यवंश) को आगे बढ़ाया था।

कुर्मी और कुशवाहा (कोइरी) समाज के संदर्भ में प्रमुख तथ्य पौराणिक के संबंध मे मान्यता है कि लव-कुश (राम-सीता के पुत्र) इक्ष्वाकु वंश के पूर्वज हैं।

कुशवाहा (कोइरी) खुद को कुश का वंशज मानते हैं।

कुर्मी क्षत्रीय कई लोक कथाओं में इन्हें लव का वंशज माना जाता है, हालांकि ‘लव-कुश’ राजनीतिक और सामाजिक रूप से एक साथ कुर्मी-कुशवाहा समाज को संबोधित करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक शब्द है।

एतिहासिक ग्रंथों (जैसे कालिदास कृत रघुवंश) के अनुसार, कुश और कुमुदवती की मुख्य संतान अतिथि थे।

कुर्मी-कुशवाहा समुदाय के लोग कुश के वंशज होने का दावा करते हैं, लेकिन ‘कुशवाहा’ का शाब्दिक अर्थ ‘कुश का वंशज’ (कुश + वाह) के रूप में लिया जाता है, न कि कुमुद्वती से उत्पन्न किसी विशिष्ट व्यक्ति के नाम के रूप में माने जाते हैं.

जी हां पौराणिक,मान्यता के अनुसार, कुर्मी क्षत्रिय समाज को भगवान श्रीराम के बड़े पुत्र महाराजा कुश का वंशज माना जाता है। इस मान्यता के अनुसार कुर्मी कुशवाह समाज सूर्यवंशी रघुवंशी क्षत्रिय समूह से ताल्लुक रखता है, जो प्राचीन काल में सूर्यवंश की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले क्षत्रिय योद्धा थे। कुर्मी, कुणबी, कुशवाहा, पाटीदार आदि को लव-कुश के वंशज माने जाते है, जिसमें मुख्यत कुश के कुर्मी क्षत्रीय कुश से कुशवंशी (कुशवाहा) और लव से लववंशी का जुड़ाव माना जाता है। उन्हें सूर्यवंशी क्षत्रिय कहा जाता है जो कालांतर में कृषि आधारित व्यवस्था से जुड़े, लेकिन उनका मूल गौरव क्षत्रिय है. इन्हें लव-कुश से जोड़कर देखा जाता है।

नोट: यह एक पारंपरिक मान्यता और समुदाय का दावा है। कुछ धारणाओं में कुर्मी और कोइरी (कुशवाहा) को लव और कुश से अलग-अलग वंशज भी माना जाता है।

जी हाँ, पौराणिक कथाओं और रामायण के अनुसार, भगवान श्रीराम और माता सीता के पुत्र लव-कुश बडे ही हठयोगी (दृढ़ निश्चयी), जिद्दी (अपने लक्ष्य के प्रति) और सत्यवादी (सत्य के मार्ग पर चलने वाले) थे।

उनके चरित्र की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं.

हठी और वीर: लव-कुश ने महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में शिक्षा प्राप्त की और शस्त्र विद्या में निपुण थे। वे अपनी माता सीता के सम्मान और सत्य की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकते थे, जैसा कि उन्होंने अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को रोककर किया।

सत्यवादी और वचनों के पक्के: वे जानते थे कि वे सत्य के मार्ग पर हैं और निडर होकर अयोध्या की सेना, यहाँ तक कि लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न से भी युद्ध किया, लेकिन पीछे नहीं हटे।

उन्होंने न केवल राम के भाइयों को हराया, बल्कि हनुमान जी के साथ भी युद्ध किया, जो उनकी वीरता को दर्शाता है।

जब उन्हें यह पता चला कि वे श्री राम के पुत्र कुश के वंशज हैं कुर्मी कुशवाह क्षेत्रीय समाज हैं, तो लव-कुश ने तुरंत युद्ध रोक दिया और क्षमा मांगी, जो उनके उच्च चरित्र और सत्यवादिता का प्रमाण है।

Advertisements

About विश्व भारत

Check Also

जामसावली हनुमान मंदिर मे धर्म की जय अधर्म का नाश की गूंज का घोष

जामसावली हनुमान मंदिर मे धर्म की जय अधर्म का नाश की गूंज का घोष टेकचंद्र …

कैंसर मरीजों को आर्थिक सेवा ही तुकडोजी महाराज की आत्मतृप्ति

कैंसर मरीजों को आर्थिक सेवा ही तुकडोजी महाराज की आत्मतृप्ति टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री: 9822550220   …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *