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धार्मिक

अव्यवस्था के बीच बर्फानी बाबा अमरनाथ के दर्शनार्थ श्रद्धालुओं का हुजुम उमडा

जम्मू-कश्मीर : बर्फानी बाबा अमरनाथ के दर्शनार्थ देश के कोने कोने से श्रद्धालुओं का हुकुम उमर पडा है।केंद्रीय एवं राज्य प्रशासन की तरफ से चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था की गई है। बावजूद भी वहां के निवासियों द्धारा चोरी छिपे यात्रियों पर पथराव हो रहा है? अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय प्रचारक मोहन कारेमोरे ने यात्रियों को हेलीकाप्टर सुविधा के बारे …

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(भाग-39) गीता मे जीवात्मा की आंख को तेज करने के लिए शक्तिप्रकाश

    ✍️टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट जीवन आत्मा की आंख को तेज करने के लिए है, यह शरीर की आंखों की तुलना में सच्चाई को देखने का एक बेहतर और अधिक स्थायी साधन है, और उनका मानना ​​था कि पलायन उनकी शिक्षा के मूल आधार को झुठला देगा। यह विषय भगवद गीता के लिए भी मौलिक है । वहां, …

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(भाग-38) श्रीमद-भगवद गीता के माध्यम से जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है

श्रीमद्भागवत गीता में मस्तिष्क प्रबंधन का सिद्धांत आसान तरीके से समझाया गया है। इसे साधारण तरीके से समझ कर जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है। आधुनिक समय में श्रीमद्भगवद्गीता की महत्वता बढ़ती ही जा रही है, क्योंकि जैसे-जैसे भौतिक उन्नति हो रही है, वैसे वैसे लोगों की जिंदगी में तनाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे …

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(भाग-37) भगवत गीता में भगवान श्रीकृष्णचंद्र ने तप और दान की बड़ी सुंदर व्याख्या की है

श्रीमद्-भगवत गीता के अनुसार दान तीन प्रकार का होता है। जो दान कुपात्र व्यसनी को या अनादरपूर्वक या दिखावे के लिए दिया जाए वह अधम, जो बदले में कोई लाभ लेने या यश की आशा से कष्ट से भी दिया जाए वह दान मध्यम है। परंतु जो दान कर्तव्य समझकर, बिना किसी अहं भाव के, नि:स्वार्थ भाव से किया जाता …

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(भाग-36) गृहस्थ गीता के अनमोल वचन अतिथि देव भव: मातृदेव भव: पितृ देव भव:💫

देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु व:। परस्परं भावयंत: श्रेय: परमवाप्स्यथ।। —गीता 3/11 अर्थ : यज्ञ के द्वारा तुम देवताओं को प्रसन्न करो और वे देवता तुम्हें प्रसन्न रखें। इस प्रकार एक-दूसरे की परस्पर उन्नति, प्रसन्नता अथवा सद्भावना के भाव से तुम लोग परम कल्याण को प्राप्त हो जाओगे। आदर्श गृहस्थ जीवन के लिए कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण प्रेरक संकेत गीता के इस …

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जिल्हाधिकाऱ्यांनी मागितला सविस्तर अहवाल : आई तुळजाभवानीचे मौल्यवान दागिने गायब : जगदंबेच्या दरबारात काळाबाजार

उस्मानाबाद (धाराशिव) जिल्ह्यातील तुळजाभवानी मंदिरातील सोन्या-चांदीचे दागिने, देवीच्या पादुका, माणिक-मोती, वेगवेगळ्या राजे-महाराजांनी देवीचरणी अर्पण केलेली ७१ मौल्यवान दुर्मिळ नाणी अद्यापही गायब असल्याचे स्पष्ट झाले आहे. या प्रकरणी तीन अधिकार्‍यांसह पाच जणांवर त्रिसदस्यीय समितीने ठपका ठेवला होता. मात्र त्रिसदस्यीय समितीने दोषी ठरविलेल्या पाचजणांपैकी चार जणांना क्लिनचिट देऊन केवळ एकाच व्यक्तीवर कायदेशीर कारवाई करण्यात आली होती. सोने-चांदीच्या दागिन्यांचे मोजमाप करताना पुन्हा एकदा …

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(भाग-35) गीता के अनुसार भगवन नाम जप तप व्रत तथा एकान्त मे एकाग्र चित्त से ध्यान से शांति संभव?

प्रश्न – मैं गीता अध्याय 6 श्लोक 10 से 15 में वर्णित विधि अनुसार एक आसन पर बैठकर सिर आदि अंगों को सम करके ध्यान करता है, एकादशी का व्रत और जप भी रखते हैं इससे शान्ति को प्राप्त होगी उत्तर – कृप्या आप गीता अध्याय 6 श्लोक 16 को भी पढ़े जिसमें लिखा है कि हे अर्जुन यह योग …

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(भाग-34) गीता के अनुसार जो मनुष्य शुद्धचित्त एकाग्र होकर में ध्यान करता है वह रोग-शोक से मुक्त हो जाता है

श्रीमद्-भगवत गीता के अनुसार जब हम समर्पण के साथ कार्य करते हैं तब इससे हमारा मन शुद्ध हो जाता है और हमागीरी आध्यात्मिक अनुभूति गहन हो जाती है। फिर जब मन शांत हो जाता है तब साधना उत्थान का मुख्य साधन बन जाती है। ध्यान द्वारा योगी मन को वश में करने का प्रयास करते हैं क्योंकि अप्रशिक्षित मन हमारा …

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(भाग-33) श्रीमद-भगवद गीता का अनुसरण और अनुकरण करने से आध्यात्मिक सत्ता का साक्षात्कार संभव?

  ✍️टेकचंद्र सनोडिया शास्त्री:सह-संपादक की रिपोर्ट श्रीमद्- भगवत गीता में न केवल हिन्दू धर्म के प्राचीन पहलू कर्मकाण्ड पर विश्वास का, वरन आत्म संयम पर आधारित समस्त प्राणीमात्र के जीवन में नीतिशास्त्र का विकास दृष्टि गोचर होता है। गीता में इस बात पर बल दिया गया है कि जगत की व्यापार अविच्छिन्न गति से चलता रहे साधु पुरुष आन्तरिक रूप …

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(भाग-32) श्रीमद्-भगवत गीता के अनुसार सांख्य योग ज्ञान-विज्ञान और विवेक का मार्ग है

श्रीमद्- भगवत गीता के अनुसार, सांख्य योग ज्ञान विज्ञान और विवेक का मार्ग है, जिसमें स्वयं (पुरुष) की शाश्वत और अपरिवर्तनीय वास्तविकता और भौतिक संसार (प्रकृति) की हमेशा बदलती वास्तविकता के बीच अंतर को समझना शामिल है। जय श्रीकृष्णा दोस्तों। इस अध्याय में हम जानेंगे सांख्य योग (सांख्य योग का अर्थ है सन्यास, सन्यास का अर्थ है ज्ञान )। इस …

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